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Hanso Hansao Khoon Badhao

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सियासत के खेल ......

Posted On: 1 Aug, 2013 Others में

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Siyasat

सियासत की जमीन पर भी अजीब खेल होते हैं
नेताओं के हथकंडों के आगे सब फेल होते हैं
पहले वोट मांगने जनता के दरवाजे हाथ जोड़कर जाते हैं
और उन्हें विकास के झूठे सब्ज बाग दिखाते हैं

फिर विकास के नाम पर लोकलुभावन नीतियां बनाते हैं
रुपये मैं खर्च करते चवन्नी बाकी हजम कर जाते हैं

जिस जन ने बनाया इन्हें जनप्रतिनिधि उसी का मजाक उड़ाते हैं

पांच रुपये मैं अब कट चाय भी मिलती नही

ये पांच रूपये मैं पेट भर भोजन खिलाते हैं
गरीब के बच्चे को खाने का लालच देकर पहले स्कूल बुलाते हैं
फिर कमीशन के चक्कर मैं जहरीला खाना उन्हें खिलाते हैं
जिसे खाकर माँ की गोद मैं सोने वाले बच्चे

सदा के लिए मौत की नींद सो जाते हैं
फिर ये मगरमच्छ घडियाली आंसू बहाते हैं …..
कहीं दामिनी की तस्वीर पर मोमबत्तियाँ जलाते हैं ….

फिर रातों को बेटी सामान लड़कियों से रंगरेलियां मनाते हैं

जनता दो बूँद पानी को तरसती है

ये सत्ता के मद मैं मदहोश मदिरा के दरिया बहाते हैं

हादसों मैं मरी जनता की मौत पर बस थोडा शोक जताते हैं
अगले ही पल फिर से देश को लूटने मैं जुट जाते हैं
और फिर से उनके पीछे चलते हैं हम

क्यूंकि हम निरीह जनता वे नेता कहलाते हैं ….

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20 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nikhil के द्वारा
August 4, 2013

समसामयिक समस्याओं को उजागर कर्तिराचना. बधाई सचिन भाई.

    allrounder के द्वारा
    August 6, 2013

    एक अरसे बाद आपको पोस्ट पर पाकर और विचार पाकर हार्दिक प्रसन्नता हुई भाई निखिल…. ऐसे ही विचार देते रही धन्यबाद !

Manisha Singh Raghav के द्वारा
August 3, 2013

भैया काश आपकी कविता कोई नेता ही पढ़ ले क्या पता उसे एहसास हो जाये और देश सुधर जाये . एक भी नेता सुधर गया तो देश के आगे बढने की उम्मीद है . बहुत खूब अपनी कलम को और तेज कीजिए रुकिए मत .

    allrounder के द्वारा
    August 6, 2013

    सादर नमस्कार मनीषा जी …. आपकी अनमोल प्रतिक्रिया और प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार आपका … 

harirawat के द्वारा
August 3, 2013

सार्थक रचना के लिए बधाई ! आपने इन बरसाती मेढकों की, जो सेशन में संसद में इकट्ठे होकर टर टराते हैं जेब भर के ले जाते हैं फिर अगले सेशन में ही संसद में नजर आते हैं, पांच साल बाद पब्लिक को वोटर को माईं बाप बनाते हैं ! विकास का पूरा पैसा खाजाते हैं फिर भी भूखे रह जाते हैं, अच्छी धुनाई कर दी है !

    allrounder के द्वारा
    August 6, 2013

    आपका हार्दिक आभार हरी रावत जी अपने अनुपम विचार देने और कविता को विस्तारित करने के लिए !

seemakanwal के द्वारा
August 2, 2013

समयानुकूल रचना ,बहुत सही आप ने आइना दिखाया है ,आभार .

    allrounder के द्वारा
    August 6, 2013

    सादर नमस्कार सीमा जी आपके अनमोल प्रोत्साहन का हार्दिक आभार !

jlsingh के द्वारा
August 2, 2013

और फिर से उनके पीछे चलते हैं हम क्यूंकि हम निरीह जनता वे नेता कहलाते हैं … बिलकुल सही कहा आपने सत्य है एक एक शब्द!!

    allrounder के द्वारा
    August 6, 2013

    प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार सिंह साहब …….

alkargupta1 के द्वारा
August 1, 2013

देश की वर्तमान स्थिति पर तीब्र प्रहार किया है सचिन जी इन नेताओं व राजनेताओं पर कोई असर नहीं………. अति उत्तम रचना

    allrounder के द्वारा
    August 6, 2013

    आदरणीया अलका जी … प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार ऐसे ही स्नेह बनाए रखिये ……

manoranjanthakur के द्वारा
August 1, 2013

शानदार…कटाछ…ओज से भरपूर …बधाई

    allrounder के द्वारा
    August 6, 2013

    बहुत बहुत शुक्रिया मनोरंजन जी हौसला अफजाई का ….

Malik Parveen के द्वारा
August 1, 2013

बहुत बढिय सचिन जी …. बधाई

    allrounder के द्वारा
    August 6, 2013

    आपका हार्दिक आभार परवीन जी …..

Madan Mohan saxena के द्वारा
August 1, 2013

वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति कभी यहाँ भी पधारें और टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |

    allrounder के द्वारा
    August 6, 2013

    सादर प्रणाम मदन मोहन जी … रचना पर अपने अनमोल विचार देने के लिए आपका हार्दिक आभार !

div81 के द्वारा
August 1, 2013

बहुत खूब …. बढ़िया तंज से भरी रचना … बधाई सचिन जी

    allrounder के द्वारा
    August 6, 2013

    आपकी सराहना और प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार दिव्या जी आपका !


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