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Hanso Hansao Khoon Badhao

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शरारत

Posted On: 5 Jun, 2013 Others में

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दोस्तों कभी – कभी सोचता हूँ कि मानव का जीवन क्या है, जीवन एक ऐसी पहेली है जो सदियों से अबूझ ही रही है और इसकी समीक्षा तो बड़े – बड़े ज्ञानी-ध्यानी नहीं कर सके तो हम जैसे तुच्छ प्राणी कैसे कर सकते हैं, इसलिए मैं मानवीय जीवन को छोड़कर मानवीय व्यवहार की समीक्षा करने का प्रयास यहाँ पर कर रहा हूँ, मानव के अंतर मैं निहित आदतों की समीक्षा करने की कोशिश कर रहा हूँ, यधपि ये काम भी अँधेरे मैं सुई ढूँढने जैसा ही है फिर भी चूँकि लिखने की सुई मेरे अंदर घुस गई है इसलिए थोडा प्रयास तो कर ही सकते हैं, इस सुई को ढूँढने और अपने मन के विचारों को बाहर निकालने का तो इसी तारतम्य मैं मैं भी काफी दिनों के बाद तन्हाई मैं किसी माशूका से बिछड़े माशूक की भांति गहरी सोच मैं मानवीय स्वभाव के गहरे समुद्र मैं उतरता चला गया और इस समुद्र मंथन के बाद मैंने हर मानव के व्यवहार मैं अनेकों भिन्नताएं पाई, कोई गुस्सैल है कोई हँसेल है, कोई नरम है तो कोई गरम है, कोई उदार है तो कोई कठोर है ! इतनी सारी भिन्नताओं के मध्य मैंने एक चीज सभी इंसानों मैं कॉमन पाई और वो है शरारत … आप भी सोच रहे होंगे कि आखिर समुद्र मंथन मैं से मैंने निकाला भी तो क्या शरारत …. तो चौंकिये मत और मेरी बातों पर गौर कीजिये मनुष्य जब इस धरती पर जन्म लेता है तब रोते हुए आता है .. किन्तु जैसे जैसे वह बड़ा होता है उसकी शरारते आरंभ हो जाती है वह अपनी माँ के साथ खेलता हुए शरारत करता है कभी पिता के साथ शरारत करता है हाथ पैर चलाता है … और उसकी शरारतों का सिलसिला चल पड़ता है थोडा और बड़ा होता है अपने पड़ोस के बच्चों के साथ शरारत करता है .. घर का सामान तोड़ता है और माँ-बाप की झिडकी सुनता है किन्तु वह शरारत नहीं छोड़ता और खुश रहता है … कुछ समय बाद वह स्कूल जाता है क्लास मैं शरारत करता है अध्यापक की मार खाता है किन्तु अपनी शरारत नहीं छोड़ता और बहुत खुश रहता है, फिर बच्चा किशोर होता है यहाँ भी उसकी शरारत चरम पर होती है और जिंदगी मैं सबसे ज्यादा खुश भी इंसान शायद इस उम्र मैं ही रहता है, फिर धीरे धीरे इंसान बयस्कता को प्राप्त करता है, और पेशे और नौकरी मैं स्थापित होने के बाद विवाह सूत्र मैं बंध जाता है यहाँ भी पति – पत्नी की शरारतों के बीच उनका जीवन द्रुत गति से और खुशियों मैं गुजरता है … पर धीरे धीरे समय गुजरता है काम के बोझ से बढती जिम्मेदारियों के बोझ से रोज नए – नए लोगों से मिलने मिलाने से इंसान की ये शरारत कम होने लगती है और धीरे धीरे लुप्तप्राय हो जाती है … और जब इंसान के स्वाभाव मैं शरारत की जगह शराफत पूरी तरह से ले लेती है यहीं से इंसान की दिनचर्या और जीवन नीरस और औपचारिक सा होने लगता है ….. कई प्रकार के प्रयास करता है इंसान खुशियाँ पाने की किन्तु शराफत के आडम्बर का आवरण इतना भारी होता है कि इंसान उससे बाहर निकल ही नहीं पाता और जीवन मैं जो खुशियाँ उसे अबतक बिना कीमत चुकाए मिल जाती थीं अब वे उसे ऐशो-आराम पर लाखों खर्च करके भी नहीं मिलतीं क्यूंकि शायद उसकी शरारत कहीं दूर बहुत दूर चली गई उससे ………..

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तो दोस्तों मैं तो इस आत्ममंथन के बाद इसी निष्कर्ष पर पहुंचा हूँ की जीवन मैं शराफत बहुत जरुरी है किन्तु शरारत का दामन भी कभी नही छोडिये … हाँ शरारत करते वक्त ये अवश्य ध्यान मैं रखना चाहिए कि आपकी शरारत कहीं शराफत का दायरा तो पार नही कर रही, इससे किसी के मन को ठेस तो नहीं पहुँच रही या किसी को भौतिक या आत्मिक नुकसान तो नहीं हो रहा … और हाँ शरारत करते वक्त रिश्ते और स्थान का अवश्य ध्यान रखें वर्ना शरारत के चक्कर मैं आपकी शराफत खतरे मैं पड़ जायेगी …. उदाहरणार्थ यदि आप शादी शुदा हैं और किसी ऐसी पार्टी मैं हैं जहाँ आपकी पत्नी और बॉस की भी पत्नी है और आपका मन शरारत करने का कर रहा है तो अपनी बीबी से ही करें बॉस की बीबी से नहीं वरना दिक्कत हो सकती है ! अंत मैं यही कहना चाहूँगा कि पता नहीं आप मैं से कितने लोग मेरे आलेख से सहमत होंगे किन्तु एक बात तय है कि कभी न कभी किसी न किसी उम्र मैं आप मैं से भी हर किसी ने किसी न किसी के साथ शरारत जरुर कि होगी या आपके साथ शरारत हुई होगी …. और दिल पर हाथ रखकर कहिये क्या उस शरारत को याद करगे आपका दिल आज भी प्रफुल्लित नहीं होता ? और यदि होता है तो अपनी शरारत यहाँ शेयर कीजिये और वही खुशी फिर से हासिल कीजिये ….. !

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41 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

SOURABH NEEL के द्वारा
June 16, 2013

दिल तो बच्चा है जी शरारत तो हमारे अन्दर बसी है

    allrounder के द्वारा
    June 17, 2013

    बहुत बहुत आभार नील जी सच कहा आपने दिल तो बच्चा है और ये जब अक बच्चा रहे तब तक अच्छा

sinsera के द्वारा
June 15, 2013

भाई सचिन जी , नमस्कार, बड़ा ही उकसावक लेख लिखा आपने, मैं तो बिलकुल जोश में आ कर कुछ कबूलने ही वाली थी की अचानक दिमाग में घंटी बज गयी कि कहाँ मैं भी झांसे में आ रही हूँ …. वैसे मैं नहीं समझती कि अपनी शरारतों के बारे में मुझे कुछ बताने कि ज़रूरत है…..किसी से भी नाम ले कर पूछ लीजिये… ;-

    allrounder के द्वारा
    June 17, 2013

    सादर नमस्कार सरिता जी , आपकी शरारतों के बारे मैं किसी से पूछने की कोई जरुरत नहीं है हम सभी जानते हैं खैर आप उकसावे मैं नहीं आइन कोई बात नहीं किन्तु पोस्ट पर आने का हार्दिक आभार सरिता जी !

sudhajaiswal के द्वारा
June 14, 2013

आदरणीय सचिन जी, सादर अभिवादन, मुझे ऐसा लगता है की शरारत हमारे जीवन में नमक की तरह है ३६ प्रकार के व्यंजन जिस तरह बिना नमक के बेस्वाद है वैसे ही बिना शरारत के जीवन नीरस है | इतने अच्छे आलेख के लिए बधाई |

    allrounder के द्वारा
    June 15, 2013

    सादर प्रणाम सुधा जी, अपने बिलकुल सही व्याख्या की जीवन मैं सबरस की … आलेख आपको पसंद आया और उस पर अपने अपने अनमोल विचार दिए उसके लिए आपका हार्दिक आभार सुधा जी !

arunsoniuldan के द्वारा
June 13, 2013

बेशक , सबरंग ही जीवन है ………शरारत , शराफत जीवन के अनिवार्य पहलू हैं …….

    allrounder के द्वारा
    June 13, 2013

    नमस्कार अरुण सोनी जी सही कहा आपने सबरंग ही जीवन है …. ! अपने विचार देने के लिए हार्दिक आभार आपका !

aman kumar के द्वारा
June 12, 2013

विषय का चयन के लिए विशेष बधाई !

    allrounder के द्वारा
    June 12, 2013

    भाई अमन कुमार जी बहुत बहुत शुक्रिया विषय चयन की प्रशंशा के लिए यधपि आलेख आपको कैसा लगा अपने नहीं बताया, फिर भी आपका हार्दिक आभार अपने अनमोल विचार देने के लिए !

    aman kumar के द्वारा
    June 13, 2013

    आपका लेख हमें यादो मे ले गया जब हम भी शरारते करते थे ! अब तो मानो जिन्दगी हमसे शरारते करती है … सच मज़ा आ गया ………. आभार

    allrounder के द्वारा
    June 14, 2013

    आपका एक बार फिर से धन्यबाद अमन कुमार जी जो आपके बचपन की यादें ताजा हुई ! आभार !

rashmisri के द्वारा
June 12, 2013

सचिन जी , शरारत के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती ,दिल तो बच्चा होता है! जी,बस दूसरे को बुरा न लगे !

    allrounder के द्वारा
    June 12, 2013

    रश्मिजी बिलकुल दुरुस्त फरमाया आपने कुछ बंदिशें इंसान खुद ही अपने इर्द-गिर्द बाँध लेता है और उससे जीवन मैं थोड़ी नीरसता लाता है कभी कभी दिल को खुला छोड़ देना चाहिए जैसा आपने कहा बच्चे के तरह ….. आपका हार्दिक आभार विचार देने के लिए !

priti के द्वारा
June 11, 2013

आदरणीय सचिन देव जी ,क्या खूब लिखा है आपने ,पढ़ कर अपनी शरारतें याद आ गयीं .मैं आपकी बात से सहमत हूँ ,कभी-कभी शराफत का लबादा उतार कर थोड़ी शरारत का भी मज़ा लेना चाहिए ….जीवन में सरसता बनी रहती है .अच्छी पोस्ट ! हार्दिक बधाई स्वीकार करें …..

    allrounder के द्वारा
    June 12, 2013

    प्रीती जी ….. आपका हार्दिक आभार जो आपने हमारे विचारों को स्वीकृति प्रदान की और अपने अनमोल विचार आलेख पर रखे …. जीवन मैं सरसता बनाए रखने के लिए थोड़ी शरारत जरुरी है …. आपका हार्दिक धन्यवाद !

Manisha Singh Raghav के द्वारा
June 11, 2013

अरे बाप रे इतना हाई फाई नाम ”सचिन देव ”आप भी कमाल करते हैं अब सचिन के आगे देव लगा लो चाहे तुन्देलकर क्या फर्क पड़ता है भाई जो अपना नाम छुपाते हैं । कुछ भी कहिए हम तो आपको सचिन जी ही कहेंगे और आप भी आल राउंडर के नीचे सचिन लगा लीजिए आपके नाम की महत्ता बढ़ जाएगी । हा हा हा बुरा न मानिये मैंने बताया था न मैं बहुत शरारती हूँ । फ़िलहाल मेरे साथ ब्लॉग स्टार्ट करने में ऐसी कोई समस्या नहीं आई और न ही इसके बारे में ऐसा सोचा बस अपनी मंजिल पर अपनी आँख है देखते हैं कब तक मिलती है ? आपसे बात करके अच्छा लगा । नाम वाम में क्या रखा है युसूफ खान हो या दिलीप कुमार बस ऐसा कोई कम करो जिससे नाम प्रसिद्ध हो । है कि नहीं

    allrounder के द्वारा
    June 12, 2013

    :) मनीषा जी… बिलकुल आप हमें सचिन ही कहें … और आपसे बात करके हमें भी अच्छा लगा , और ये Allrounder नाम मैंने अपना नाम सचिन देव छिपाने के लिए नहीं रखा बस ऐसे ही इत्तेफाक से इस नाम से ब्लॉग बनाया लिखना मेरा लक्ष्य नही था किन्तु इस मंच से इतना प्यार और लेखन से इतना सुकून मिला की अब इस नाम से भावनात्मक जुड़ाव सा हो गया है ….. वैसे आपने सही कहा नाम नाम मै कुछ नहीं रखा सिर्फ काम अच्छा होना चाहिए ! आपकी शरारतें यूँ ही बरक़रार रहें और जिस मंजिल पाने का जिक्र आपने कमेंट मैं किया है वो भी आपको जल्दी मिले उसके लिए हार्दिक शुभकामनायें आपको !

Manisha Singh Raghav के द्वारा
June 11, 2013

आल राउंडर जी , आपका लेख पढकर मजा आ गया । मैं बचपन से ही बहुत शरारती थी पर आज हालांकि मेरे बच्चे बड़े हो गये हैं फिर भी मुझे उनके साथ मिलकर शरारत करना बहुत अच्छा लगता है बच्चों के साथ शरारत करते हुए देखकर मेरे पति देव भी कहते हैं कि अब थोडा बड़ी हो जाओ क्या बच्चों जैसी हरकत करती रहती हो पर हम न सुधरें हैं न सुधरेंगे , पर एक बात मैंने उनको बचपन से ही सिखाई कि आप शरारत जरुर करो पर आपको शरारत और बदतमीजी में फर्क पता होना चाहिए । बहुत ही अच्छा लेख । आपका असली नाम क्या है भाई आल राउंडर तो नहीं हो सकता , आप भी असली नाम न बताकर हमारे साथ शरारत ही कर रहे हैं । हा हा हा

    allrounder के द्वारा
    June 11, 2013

    नमस्कार मनीषा जी आपका हार्दिक आभार आलेख के सराहना हेतु , और अपनी शरारतों के बारे मैं बताने हेतु .. ! आपने सही कहा मेरा क्या किसी का भी नाम आल राउंडर नहीं हो सकता :) और मेरा भी नाम आल राउंडर नहीं है मेरा … मेरा नाम सचिन देव है … और मेरे सारे पुराने साथी मेरा नाम जानते हैं , किन्तु अक्सर पहली बार ब्लॉग पर आने वालों के साथ ये समस्या आती है आपके साथ भी आई उसके लिए खेद है :) आशा है आगे भी अपने विचार देती रहेंगी आप ब्लॉग पर धन्यबाद !

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
June 9, 2013

MANYAVAR ALL ROUNDER JEE, SAADAR !BAHUT HEE SAHEE MANTHAN KAR ACHCHHEE AUR ZARUREE CHINTAN KEE PRASTUTI DEE HAI | BADHAI !

    allrounder के द्वारा
    June 10, 2013

    बहुत – बहुत धन्यबाद आचार्य गुंजन जी आपका विचार देने के लिए

shalinikaushik के द्वारा
June 8, 2013

sahi kah rahe hain aap sachin ji .aur unhen yad kar sach me aanand aata hai .

    allrounder के द्वारा
    June 10, 2013

    बहुत – बहुत धन्यबाद शालिनी जी आपका विचार देने के लिए

allrounder के द्वारा
June 8, 2013

नमस्कार आदरणीय कुशवाहा जी… हमारी शरारत पर आपका शराफत भरा आशीर्वाद पाकर मन प्रफुल्लित हुआ ! इसे ऐसे ही बनाए रखिये !

jlsingh के द्वारा
June 8, 2013

मुझे तो आज भी अपने साथियों, सहकर्मियों के साथ हल्का फुल्का व्यंग्य, जिससे हास्य भी निकले, कसने में मजा आता है. अब किसका असर कब क्या हो जाता है, वह परिस्थिति और माहौल पर निर्भर करता है! आदरणीय सचिन जी, बीच बीच में इसी प्रकार दर्शन दे दिया करें!

    allrounder के द्वारा
    June 8, 2013

    सादर नमस्कार जे एल सिंह जी…. हार्दिक आभार अनमोल विचार देने के लिए …. और आपके विचार जानकार के आप अभी अभी साथियों और सहकर्मियों के साथ शरारती हैं काफी प्रसन्नता हुई ! आप जैसे साथियों का आग्रह सर माथे पर रखते हुए ही यहाँ का मोह नहीं छोड़ पा रहे और अक्सर साथियों के मध्य चले आते हैं और इसके लिए लेख से अच्छा और क्या माध्यम हो सकता है !

    allrounder के द्वारा
    June 8, 2013

    और श्रीमान जी जैसा की आपने कहा की आप अब भी शरारती हैं… और मैंने लेख के अंत मैं अनुरोध किया था … यदि कोई शरारती लेखक यहाँ हो .. तो यहाँ शेयर कर सकता है लेकिन शराफत से :) आप भी चाहे तो कर सकते हैं

yogi sarswat के द्वारा
June 7, 2013

शराफत बहुत जरुरी है किन्तु शरारत का दामन भी कभी नही छोडिये … हाँ शरारत करते वक्त ये अवश्य ध्यान मैं रखना चाहिए कि आपकी शरारत कहीं शराफत का दायरा तो पार नही कर रही, इससे किसी के मन को ठेस तो नहीं पहुँच रही या किसी को भौतिक या आत्मिक नुकसान तो नहीं हो रहा … और हाँ शरारत करते वक्त रिश्ते और स्थान का अवश्य ध्यान रखें वर्ना शरारत के चक्कर मैं आपकी शराफत खतरे मैं पड़ जायेगी …. उदाहरणार्थ यदि आप शादी शुदा हैं और किसी ऐसी पार्टी मैं हैं जहाँ आपकी पत्नी और बॉस की भी पत्नी है और आपका मन शरारत करने का कर रहा है तो अपनी बीबी से ही करें बॉस की बीबी से नहीं वरना दिक्कत हो सकती है ! अंत मैं यही कहना चाहूँगा कि पता नहीं आप मैं से कितने लोग मेरे आलेख से सहमत होंगे किन्तु एक बात तय है कि कभी न कभी किसी न किसी उम्र मैं आप मैं से भी हर किसी ने किसी न किसी के साथ शरारत जरुर कि होगी या आपके साथ शरारत हुई होगी …. और दिल पर हाथ रखकर कहिये क्या उस शरारत को याद करगे आपका दिल आज भी प्रफुल्लित नहीं होता ? और यदि होता है तो अपनी शरारत यहाँ शेयर कीजिये और वही खुशी फिर से हासिल कीजिये ….. ! ये शरारत बहुत अच्छी लगी आपके मुंह से , ओह आपके दिमाग से और आपकी लेखनी से ! आपके शरारत से भरे शब्द अच्छे लगे सचिन जी

    allrounder के द्वारा
    June 8, 2013

    बहुत बहुत आभार भाई योगी जी …. :) प्रोत्साहन के लिए !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 7, 2013

९९ शरारत १०० वा शराफत स्वागत व बधाई सस्नेह / सादर

    allrounder के द्वारा
    June 8, 2013

    क्षमा प्रार्थी हूँ कुशवाहा जी आपका जवाव ऊपर चिपक गया :) इसलिए दोबारा दे रहा हूँ ! हमारी शरारत पर आपका शराफत भरा आशीर्वाद पाकर मन प्रफुल्लित हुआ ! इसे ऐसे ही बनाए रखिये ! और हाँ ९९ और १०० का तो ये है की अक्सर कई खिलाड़ी ९९ पर भी आउट हो जाते हैं :) आपकी शुभेक्षाओं के लिए हार्दिक आभार !

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 12, 2013

    फिक्सिंग के जमाने में भी ? वैसे अगर बात मेरे आशीर्वाद की है तो अनगिनत शतक लगाइए बधाई फेवीकोल से फेविकोल से ..

    allrounder के द्वारा
    June 12, 2013

    आपका फिर से हार्दिक आभार शुभेक्षाओं के लिए ……..

alkargupta1 के द्वारा
June 6, 2013

बहुत दिनों बाद मंच पर दिखाई दिए अपने `शरारत ‘ आलेख के साथ पढ़कर अच्छा लगा सचिन जी

    allrounder के द्वारा
    June 8, 2013

    आदरणीया अलका जी… आपकी शुभेक्षाओं के लिए और विचार देने के लिए हार्दिक आभार !

Rachna Varma के द्वारा
June 6, 2013

बहत अच्छा लेख सचिन जी |

    allrounder के द्वारा
    June 8, 2013

    हौसला अफजाई के लिए हार्दिक शुक्रिया रचना जी …

roshni के द्वारा
June 5, 2013

नमस्कार सचिन जी काफी समय बाद आप ने कुछ पोस्ट किया … हमेशा की तरह अच्छा लगा आपका लेख पढ़कर .. शरारत सिर्फ बचपन तक ही सिमित रहती है .. तब हर शरारत माफ़ होती है .. ऐसे ही लिखते रहे आभार

    allrounder के द्वारा
    June 8, 2013

    नमस्कार रौशनी जी… आपका हार्दिक आभार एक बार फिर से लिखने पर हौसला अफजाई के लिए …. ! आपके मत से मै आधा सहमत हूँ की शरारतें बचपन तक ही सीमित रहती हैं.. शरारतें हर उम्र मैं इंसान को ख़ुशी देतीं हैं…. हाँ ये सही की माफ़ सिर्फ बच्चों की ही शरारतें होती हैं…… ! एक बार फिर से आपका हार्दिक आभार रौशनी जी !


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