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Hanso Hansao Khoon Badhao

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दीवानगी

Posted On: 21 Feb, 2013 Others में

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जबसे उसकी चाहतों के खजाने मिले है

लवों को  मुस्कुराने के बहाने  मिले है

diwangiइश्क के उजालों से हुई रात रौशन

शमा  से जब – जब  परवाने मिले हैं

बा-खुदा तबसे छोड़ दी आवारगी हमने

दिल मै उसके जब से ठिकाने मिले हैं

मैखाने का रुख न किया भूलकर भी

तेरे  होंठों के जबसे पैमाने मिले हैं

दिल मिलन के गुनगुनाता है नगमे

तेरी यादों के मौसम सुहाने मिले हैं

तेरी फुरकत मैं हम क्यूँ करें आँख नम

जब साथ तेरे हंसी के जमाने मिले हैं

मेरी दीवानगी मैं तू भी हो जा कभी शामिल

मिल कभी ऐसे, जैसे कि दो दिल दीवाने मिले हैं

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40 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

arunsoniuldan के द्वारा
March 1, 2013

मेरी दीवानगी मैं तू भी हो जा कभी शामिल ………………..  सुन्दर रचना

    allrounder के द्वारा
    March 11, 2013

    आपका हार्दिक आभार …… !

Shweta के द्वारा
March 1, 2013

बेहद उम्दा rachna …….

    allrounder के द्वारा
    March 1, 2013

    उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार आपका श्वेता जी !

Bhagwan Babu के द्वारा
February 27, 2013

सुन्दर और आसान लफ्जो मे आपने हसीन से सपने पिरोये है…. वाह… कमाल है… http://bhagwanbabu.jagranjunction.com/2013/02/22/%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A1%E0%A4%BC-%E2%80%93-jagran-junction-forum/

    allrounder के द्वारा
    February 28, 2013

    आपका हार्दिक आभार !

allrounder के द्वारा
February 26, 2013

आपका बहुत – बहुत धन्यबाद प्रवीण जी ….. ! बल्कि आपको डबल धन्यबाद जो आपने पता लगा लिया हमारी व्यस्तता का :) :)

Malik Parveen के द्वारा
February 26, 2013

क्या बात ! क्या बात ! अभी पता चला आप कहाँ बिजी थे इतने दिन से :) … WELCOME BACK सचिन जी :)

allrounder के द्वारा
February 25, 2013

आपका बहुत बहुत आभार योगी जी ……. आप जैसे कद्रदान ही हैं जो बार – बार हमें इस हसीं महफ़िल की और खींच लाती है … अपने प्यार और स्नेह से सदा ऐसे ही इसे गुलजार रखें ! हार्दिक धन्यबाद आपका !

yogi sarswat के द्वारा
February 25, 2013

तेरी यादों के मौसम सुहाने मिले हैं तेरी फुरकत मैं हम क्यूँ करें आँख नम जब साथ तेरे हंसी के जमाने मिले हैं मेरी दीवानगी मैं तू भी हो जा कभी शामिल मिल कभी ऐसे, जैसे कि दो दिल दीवाने मिले हैं ये महफ़िल आपकी सचिन जी , जब जब सज़ती है , माहौल रंगीन हो जाता है ! वाह !

    allrounder के द्वारा
    February 25, 2013

    भाई योगी जी आपकी प्रतिक्रिया का जवाव त्रुटिवश ऊपर दे दिया है कृपया वहां देखें :)

Dhavlima Bhishmbala के द्वारा
February 24, 2013

पढ़ कर इस गज़ल को आज गुनगुनाना आ गया मनो मेरे खामोश जुबां को फिर से तराने मिले है |

    allrounder के द्वारा
    February 25, 2013

    आपका बहुत बहुत आभार आपकी गजलनुमा हौसलाफजाई के लिए भीष्म्बाला जी … ! वैसे माफ़ी चाहूँगा आपके नाम का सही उच्चारण मैंने किया है या नहीं पता नहीं आपके नाम मैं थोडा सा कंफयूसन है :) किन्तु आपके उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 24, 2013

अजी साहब हम तो आपकी महफ़िल के वाशिंदे हैं आ भी जाए पतझड़ न उड़ें वो परिंदे हैं बधाई,

    shashi bhushan के द्वारा
    February 24, 2013

    ये फेविकोल का जोड़ है, आसानी से नहीं टूटेगा !

    allrounder के द्वारा
    February 25, 2013

    नमस्कार प्रदीप जी, आपकी शायराना प्रतिक्रिया पाकर मन अति प्रफुल्लित हुआ, आप ऐसे ही इस महफ़िल की रौनक और हमारा हौसला बढाते रहें यही आकांक्षा है आपसे आपका हार्दिक आभार !

    allrounder के द्वारा
    February 25, 2013

    :) सही कहा शशिभूषण जी, ये न सिर्फ फेविकोल का जोड़ है बल्कि अम्बुजा सीमेंट से बंदी दीवार है भला टूटेगी कैसे ? :) आपका हार्दिक आभार !

    jlsingh के द्वारा
    March 1, 2013

    अम्बुजा सीमेंट से बनी दीवारें, जिनमे ब्लोगरों की ईंटें लगी हो … मैं तो खो गया था कहीं आखिर दीवार में प्लास्टर के बाद चूना भी तो कराना होता है! ये दोस्ती … हम नहीं तोड़ेगे ! आदरणीय सचिन जी, यह ब्लॉग कब आँखों के सामने से निकल गया ..पता ही न चला! देर के लिए माफी चाहूँगा!

    allrounder के द्वारा
    March 1, 2013

    नमस्कार जे एल सिंह जी …. कृपया माफ़ी शब्द का प्रयोग कर इस मजबूत जोड़ को कमजोर न करें ! देर सवेर तो लगी रहती है प्रमुख बात ये है की जोड़ टूटना नहीं चाहिए :) आपका हार्दिक आभार !

roshni के द्वारा
February 23, 2013

नमस्कार सचिन जी रचना की तारीफ ke लिए शब्द नहीं है .. बहुत ही सुंदर रचना… ऐसे ही लिखते रहिये ..आभार

    allrounder के द्वारा
    February 24, 2013

    नमस्कार रौशनी जी, आपको भले ही शब्द न मिल सके हों प्रशंशा के लिए … किन्तु हमारे पास जरुर आपका आभार व्यक्त करने के लिए कुछ शब्द हैं ….. आपका बहुत बहुत आभार रौशनी जी :) :)

D33P के द्वारा
February 23, 2013

बा-खुदा तबसे छोड़ दी आवारगी हमने दिल मै उसके जब से ठिकाने मिले हैं….. सचिन जी बहुत ही खूबसूरत प्रस्तुति

    allrounder के द्वारा
    February 24, 2013

    आपका हार्दिक आभार दीप्ति जी … उत्साहवर्धन के लिए !

akraktale के द्वारा
February 23, 2013

वाह सचिन जी वाह बहुत ही सुन्दर रचना. बार बार पढ़कर भी दिल नहीं भर रहा.बहुत खूब. दिली बधाई स्वीकारें.

    allrounder के द्वारा
    February 24, 2013

    अशोक जी आपका हार्दिक आभार प्रशंशा के लिए …. रचना आपको पसंद आई और बार – बार पढ़कर भी जी नहीं भर रहा तो उसे बारम्बार पढ़िए और एक बार मेरी और से भी उसके लिए अग्रिम आभार :)

shashibhushan1959 के द्वारा
February 22, 2013

आदरणीय सचिन जी, सादर ! क्या बात है ! मन प्रसन्न हो गया ! बहुत दिनों बाद ही सही, आपके दर्शन तो हुए, वह भी एक बेहतरीन रचना के साथ ! बहुत सुन्दर !

    allrounder के द्वारा
    February 24, 2013

    नमस्कार माननीय शशिभूषण जी … आपकी अप्नात्वपूर्ण उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार आपका !

आर.एन. शाही के द्वारा
February 22, 2013

भई वाह ! लगा जैसे गालों पर गुलाल मलते हुए ‘उनसे’ मिल रहे हैं, जिनकी आपको अर्से से तलाश थी … ‘दिल मिलन के गुनगुनाता है नगमे तेरी यादों के मौसम सुहाने मिले हैं तेरी फुरकत मैं हम क्यूँ करें आँख नम जब साथ तेरे हंसी के जमाने मिले हैं’ ।… खुश कर दिया भई, खुश कित्ता !!

    allrounder के द्वारा
    February 24, 2013

    नमस्कार शाही जी, आपकी गुलाली प्रतिक्रिया ने हमारा दिल भी प्रफुल्लित कर दिया ….! सच कहा है किसी ने अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता :) और आपने जो कल्पना की है गालों पर गुलाल मलते हुए लिखने की लगभग उसी मूड मैं लिखी गई थी ये रचना ! तुस्सी भी खुश कित्ता मनोभावों को पहचान कर उत्साहवर्धन के करके !

    allrounder के द्वारा
    February 25, 2013

    :) शाही जी लगता है होली का असर अभी से शुरू हो गया आप पर इसलिए प्रतिक्रिया मई भी गुलाल फेंक रहें हैं ! अभी वक्त है होली मैं :)

alkargupta1 के द्वारा
February 22, 2013

सचिन जी , कहाँ थे आप अभी तक …. लम्बे अन्तराल के बाद आपकी सुन्दर सी रचना पढ़ी मंच पर हार्दिक स्वागत

    allrounder के द्वारा
    February 24, 2013

    सादर नमस्कार आदरणीया अलका जी, आपकी उत्साहवर्धक प्रतिर्किया के लिया हार्दिक आभार आपका !

nishamittal के द्वारा
February 22, 2013

वाह सचिन जी बहुत दिन बाद मन पर उपस्थिति सुन्दर प्रस्तुति के साथ

    allrounder के द्वारा
    February 24, 2013

    आपका हार्दिक आभार निशा जी … उत्साहवर्धन के लिए !

seemakanwal के द्वारा
February 21, 2013

welcome ,back और आते ही सिक्सर मार दिया .

    allrounder के द्वारा
    February 24, 2013

    हार्दिक आभार सीमा जी, हौसला अफजाई के लिए ….. और रचना पसंद करने के लिए !

Rachna Varma के द्वारा
February 21, 2013

आप तो शायरों के शायर है खुबसूरत गजल !!!

    allrounder के द्वारा
    February 24, 2013

    आपकी खुबसूरत प्रतिक्रिया के लिए खुबसूरत आभार रचना जी …… अपने शायरों के शायर कहने के लिए आपको शायराना आभार :) :)

divya (div 81) के द्वारा
February 21, 2013

मंच में सभी धुरन्दर वापसी कर रहे है    ये अच्छे संकेत है मंच के लिए    :) सचिन जी आप का स्वागत है मंच में एक बार फिर से बहुत ही खूबसूरत गजल कही दाद काबुल कीजिये

    allrounder के द्वारा
    February 24, 2013

    नमस्कार दिव्या जी, आपकी प्रशंशा और उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार ! और हाँ जैसा आपने लिखा मंच पर कई धुरधर वापसी कर रहे हैं उनमे हमें भी शामिल करने के लिए आपका अतिरिक्त धुरंधर आभार :) :)


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