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Hanso Hansao Khoon Badhao

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यादों के झरोखे

Posted On: 20 Sep, 2012 Others में

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YDM

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न कोई फूल सेहरा मैं, न है मौसम बहारों का

चमन मैं हर फूल जैसे हो पतझड़ की मारों सा

न जाने मिल रही है, फिर भी खुशबु मेरे दिल को

तेरी यादों की खुशबु से मेरे गुलशन महकते हैं

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तेरे बिन जिंदगी जैसे एक तपती दोपहरी है

जला के खाक कर दे जो तपिश इतनी ये गहरी है

बिना बारिश के ही मैं अक्सर भीग जाता हूँ,

तेरी यादों की बारिश के जब सावन बरसते हैं

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मिलन की चांदनी दो पल की, फिर गहरा अँधेरा है

विरह की रात है लंबी, नहीं जिसका सवेरा है

अँधेरे रास्तों से भी मिल रही है रौशनी मुझको

तेरी यादों के कुछ दीपक मेरी राहों मैं जलते हैं

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कभी परवाज जो तेरी, वही परवाज मेरी थी

पहुँचती थी दिलों तक जो वो हर आवाज तेरी थी

सितमगर वक्त ने कैसा, किया सितम जिंदगी मैं

न वो परवाज मेरी है, न वो आवाज तेरी थी

न जाने फिर मेरे दिल को सदा कैसी सुनाई दी

तेरी यादों के कुछ पंछी, मेरी यादों मैं चहकते हैं

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28 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

annurag sharma(Administrator) के द्वारा
October 4, 2012

नमस्कार जी बहुत ही अच्छी रचना के लिये बधाई ,,मिलन की चांदनी दो पल की, फिर गहरा अँधेरा है विरह की रात है लंबी, नहीं जिसका सवेरा है अँधेरे रास्तों से भी मिल रही है रौशनी मुझको तेरी यादों के कुछ दीपक मेरी राहों मैं जलते हैं

    allrounder के द्वारा
    February 25, 2013

    आपका हार्दिक आभार सर !

roshni के द्वारा
September 26, 2012

नमस्कार सचिन जी , न वो परवाज मेरी है, न वो आवाज तेरी थी न जाने फिर मेरे दिल को सदा कैसी सुनाई दी, अति सुंदर रचना इतना सुंदर तो शायद मै भी न लिख पाती .. बधाई हो विरह से भरी इस रचना के लिए आभार

    allrounder के द्वारा
    September 27, 2012

    नमस्कार रौशनी जी, रचना आपको पसंद आई, और आपने उस पर अपनी इतनी अच्छी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया दी इससे रचना लिखना जैसे सार्थक हुआ ! आपका ह्रदय से आभार रौशनी जी !

rekhafbd के द्वारा
September 25, 2012

सचिन जी मिलन की चांदनी दो पल की, फिर गहरा अँधेरा है विरह की रात है लंबी, नहीं जिसका सवेरा है अँधेरे रास्तों से भी मिल रही है रौशनी मुझको तेरी यादों के कुछ दीपक मेरी राहों मैं जलते हैं,अति सुंदर अभिव्यक्ति ,बधाई

    allrounder के द्वारा
    September 27, 2012

    आदरणीया रेखा जी, आपका हार्दिक आभार उत्साहवर्धन के लिए !

chaatak के द्वारा
September 24, 2012

दिल को छू लेने वाली इस खूबसूरत रचना पर हार्दिक बधाई!

    allrounder के द्वारा
    September 27, 2012

    प्रिय अनुज चातक रचना ने आपके दिल को छुआ, जानकर हार्दिक प्रसन्नता हुई ! आपका हार्दिक धन्यवाद !

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
September 24, 2012

सचिन भाई क्या बात है सावन तो गया लेकिन ये मेंहदी का रंग और चढ़ता गया …उनकी यादों के पंछी यों ही मधुर मधुर चहकते रहें और बिन बारिस भी मन यूं ही शीतल होता रहे ….खूबसूरत … होता है ऐसा अक्सर … भ्रमर ५

    allrounder के द्वारा
    September 27, 2012

    धन्यबाद भाई भ्रमर जी सराहना और शुभकामनाओ के लिए !

ashishgonda के द्वारा
September 24, 2012

आदरणीय! सादर नमस्कार, “तेरे बिन जिंदगी जैसे एक तपती दोपहरी है जला के खाक कर दे जो तपिश इतनी ये गहरी है बिना बारिश के ही मैं अक्सर भीग जाता हूँ, तेरी यादों की बारिश के जब सावन बरसते हैं” दिल की भावनाओं का सीधा श्ब्द्चित्रण पहली बार देखा. इतनी अच्छी रचना से परिचित कराने के लिए आभार………

    allrounder के द्वारा
    September 27, 2012

    आपका भी हार्दिक आभार प्रतिक्रिया देने और उत्साहवर्धन के लिए आशीष जी !

Anil Kumar "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
September 24, 2012

allrounder जी, यादों की सुन्दर अभिव्यक्ति है आपकी यह रचना सुन्दर लेखन http://panditsameerkhan.jagranjunction.com/2012/09/19/girlsvsboys/

    allrounder के द्वारा
    September 27, 2012

    हार्दिक आभार अनिल जी ……..

yogi sarswat के द्वारा
September 24, 2012

मिलन की चांदनी दो पल की, फिर गहरा अँधेरा है विरह की रात है लंबी, नहीं जिसका सवेरा है अँधेरे रास्तों से भी मिल रही है रौशनी मुझको तेरी यादों के कुछ दीपक मेरी राहों मैं जलते हैं बहुत खूब सचिन जी ! बहुत सुन्दर भाव और खूबसूरत अल्फाज़

    allrounder के द्वारा
    September 27, 2012

    आपका हार्दिक धन्यवाद भाई योगी जी, प्रशंशा के लिए !

annurag sharma(Administrator) के द्वारा
September 24, 2012

श्रीमान जी ,बहुत ही अच्छी प्रस्तुति आभार

    allrounder के द्वारा
    September 27, 2012

    आपका हार्दिक धन्यवाद अनुराग जी !

shashibhushan1959 के द्वारा
September 22, 2012

मान्यवर सचिन जी, सादर ! बहुत सुन्दर रचना ! दिल से लिखी हुई, अंतर्मन के भावों को उकेरती सुन्दर कविता ! हार्दिक बधाई !

    allrounder के द्वारा
    September 27, 2012

    आपका हार्दिक आभार शशिभूषण जी …….. सराहना के लिए !

manoranjanthakur के द्वारा
September 22, 2012

बहुत दिन बाद आपका सुंदर चेहरा देख रहा हु …..वो भी सुंदर रचना , कविता के साथ बहुत बधाई

    allrounder के द्वारा
    September 27, 2012

    चेहरा और रचना आपको सुंदर लगी उसके लिए सुंदर धन्यवाद आपको मनोरंजन जी ………. :)

akraktale के द्वारा
September 21, 2012

वाह! सचिन जी बहुत सुन्दर रचना. हार्दिक बधाई स्वीकारें.

    allrounder के द्वारा
    September 27, 2012

    आपका हार्दिक आभार अशोक जी ……….. !

vikramjitsingh के द्वारा
September 21, 2012

ग़जब की विरह-वेदना है…..पंक्तियों में……सचिन जी….. कुछ शब्द आपकी इस रचना के नाम….. . ”जब ठंडी हवाएं चलती हैं…..तुम याद बहुत ही आते हो….. भीगी पलकों के साए में………..आंसू बनकर छा जाते हो….”

    allrounder के द्वारा
    September 27, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद विक्रमजीत सिंह जी आपका !

jlsingh के द्वारा
September 21, 2012

सचिन जी, बहुत ही बेहतरीन रचना के साथ उपस्थित हुए है! बस यही कह सकता हूँ- लाजवाब,परवाज !

    allrounder के द्वारा
    September 27, 2012

    बहुत – बहुत धन्यबाद जे एल सिंह जी …. उत्साहवर्धन के लिए !


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