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Hanso Hansao Khoon Badhao

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नैतिक जिम्मेदारी / अधिकार

Posted On: 13 Jul, 2012 Others में

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दोस्तों जैसा कि हम सब जानते हैं, हमारा देश भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतान्त्रिक देश है, और हमारे देश के आम नागरिकों को पूर्ण स्वतंत्रता है, अपनी तरह से जीने की ! दोस्तों यूँ तो हमारे संविधान ने हमें कई प्रकार के मौलिक अधिकार प्रदान किये हैं, जो कि एक आम नागरिक के हितों की रक्षा के लिए लिखित रूप से बनाये गए हैं, किन्तु क्या कभी आपने सोचा है हमारे लिखित संवैधानिक मौलिक अधिकारों के अलावा भी हमारे देश के, समाज के, घर परिवार के लोगों को कुछ ऐसे मौलिक अधिकार मिले हुए हैं, जो कि लिखित नहीं है, फिर भी पूरी तरह से हमारे जीवन मैं निहित हैं ! किन्तु संवैधानिक मौलिक अधिकारों और इन अधिकारों मैं थोडा सा फर्क हैं, ये अधिकार संविधान से नहीं अपितु नैतिक जिम्मेदारी से व्युत्पन्न होते हैं ! कंफयूसन … कंफयूसन …. अभी तक आपको शायद ही मेरी कोई बात समझ मैं आई हो, कि मैं किन नैतिक जिम्मेदारियों और मौलिक अधिकारों की बात कर रहा हूँ, तो

यहाँ पर मैं अपने कवि होने का थोडा सा फायदा उठाता हूँ

और इनके बारे मैं आपको उदाहरण सहित समझाता हूँ

————————————————————————————————————————————–

उदाहरण नंबर एक

***********************************************

JA4कि एक आम आदमी ने साल भर पसीना बहाया

जरूरतें फिर भी पूरी न हुई, इक्षाओं को बलि चढ़ाया

बड़ी मेहनत से जो थोडा बहुत पैसा बचाया

उस पर भी सरकार को टैक्स चुकाया

दूसरी तरफ एक मंत्री जी ने देश के पैसे को

मुफ्त का चन्दन समझ खूब लगाया

खुद भी मलाई छानी बच्चों को भी विदेश घुमाया

जनता की गाढ़ी कमाई को कुछ ऐसे ठिकाने लगाया

झोपड़ी से रातो रात शीशमहल बनवाया

इससे देश की जनता पर पड़ती दोहरी मार है

टैक्स चुकाना आम जनता की नैतिक जिम्मेदारी

और माल पर ताल ठोकना नेता का मौलिक अधिकार है

उदाहरण नंबर दो

***********************************************

JA2 एक पिता ने अपनी बेटी को खूब पढ़ाया लिखाया

माँ ने भी उसको गृहस्थी का हर संस्कार सिखाया

करने निकला ब्याह तो दहेज दानव सामने आया

लड़के के बाप ने उसे अपना सुरसा सा मुंह दिखाया

लड़की के पिता ने फिर भी हिम्मत दिखाई

जीवन भर की पूंजी शादी पर लुटाई

फिर भी उस दहेज लोभी ने उसको फटकार लगाईं

जरा सी कमी पर क्यूँ मिलती लड़की के पिता को दुत्कार है

क्यूंकि बेटी को विदा करना उसकी नैतिक जिम्मेदारी

और दहेज समेटना बेटे के बाप का मौलिक अधिकार है

हे प्रभु ये कैसा संसार है ये कैसा संसार है

***********************************************

उदाहरण नंबर तीन

**********************************************

JA3कि एक पति दिन भर का थका मांदा घर आया

पत्नी ने ठंडे पानी का गिलास उसकी ओर बढ़ाया

पति बेचारा अभी आधा गिलास ही गटक पाया

कि पत्नी ने उसे मुस्कुराते हुए झोला थमाया

बोली प्रिय आपको अभी बाजार जाना है

घर मैं सब्जी हुई खत्म लेकर आना

और सुनो 3G की तरह जरह FAST आना

और भिंडियां जरा नरम और कोमल सी लाना

पति मन ही मन कुछ बडबडाया

और जे जे की साईट सा धीरे से कदम बढ़ाया

आधे घंटे बाद चुन-चुन कर भिंडियां लाया

भिंडियां देखते ही पत्नी ने अपनी त्योरियां चढ़ाईं

बोली अरे ये कैसी भिंडियां उठा कर ले आये

लेडीज फिंगर की जगह जेंट्स अंगूठे सी ले आये

बैंगन से पति की भिन्डी सी पत्नी लगाती फटकार है

क्यूंकि अच्छी सब्जी लाना पति की नैतिक जिम्मेदारी

और फटकार लगाना पत्नी का मौलिक अधिकार है

**********************************************

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74 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
July 20, 2012

आदरणीय सचिन जी, सादर कलुषित समाज के गाल के मुहं पर करारा तमाचा बधाई. मेरे स्वास्थ्य के प्रति चिंता व्यक्त करने हेतु आभार

    allrounder के द्वारा
    July 21, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी, आपका प्रोत्साहन पाकर असीम सुखानुभूति हुई, और उससे भी ज्यादा ये जानकार ख़ुशी हुई की आप स्वस्थता की ओर बढ़ रहें हम सबकी ह्रदय से यही कामना है की आप जल्द से जल्द पूर्ण स्वस्थ हों और अपना आशीर्वाद बनाए रखें !

Punita Jain के द्वारा
July 17, 2012

आदरणीय सचिन जी, बहुत ही सुन्दर और मजेदार हास्यव्यंग आपने लिखा है |एक और खूब हँसाया, तो दूसरी ओर भ्रष्टाचार ओर दहेज व्यवस्था पर जमकर व्यंग भी कर दिया और साथ ही पतियों का पूरा ध्यान भी रखा |—-बधाई

    allrounder के द्वारा
    July 17, 2012

    सादर प्रणाम पुनीता जी, आपको हास्य पसंद आया, आपने अपने विचार दिए इसके लिए हार्दिक आभार आपका !

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
July 16, 2012

सार्थक … जरा सी कमी पर क्यूँ मिलती लड़की के पिता को दुत्कार है क्यूंकि बेटी को विदा करना उसकी नैतिक जिम्मेदारी और दहेज समेटना बेटे के बाप का मौलिक अधिकार है प्रिय सचिन भाई जी ..बहुत करारा व्यंग्य ..पहले तो आपने पहेलियाँ बुझाई ..फिर धीरे धीरे सुलगाया और जब प्रकाश दमका तब सब बात समझ में आई लेकिन क्या सोया दिमाग भी जागेगा उनकी तो लुंगी और चादर भी जल जाए तो बिना लतियाए नहीं उठने वाले ….करारा तमाचा उनके गालों पर जमाती रचना … आभार भ्रमर ५

    allrounder के द्वारा
    July 16, 2012

    सही कहा भ्रमर जी, हम लोग तो सिर्फ व्यंग ही कर सकते हमारे लिखे का ऐसे लोगों पर कोई फर्क नहीं पड़ता किन्तु अलख जगाना अपना काम है ! आपके उत्तम विचारों के लिए हार्दिक आभार आपका !

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
July 16, 2012

जरा सी कमी पर क्यूँ मिलती लड़की के पिता को दुत्कार है क्यूंकि बेटी को विदा करना उसकी नैतिक जिम्मेदारी और दहेज समेटना बेटे के बाप का मौलिक अधिकार है प्रिय सचिन भाई जी ..बहुत करारा व्यंग्य ..पहले तो आपने पहेलियाँ बुझाई ..फिर धीरे धीरे सुलगाया और जब प्रकाश दमका तब सब बात समझ में आई लेकिन क्या सोया दिमाग भी जागेगा उनकी तो लुंगी और चादर भी जल जाए तो बिना लतियाए नहीं उठने वाले ….करारा तमाचा उनके गालों पर जमाती रचना … आभार भ्रमर ५

    allrounder के द्वारा
    July 16, 2012

    नमस्कार भ्रमर जी, आपका कमेन्ट स्पेम मैं पड़ा हुआ था एप्रूव किया तो दो निकल पड़े, स्कीम है लगता आपकी तरफ से एक के साथ एक फ्री :) :) :) धन्यवाद आपका !

sadhna srivastava के द्वारा
July 16, 2012

हा हा हा हा हा ….. एकदम मस्त है…..!! हमने आपका ये article परसों भी पढ़ा था लेकिन लोगिन नहीं था तो कमेन्ट नहीं कर पाए…. और लोगिन करने में आलस आ रहा था….. :) :)

    allrounder के द्वारा
    July 16, 2012

    साधना जी, आर्टिकल आपको मस्त लगा, इसके लिए आपका हार्दिक धन्यवाद ! आर्टिकल आपने परसों पढ़ा कमेन्ट आपने आज किया इसलिए लिए पोस्ट पर आपकी चिर परिचित हंसी दिखाई नहीं दे रही थी :) :) :) इसके लिए आपका हार्दिक धन्यवाद साधना जी !

    sadhna srivastava के द्वारा
    July 16, 2012

    हंसी की क्या बात करें सचिन जी रूह कांपी हुई है गुवाहाटी केस को सुनकर कर और यहाँ पर बुद्धिमान लोगों के पोस्ट और प्रतिक्रियाएं पढ़ कर तो और सदमे में हैं हम…..

    allrounder के द्वारा
    July 16, 2012

    साधना जी, गोवाहाटी मैं जो हुआ वो सचमुच शर्मनाक हादसा है, और अच्छी बात ये है कि आरोपी चिन्हित कर लिए गए हैं और कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं, बाकी भी जल्द ही गिरफ्त मैं होंगे ! और इन पर सख्त से शख्त कार्यवाही होगी, जिस प्रकार इस काण्ड को लिया जा रहा है ! बाकी रूह कांपने जैसी बात नहीं होनी चाहिए ऐसी मानसिकता के लोग सदियों से रहे हैं, अभी हैं और आगे भी रहेंगे ! फिर भी कारवां चलता रहेगा ….. बशर्ते हादसा बेहद शर्मनाक है !

Alka Gupta के द्वारा
July 15, 2012

बहुत ही सुन्दर सचिन जी ……नैतिक ज़िम्मेदारी और ये मौलिक अधिकार…… बढ़िया रचना के लिए बधाई

    allrounder के द्वारा
    July 16, 2012

    सादर प्रणाम अलका जी, रचना आपको पसंद आई इसके लिए आपका हार्दिक धन्यवाद !

akraktale के द्वारा
July 15, 2012

सचिन जी नमस्कार, नेता, पिता और पत्नी तीनो ही धारदार हैं और आपकी रचनाएं बहुत ही मजेदार हैं. बधाई.

    allrounder के द्वारा
    July 15, 2012

    सादर नमस्कार अशोक जी, धारदार रचना पर आपकी मजेदार प्रतिक्रिया पर आपका ह्रदय से आभार !

jagojagobharat के द्वारा
July 15, 2012

क्यूंकि अच्छी सब्जी लाना पति की नैतिक जिम्मेदारी और फटकार लगाना पत्नी का मौलिक अधिकार है बहुत सुन्दर रचना

    allrounder के द्वारा
    July 15, 2012

    आपका बहुत – बहुत आभार भाई जागोभारत जी…. !

Dr. Aditi Kailash के द्वारा
July 15, 2012

सचिन जी, बधाई हो, बहुत ही अच्छी बॉलिंग, बैटिंग और फील्डिंग की आपने……..पढ़कर मजा आ गया……….. “क्यूंकि अच्छी सब्जी लाना पति की नैतिक जिम्मेदारी और फटकार लगाना पत्नी का मौलिक अधिकार है” जीवन की सच्चाई बता दी आपने इन दो पंक्तियों में……..

    allrounder के द्वारा
    July 15, 2012

    वाओ… अदिति ! अदिति …. अदिति सॉरी डॉक्टर अदिति :) सॉरी अदिति जी, आदत डालनी पड़ेगी डॉ. लिखने की, दरअसल मैं अपेक्षा नहीं कर रहा था, मुझे कुछ संशय था की शायद मानसून की वर्षा के बाद आप फिर से बादल की भांति आलोप न हो जाएँ, किन्तु आपके विचार पाकर इतना सुखद आश्चर्य, और सुखद अनुभूति हो रही है जो व्यक्त नहीं सिर्फ महसूस की जा सकती है, किन्तु आपकी सराहना के लिए आभार जरुर व्यक्त करते हैं ! आपका बहुत – बहुत स्वागत है इस पिच पर डॉ. अदिति जी ….. !

D33P के द्वारा
July 14, 2012

बहुत सुंदर व्यंग्यात्मक रचना है ! बधाई !

    allrounder के द्वारा
    July 15, 2012

    स्वागत है दीप्ति जी आपके विचारों का पोस्ट पर और सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद !

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
July 14, 2012

मान्य सचिन जी, नमस्ते !………..ये कैसी विडंबना और जीवन से संदर्भित कैसा विरोधाभास है ? जो है वो दिखता नहीं और जो नहीं है वही दिखता है | तीनों ही बंधों में तीनों ही अलिखित मौलिक अधिकार लिखित से बढ़कर है | यह आप की दूरदर्शिता और अचूक लेखिनी का कमाल है | उपर्युक्त दो बंधों में वर्णित विसंगतियां तो अपने आप में समाज और देश के लिए कलंक की बात है | पर अंतिम बंध की विसंगति तो मीठे अहसासों से भरी है | अनेकशः साधुवाद ! पुनश्च !!

    allrounder के द्वारा
    July 15, 2012

    सादर प्रणाम आचार्य जी, बेशक भ्रष्ट्राचार और दहेज़ प्रथा आज हमारे देश का कलंक हैं जिस पर जितना भी लिखा जाए कम है ! और इन्ही कद्वाहतों से बचने के लिए अंतिम बंध मैं थोडा मुस्कराहट लाने का प्रयास किया था अपनी ओर से ! आप को तीनो ही बंध पसंद आये बेहद प्रसन्नता हुई, आपकी सराहना पाकर सचमुच प्रोत्साहन मिलता है, आगे भी ऐसे ही अपने ज्ञानवर्धक विचारों से अवगत करते रहिये ! आभार !

Ajay Kumar Dubey के द्वारा
July 14, 2012

हा हा हा हा …बहुत खूब सचिन जी . आनंद आ गया…और अपनी नैतिक जिम्मेदारी और दूसरों के मौलिक अधिकारों का ज्ञान भी प्राप्त हुआ… आभार आपका….

    allrounder के द्वारा
    July 15, 2012

    :) :) :) आपको हमारी रचना पढ़कर आनंद प्राप्त हुआ समझिये हमें हमारी मेहनत का फल मिला, आपका हार्दिक स्वागत है दुबे जी, ऐसे ही मजा लेते रहिये और अपने विचारों से अभिभूत करते रहिये !

narayanimaya के द्वारा
July 14, 2012

नमस्कार सचिन जी हमेशा की तरह आपकी एक और अच्छी रचना ,काश इन पंक्तियों का असर हो,… मुफ्त का चन्दन समझ खूब लगाया .. धन्यवाद नारायणी

    allrounder के द्वारा
    July 15, 2012

    नमस्कार नारायणी जी, सही फ़रमाया आपने काश ! इन पंक्तियों का असर किसी पर हो ! सराहना के लिए हार्दिक आभार आपका !

rekhafbd के द्वारा
July 14, 2012

सचिन जी .सादर क्या कमाल का लिखा है ,तीनो रचनाएं एक से बढ़ कर एक ,ऐसे ही लिखते रहिये ,बहुत बहुत बधाई

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    सादर प्रणाम रेखा जी, आपकी शुभकामनाओं के लिए आभार आपका !

yamunapathak के द्वारा
July 14, 2012

बहुत खूब .अंतिम मौलिक अधिकार ने तो हास्य का पुट भर दिया. सुन्दर आलेख धन्यवाद.

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    नमस्कार यमुनाजी, आपकी प्रशंशा के लिए हार्दिक आभार आपका !

R K KHURANA के द्वारा
July 14, 2012

प्रिय सचिन जी, बहुत अच्छी व्यंग्यात्मक रचना है ! सुंदर रचना के लिए मेरी बधाई ! राम कृष्ण खुराना

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    आदरणीय खुराना साहब रचना आपको पसंद आई, आपका आशीर्वाद प्राप्त हुआ, आभार !

manoranjanthakur के द्वारा
July 14, 2012

श्री सचिनजी आप सचमुच आल राउंडर है कमाल की लेखनी

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    हार्दिक आभार मनोरंजन जी, इस मनोरंजक उत्साहवर्धन के लिए :)

div81 के द्वारा
July 14, 2012

आल राउंडर उर्फ सचिन जी, जेजे की पिच में ऐसे ही शानदार पारी खेलते रहिये ये आप कि नैतिक जिम्मेदारी है और हम इस शानदार पारी में तालियाँ रूपी प्रतिक्रिया देंगे ये हमारा मौलिक अधिकार है क्या कहने इस लाइन के …………………. तो आप ने जेजे को भी नहीं छोड़ा पति मन ही मन कुछ बडबडाया और जे जे की साईट सा धीरे से कदम बढ़ाया :) मजेदार

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    दिव्या जी, उर्फ़ दिव81 जी आप जैसे प्रशंशक जब तक रहेंगे बेशक हम जे जे की इस पिच पर ऐसे मास्टर स्ट्रोक खेलते रहेंगे :) आपका हार्दिक आभार दिव्या जी !

yogi sarswat के द्वारा
July 14, 2012

लेडीज फिंगर की जगह जेंट्स अंगूठे सी ले आये बैंगन से पति की भिन्डी सी पत्नी लगाती फटकार है क्यूंकि अच्छी सब्जी लाना पति की नैतिक जिम्मेदारी और फटकार लगाना पत्नी का मौलिक अधिकार है सचिन जी , सप्ताह के अंत में इतनी मस्त रचनायें देंगे तो वीकेंड और भी खुशनुमा हो जायेगा ! लेकिन साब आजकल तो ये जेंट्स अंगूठा भी बहुत महंगा हो चला है ! मस्त रचना

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    नमस्कार योगी जी, भाई हमने तो अच्छी रचना रच कर अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाई आपका वीकेंड खुशनुमा बनाने की, किन्तु भाई भिन्डियाँ जरा लेडीज फिंगर सी ही ले जाना वर्ना मौसम बिगड़ भी सकता है :) ! हार्दिक आभार आपका !

minujha के द्वारा
July 14, 2012

सचिन जी नमस्कार आपकी तीनों कविताएं  बङी खूबसूरती से आपके कथन को स्पष्ट करती है ,अंतिम वाली के तो क्या कहने,ये तो  घर घर की कहानी है…….,वैसे भी पति नाम के प्राणी को सब्जी से लेकर दुनियादारी तक पत्नी ही तो सिखाती है,.. कृपया पत्नी की जिम्मेदारियों को अनदेखा ना करें बांकि लिखा आपने बिल्कुल दुरूस्त है ,बधाई

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    मीनू जी, सादर प्रणाम बिलकुल दुरुस्त फरमाया आपने पति को दुनियादारी पत्नी ही सिखाती है, और हिन्दोस्तानी पत्नी के तो क्या कहने, उसका सिखाया पति तो विदेशी बाजार मैं भी मात न खाए :) हिन्दोस्तान की समस्त पत्नियों और उनके पत्नीत्व को हमारा शत -शत नमन ! और आपका हार्दिक आभार विचारों के लिए :)

mparveen के द्वारा
July 14, 2012

सचिन जी आप इतना अछा लिखते हैं तो उस पर कमेन्ट करना हमारा नैतिक कर्तव्य बन जाता है और JJ का आपको बेस्ट ब्लोगर बनाना …. युही चौके ओर छक्के मारते रहिये पर लास्ट वाले पहरे पे गौर करिए IS तरह से आउट होने का खतरा रहता है …::) :) :) बधाई !!

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    प्रवीण जी, आपने अपना कर्त्तव्य पूरी निष्ठा से निभाया, और जे जे तो अपने अधिकार का प्रयोग करता ही है :) प्रवीण जी जब बल्लेबाज छक्के लगाता है तो आउट होने का रिस्क तो रहता ही है, फिर भी मित्र होने के नाते आपने चेताया उसके लिए आपका हार्दिक आभार !

Bhupesh Kumar Rai के द्वारा
July 14, 2012

आलराउंडर जी , बहुत खूब ! क्या बल्ला घुमाया है, नैतिकता का पाठ अब स्पष्ट समझ में आया है. हमारी नैतिक जिम्मेदारी किसी का अधिकार बन गई और किसी की मेहनत से हरे भरे खेत को भैंस चर गई.

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    बहुत – बहुत धन्यबाद भूपेश जी ! सही कहा आपने चारा लगाना किसान की नैतिक जिम्मेदारी और उसे खाना भैंस का नैतिक अधिकार है :)

dineshaastik के द्वारा
July 14, 2012

सचिन जी  नेता जी वाला व्यंग तो भ्रष्टाचार पर प्रहार है। दहेज वाला व्यंग एक बेटी के पिता की पीडा का उद्गार है। और भिण्डी वाला व्यंग तो सचमुच ही बहुत ही मजेदार है। इस पर प्रतिक्रिया देना सबका कर्तव्य एवं मेरा अधिकार है। हॉ…हॉ…हॉ…हॉ….

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    दिनेश जी आपकी इस प्रतिक्रिया से ब्लॉग पर आई बहार है जिसके लिए आपका ह्रदय से धन्यबाद और आभार है !

jlsingh के द्वारा
July 14, 2012

आदरणीय सचिन महान जी ! सादर अभिवादन! ऊपर की दो कविताएँ तो चलिए ठीक है पर, तीसरी तो ‘तीसरी कसम’ की तरह धारदार है! “भिंडियां देखते ही पत्नी ने अपनी त्योरियां चढ़ाईं बोली अरे ये कैसी भिंडियां उठा कर ले आये लेडीज फिंगर की जगह जेंट्स अंगूठे सी ले आये बैंगन से पति की भिन्डी सी पत्नी लगाती फटकार है क्यूंकि अच्छी सब्जी लाना पति की नैतिक जिम्मेदारी और फटकार लगाना पत्नी का मौलिक अधिकार है” महिला ब्रिगेड की अध्यक्षा भी ‘छुरी’ लेकर तैयार हैं ! कितने स्टार दूं और कितनी बार वाह वाह कहूं! मेरी भी तो कुछ जिम्मेदारी और मौलिक अधिकार हैं!

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    सादर नमस्कार जे एल सिंह जी , लगता है आप भी भिन्डियों की मार झेल चुके हैं :) तभी ऊपर के 2 उदाहरण छोड़कर सीधे सब्जी मंडी पर रुके :) ! ठीक है भाई साहब चलिए आपको कुछ तो पसंद आया ! और हाँ सचिन महान जी, शायद ये शब्द सचिन तेंदुलकर जी के लिए होंगे :) उनकी ओर से हार्दिक धन्यवाद आपका !

sinsera के द्वारा
July 14, 2012

सचिन जी, नमस्कार, मौलिक अधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाने की नैतिक ज़िम्मेदारी आपने अच्छी निभाई ..कृपया सब्जी लाने का काम भी अच्छी तरह किया करें….(यहाँ पर मैं नारी ब्रिगेड के साथ हूँ..)

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    सादर नमस्कार सरिता जी, आपकी नारी ब्रिगेड जिंदाबाद, आपकी नेक सलाह पर गौर किया जायेगा आगे से कोशिश यही रहेगी, कि शिकायत का मौका न दिया जाए :) हार्दिक आभार आपके विचारों का !

seemakanwal के द्वारा
July 13, 2012

लिखा बड़ा असरदार है अच्छालिखना आपकी नैतिक ज़िम्मेदारी है कमेन्ट करना हमारा मौलिक अधिकार है .

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    नस्म्कार सीमा जी, बिलकुल अच्छा लेखन इस मंच पर हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है, और कमेन्ट करना न करना पाठक का मौलिक अधिकार है, आपने अपने अधिकार का प्रयोग किया उसके लिए आपका हार्दिक आभार है !

Rajkamal Sharma के द्वारा
July 13, 2012

प्रिय सचिन भाई ….. आदाब ! एक बार आपने फरमाया था की एक रचना पर बहुत ही मेहनत लगती है और आपकी प्रत्येक रचना से वोह झलकती भी है ….. पिछली बार चूक गया था फिर भी माफ़ी मांग कर आपको शर्मिंदा नहीं करूँगा – हा हा हा हा हा इस बार ब्लॉगर आफ दा वीक की बधाई अग्रिम रूप से स्वीकार कीजियेगा ….. शुभकामनाओं सहित

    jlsingh के द्वारा
    July 14, 2012

    गुरुदेव आप इसी तरह चूकते रहें, यह बात भी मजेदार है! सचिन जी सचमुच के ALROUNDAR और बधाई के हकदार हैं!

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    नमस्कार भाई राजकमल जी, भाई आपकी बात सत्य हो भी जाती शायद किन्तु ये हमारा दुर्भाग्य है की जे जे के मंच है और वनडे क्रिकेट मैच मैं बड़ा अंतर है वहां एक ही खिलाडी को अगले मैच मैं फिर से मैं ऑफ़ द मैच चुना जा सकता है किन्तु यहाँ ऐसा नहीं है ! और हाँ आपकी प्रशंशा करनी पड़ेगी आप बाते याद रखते हैं, सचमुच एक अच्छी रचना रचने मैं काफी मेहनत लगती है भाई, किन्तु आप जैसा पारखी जब इस मेहनत की झलक को रचना मैं महसूस करे तो मेहनत सफल हुई समझो ! आपका हार्दिक आभार भाई !

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    धन्यवाद जे एल सिंह जी, आपने हमारी आल राउण्डरी को सराहा ! :)

roshni के द्वारा
July 13, 2012

सचिन जी नमस्कार, वाह सचिन जी नैतिक अधिकार और मौलिक अधिकार की नयी और सुंदर परिभाषा दी आपने .. दो शब्द आपके लिए … सचिन जी भिन्डी के अनुभव से गुजरे तो रच डाला इतिहास , सब्जी की खरीदारी में फेल हो गए, पर हास्य में हो गए पास .. वैसे पास नहीं फर्स्ट … बधाई

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    नमस्कार रौशनी जी, आपको नैतिक जिम्मेदारी और मौलिक अधिकार की हमारी परिभाषा समझ मैं आई उसके लिए एक धन्यबाद ! दूसरा आपको परिभाषा पसंद आई दूसरा धन्यबाद ! और तीसरा आपने हास मैं पास किया वो भी फर्स्ट क्लास :) ! वैसे रौशनी जी आपका भिन्डी को लेकर कभी झगडा हुआ है ?

rita singh 'sarjana' के द्वारा
July 13, 2012

सुन्दर

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    रीता जी, आपका हार्दिक धन्यवाद !

shashibhushan1959 के द्वारा
July 13, 2012

आदरणीय सचिन जी, सादर ! “”टैक्स चुकाना आम जनता की नैतिक जिम्मेदारी और माल पर ताल ठोकना नेता का मौलिक अधिकार है”" —————- “”बेटी को विदा करना उसकी नैतिक जिम्मेदारी और दहेज समेटना बेटे के बाप का मौलिक अधिकार है”" —————- “”क्यूंकि अच्छी सब्जी लाना पति की नैतिक जिम्मेदारी और फटकार लगाना पत्नी का मौलिक अधिकार है”" ——————- यही तो इस समय सच्चाई की पराकाष्ठा है ! सत्य कहें तो जीवन ही इन्ही के इर्द-गिर्द घूम रहा है ! आपके इस धारदार व्यंग्य का जवाब नहीं ! बहुत बेहतरीन, चुभती हुई, चुभोती हुई ! सादर !

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    माननीय शशिभूषण जी, सादर प्रणाम, रचना के माध्यम से कुछ सन्देश दे सका आपकी सराहना पा सका हार्दिक प्रसन्नता हुई !

munish के द्वारा
July 13, 2012

क्योंकि फाइव स्टार देना हमारी नैतिक जिम्मेदारी और कमेन्ट करना मोलिक अधिकार है. बहुत बढ़िया

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    कमेन्ट के नैतिक अधिकार का अपने स्टार के साथ प्रयोग किया, इसलिए आभार व्यक्त करना हमारा दायित्व है आपका हार्दिक आभार मुनीश जी !

ANAND PRAVIN के द्वारा
July 13, 2012

सचिन भाई, नमस्कार खूब दिखाया और पढ़ाया आपने हमें मौलिक अधिकारों के बारे में ……………… व्यंग और हास्य का जोरदार तारका लगाया है आपने जबरदस्त प्रहार

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    नमस्कार भाई आनंद जी, बहुत – बहुत बधाई आपको ( भिन्डी ) शादी की ! तैयार रहिये झोला थामने के लिए :) हार्दिक आभार विचारों के लिए !

Chandan rai के द्वारा
July 13, 2012

सचिन भाई ! आपकी सुन्दत तीन कवितात्मक तथ्य कम कहानी से मन में हँसी बहुत आई , माफ़ कीजिय इक गंभीर विषय पर आपने इतने सुन्दर रूप में लिखा की चाह कर लिख की बस ये दर्द में हस रहा हूँ ! बेहतरीन आलेख ,आशय ,कवितायें , विचारधारा !

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    भाई चन्दन जी, दर्द तो हमें भी बहुत होता है यूं हँसते हुए किन्तु क्या करें भाई, कुछ दर्द ऐसे होते हैं जिनमे मुस्कुराना ही पड़ता है ! आपकी प्रतिक्रिया पर दो पंक्तियाँ ” दर्द को हम कुछ इस तरह से छिपाते हैं, खुद भी हँसते हैं औरों को भी हंसाते हैं ” आपका हार्दिक धन्यबाद !

Ramesh Bajpai के द्वारा
July 13, 2012

प्रिय श्री सचिन जी “हे प्रभु ये कैसा संसार है ये कैसा संसार है ” बिलकुल सही कहा आपने ,ये नामुराद भिन्डिया जो न करवाए वही कम है | पर कुछ भी तो मामला समझ में आ गया है | अगली बार यह गलती मै भी नहीं दुहराऊ गा | शुभकामनाओ सहित

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    आदरणीय बाजपेई जी, सादर प्रणाम बहुत दिनों बाद आपके दर्शन आशीर्वाद स्वरुप पाकर धन्य हुए ! वैसे भिन्डियाँ तो ठीक है ये नामुराद कौन हैं, जरा धीरे बोलिए वर्ना जितना मामला समझ मैं आया है, फिर से भूलने के चांस हैं :) आपका हार्दिक आभार !

MAHIMA SHREE के द्वारा
July 13, 2012

वाह वाह वाह !! allrounder ji क्या बात है … बधाई आपको

    allrounder के द्वारा
    July 14, 2012

    बहुत – बहुत धन्यवाद महिमा जी आपका हार्दिक स्वागत है ब्लॉग पर !


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