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Hanso Hansao Khoon Badhao

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क्यूँ जाऊं रवि पर जब-सब कुछ है जमीं पर (मॉडर्न कविता)

Posted On 18 Jun, 2012 Others में

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साथियो जैसा कि हम सभी जानते हैं, प्यार इंसान का एक स्वाभाविक गुण है, जो सदियों से चला आ रहा है, चल रहा है और आगे भी चलता रहेगा और इसे व्यक्त करने का हर किसी मनुष्य का अलग – अलग तरीका होता है, मगर हर बात को कहने का एक ढंग होता है, एक सलीका होता है, और प्यार को व्यक्त करने के इस  सलीके और ढंग को अभिव्यक्ति देने मैं हर युग मैं कवि, शायर, पोएट या गीतकार सबसे अग्रणी रहे हैं ! कहते हैं जहाँ न पहुंचे रवि वहाँ पहुंचे कवि, उसकी कल्पनाओं का कोई अंत नहीं होता, किन्तु कवि भी कहीं न कहीं से प्रेरणा लेता है उसकी कविता पर समाज और माहौल का बहुत गहरा असर होता है, पहले का कवि बिलकुल फुर्सत मैं रहता था और आराम से बाग – बगीचे मैं खटिया बिछा कर कविता करता था, जिससे उसकी कविता मैं प्राकर्तिक वस्तुओं का वर्णन हुआ करता था, कभी वह नायिका की तुलना चाँद से करता है, कभी ताजमहल की उपमा देता है ! किन्तु अब युग बड़ी ही गति से बदल रहा है, न वैसे कवि रहे, जो रवि की छवि अपनी कविता मैं उतार दें, न बाग़ रहे न बगिया न खाट रही न खटिया, लोगों के पास इतनी फुर्सत नहीं रही, आधुनिक युग मैं हम संचार माध्यमों की जकड मैं, इंटरनेट के मकडजाल की पकड़ मैं हैं ! ऐसे मैं प्रेमियों का काम काफी आसान हो गया है, सबसे ज्यादा कम्पूटर और नेट का फायदा ऐसे ही जोड़े उठा रहे हैं, हालांकि ऐसे माहौल मैं भी प्यार मैं कविता का अभी भी महत्तव है, और आज के प्रेमियों को भी इसका सहारा लेना पड़ जाए तो आज का कवि कैसे कविता करेगा ये सोचने की बात है :) अब चूँकि मैं भी एक छोटा सा कवि हूँ, हालांकि उतना बड़ा वाला नहीं हूँ जो रवि पर पहुँच सकूँ फिर भी, जहाँ तक पहुंचा हूँ आप सबको भी वहां तक ले चलता हूँ ! दोस्तों कभी – कभी मेरे दिल मैं कवियों वाले ख्याल आते हैं, और ऐसा ही एक ख्याल मेरे दिमाग के कटोरे मैं मानसून की पहली बूँद की भांति टप्प से गिरा कि आने वाले युग मैं प्रेमी अपनी कविता के जरिये कैसे अपनी प्रेमिका को रिझाने का प्रयास करेगा ! उसके इस प्रयास को कविता के माध्यम से आप सबके समक्ष पेश कर रहा हूँ, पसंद आये तो अपनी – अपनी प्रेमिका को और न पसंद आये तो अपनी – अपनी बीबियों को अवश्य सुना देना

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Yh1Yh2

फेसबुक सा फेस है तेरा, गूगल सी हैं आँखें
एंटर करके सर्च करूँ तो बस मुझको ही ताकें
रेडिफ जैसे लाल – गाल तेरे हौटमेल से होंठ
बलखा के चलती है जब तू लगे जिगर पे चोट
सुराही दार गर्दन तेरी लगती ज्यों जी-मेल
अपने दिल के इंटरनेट पर पढ़ मेरा ई-मेल
मैंने अपने प्यार का फारम कर दिया है अपलोड
लव का माउस क्लिक कर जानम कर इसे डाउनलोड
हुआ मैं तेरे प्यार मैं जोगी, तू बन जा मेरी जोगिन
अपने दिल की वेबसाईट पर कर ले मुझको लोगिन
तेरे दिल की हार्डडिस्क मैं और कोई न आये
करे कोई कोशिश भी तो पासवर्ड इनवैलिड बतलाये
गली मोहल्ले के वाइरस (आशिक) जो तुझ पर डोरे डालें
एन्टी वाइरस सा मैं बनकर नाकाम कर दूँ सब चालें
अपने मन की मेमोरी मैं सेव तुझे रखूँगा
तेरी यादों की पैन ड्राइव को दिल के पास रखूँगा
तेरे रूप के मॉनिटर को बुझने कभी न दूँगा
बनके तेरा UPS मैं निर्बाधित पावर दूँगा
भेज रहा हूँ तुम्हे निमंत्रण फेसबुक पर आने का
तोतों को मिलता है जहाँ मौका चोंच लड़ाने का
फेसबुक की ऑनलाईन पर बत्ती हरी जलाएंगे
फेसबुक जो हुआ फेल तो याहू पर पैंग बढायेंगे
एक-दूजे के दिल का डाटा आपस मैं शेयर करायेंगे
फिर हम दोनों दूर के पंछी एक डाल के हो जायेंगे
की-बोर्ड और उँगलियों जैसा होगा हमारा प्यार
बिन तेरे मै बिना मेरे तू होगी बस बेकार
विंडो से देखेंगे दोनों इस दुनियाँ के खेल
आइकोन के डिब्बों की होगी लंबी रेल
फिर हम आजाद पंछी शादी के CPU मैं बन्ध जायेंगे
इस दुनिया से दूर डिजिटल की धरती पे घर बनायेगे
फिर हम दोनों प्यासे-प्रेमी नजदीक से नजदीकतर आते जायेंगे
जुड़े हुए थे अब तक सॉफ्टवेयर से अब हार्डवेयर से जुड जायेंगे
तेरे तन के मदरबोर्ड पर जब हम दोनों के बिट टकरायेंगे
बिट से बाइट्स, फिर मेघा बाइट्स फिर गीगा बाइट्स बन जायेंगे
ऐसी आधुनिक तकनीकयुक्त बच्चे जब इस धरती पर आयेंगे
सच कहता हूँ आते ही इस दुनिया मैं धूम मचाएंगे
डाक्टर्स और नर्स सभी दांतों तले ऊँगली दबाएंगे
जब ये बच्चे अपना राष्ट्रीय गीत औयें- औयें- नहीं
याहू – याहू चिल्लायेंगे ….. याहू-याहू चिल्लायेंगे………..
याहू – याहू चिल्लायेंगे ….. याहू-याहू चिल्लायेंगे ………

Yh4

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125 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Manisha Singh Raghav के द्वारा
August 15, 2013

आपकी रचना सूखे में बरसते मेघ की तरह हैं . दिल खुश कर दिया . आपकी रचना ने . बहुत खूब

Rita Singh, 'Sarjana' के द्वारा
August 8, 2013

बढ़िया सचिन जी

aman kumar के द्वारा
August 8, 2013

बहुत सुंदर सचिन भाई ……….

vijay के द्वारा
July 16, 2012

सचिन जी नमस्कार आपकी कविता ने मेरे मन रूपी हार्ड डिस्क के सी ड्राइव में हास्य का नया प्रोग्राम इन्स्टाल कर  दिया कविता निश्चित ही बहुत प्यारी है धन्यवाद

    allrounder के द्वारा
    July 16, 2012

    भाई विजय जी इस प्रोग्राम को ऐसे ही अपने दिल मैं इंस्टाल रहने दीजिये और जब भी मन करे हमारी हार्ड डिस्क शेयर कर इस कविता और अन्य कविताओं का आनंद लीजिये और हमें प्रोत्साहित करते रहिये !

ajaykr के द्वारा
July 13, 2012

सचिन जी ,सादर प्रणाम जहां न पहुचे रवि वहाँ पहुचे कवि …..की व्याख्या हमारे हिन्दी के आचार्यजी जो की एक प्रसिद्द हास्य कवि हैं ,कुछ इस प्रकार से करते हैं — कवि लोग खुद में ही मस्त रहते हैं ,एक बार एक कवि महोदय पैदल सड़क पर जा रहे थे ,अपने में ही मस्त,गटर का ढक्कन खुला था ……………………..कवि महोदय उसमे गिर गए वहाँ सूर्य का प्रकाश नही पहुँचता था ,तभी से यह कहावत बनी ….जहां न पहुचे रवि वहाँ पहुचे कवि …हा हा हा http://avchetnmn.jagranjunction.com/2012/07/13/%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%81-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%89%E0%A4%B8-%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87/

    allrounder के द्वारा
    July 13, 2012

    प्रणाम अजय जी, होते हैं भइय्या कुछ – कुछ कवि ऐसे भी होते हैं ! :) :) :)

savi के द्वारा
June 28, 2012

बहुत समय के बाद इतनी मजेदार हास्य कविता पढ़ने को मिली | इस तनावभरी जिंदगी मे कुछ पल मुस्कराहट बिखेरने के लिए आप का आभार

    allrounder के द्वारा
    June 28, 2012

    सवि जी , आपका हार्दिक आभार इतनी प्यारी प्रतिक्रिया के लिए, यदि हम अपनी लेखनी से किसी के चेहरे पर मुस्कराहट ला सके तो हमारा लेखन सार्थक हुआ !

divya के द्वारा
June 28, 2012

सचिन जी, बेस्ट ब्लॉगर ऑफ द वीक चुने जाने के लिए हमारी तरफ से बधाई स्वीकार कीजिये | देरी के लिए क्षमाप्रार्थी है जब से आप जेजे के प्रथम पेज मे शोभा बढ़ा रहे है तभी से जेजे का पेज खुलने मे समस्या आ रही है अजीब इत्तेफाक है ये :)

    allrounder के द्वारा
    June 28, 2012

    नमस्कार दिव्या जी, बधाई के लिए आपका हार्दिक आभार, यधपि ये देर से नहीं काफी देर से है :) फिर अभी आपने सही कहा उसी दिन से समस्या है जे जे के पेज मैं उसके लिए सिर्फ यही कह सकता हूँ ! मेरा नसीब की मेरे कदम जहाँ भी पड़े ये बदनसीबी भी मेरी भी वहां चली आई :) :)

sinsera के द्वारा
June 27, 2012

सचिन जी , नमस्कार, बहुत दिनों बाद मुलाकात हुई, बहुत अच्छा लगा.. टॉपिक ऐसा निकला है कि जज्बात उमड़ पड़े….. “कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है, कि क्यूँ तुझी को बनाया गया है मेरे लिए, क्या मुझ से बढ़ के कोई गुनाहगार न था, ये अज़ाब क्यूँ तय पाया गया है मेरे लिए… ” एक और… न जाने क्यूँ मगर फिर भी मेरा दिल ये कहता है , वफ़ा को आग लग जाये , मुहब्बत भाड़ में जाये………. आज इतना ही रहने दीजिये, शेष फिर… और हाँ, बेस्ट ब्लॉगर बनने की बहुत बहुत बधाई………

    allrounder के द्वारा
    June 28, 2012

    सादर नमस्कार सरिता जी, आपको भी बहुत दिनों के बाद पोस्ट पाकर हार्दिक प्रसन्नता हुई, बात निकलते ही आपने जो शेर बल्कि यूँ कहें बब्बर शेर पेश किये हैं उनके लिए आपका हार्दिक आभार सरिता जी !

Punita Jain के द्वारा
June 27, 2012

आदरणीय सचिन जी, कविता का data download करके redistribute करने लायक है | आपने तो पूरी tech. की दुनिया की सैर करा दी, computer, internet, website से शब्दों को चुनकर सुन्दर कविता बना दी | शुभकामनायें

    allrounder के द्वारा
    June 28, 2012

    नमस्कार पुनीता जी, आपको हमारी हाई टेक मोदेर्ण कविता अच्छी लगी इसके लिए हार्दिक धन्यवाद आपका ! पुनीता जी इस मंच पर हमारा जो है वो सब मंच के साथियों का है आप कविता का डाटा डाउन लोड करके इस डिस्ट्रीबेयुट कर सकती हैं :) :) आपके अनमोल विचारों के लिए आपका आभार !

rajuahuja के द्वारा
June 26, 2012

ज़वाब नहीं है मित्र तुम्हारा , ई के ऐसे बोल………? ई में लव या लव में ई , डाउन या अपलोड ..? की बोर्ड पर इश्क तुम्हारा , मानिटर के साथ ! लगे रहो, मंजिल पाओगे , ऐसा है विश्वास !

    allrounder के द्वारा
    June 27, 2012

    बहुत – बहुत धन्यवाद राजू आहूजा जी, उत्साहवर्धन के लिए !

anujdiwakar26 के द्वारा
June 25, 2012

अति उत्तम सचिन जी.बहुत बहुत बधाई.आप वाकई इसके हक़दार है.

    allrounder के द्वारा
    June 26, 2012

    बहुत – बहुत धन्यवाद आपका अनुज दिवाकर जी !

jyotsnasingh के द्वारा
June 25, 2012

प्रिय ALLROUNDER जी ,क्या कविता लिखी है भाई मज़ा आगया ,इन्टरनेट के विस्तृत आकाश पर उप्ममाओं और कल्पनाओं की उड़ान क्या कहने .तारीफ़ केलिए शब्द कम पड़ गए हैं मुझे लगता है की ब्लॉगर ऑफ़ थे मोंठ भी आपही बनोगे. वाह क्या बात क्या बात क्या बात.

    allrounder के द्वारा
    June 25, 2012

    बहुत – बहुत धन्यवाद ज्योत्स्ना जी… आपका हार्दिक स्वागत है, और आपका तहे दिल से शुक्रिया आपका कहना गलत है तारीफ के लिए आपके पास शब्द नहीं है, अरे ज्योत्स्ना जी जे जे ने तो हमें ब्लोग्गर ऑफ़ द वीक चुना है आपने तो हमें ब्लॉगर ऑफ़ द मंथ करार दिया इससे बड़े शब्द और क्या हो सकते हैं एक रचनाकार के लिए ! आपका हार्दिक धन्यवाद, आपके विचारों के लिए !

mparveen के द्वारा
June 24, 2012

सचिन जी नमस्कार, हम तो ट्रिप पर गए हुए थे आकर देखा तो आप दिवार पर लटके हुए थे बेस्ट ब्लोगर के रूप में ( :) :) :) :) ) आपको बहुत बहुत बधाई …. सभी चेंनल्स का क्या खूब वर्णन किया है … याहूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ…….

    allrounder के द्वारा
    June 25, 2012

    :) :) :) सादर नमस्कार प्रवीण जी, अच्छा हुआ कि आप ट्रिप से लौट आईं, और हमें देख लिया वर्ना आपके स्पेशल कमेन्ट के लिए तो न जाने हम कब तक लटके रहते जे जे की इस दीवार पर ! आपका हार्दिक आभार प्रवीण जी… आपके इस स्पेशल कमेन्ट के लिए याहूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊ…. धन्यवाद :) :) :)

roshni के द्वारा
June 23, 2012

सचिन जी , आपके १०० कमेन्ट पुरे होने पर मेरी और से बधाई … आपकी एक शतकिये पारी पूरी हुई … आभार

    allrounder के द्वारा
    June 25, 2012

    रौशनी जी, आपका तहे दिल से शुक्रिया जो हमारी इस शतकीय पारी की 100th गेंद आपने कमेन्ट के रूप मैं फेंकी :) :) :)

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
June 23, 2012

सचिन जी, नमस्कार- आपकी कविता बाकई में मोर्डन है, अपने कंप्यूटर व इंटरनेट के द्वारा आने वाले समय में होने वाले प्यार का सही व सजीव चित्रण किया है. आपकी रचना वास्तव में बेस्ट ब्लोगर ऑफ़ द वीक के योग्य थी. बधाई स्वीकार कीजिये और नाचीज की कविता जरुर पढियेगा.. http://www.hnif.jagranjunction.com

    allrounder के द्वारा
    June 25, 2012

    सादर नमस्कार जनाब, आपका तहेदिल से शुक्रिया जो आपने हमारे लिखे को इज्जत बख्शी, आपकी नजर मैं रचना बेस्ट ब्लोगर ऑफ़ द वीक के योग्य थी, ये जानकार दिली ख़ुशी हुई ! आगे भी विचारों का ये सिलसिला यौन ही जारी रखे इसी उम्मीद के साथ आपका हार्दिक आभार !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 23, 2012

आदरणीय सचिन जी, सादर सही कहा आने .क्यूँ जाऊं रवि पे जीना यहाँ मरना यहाँ इसके सिवा जाना कहाँ सुनहरे खिताब हेतु बधाई,

    allrounder के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी, हार्दिक धन्यवाद आप सभी के स्नेह और उत्साहवर्धन का !

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
June 23, 2012

‘Blogger of the week’ की बधाई सचिन जी.बहुत सुन्दर आधुनिक कविता .नई तकनीकों का सांकेतिक प्रयोग अद्भुत है.

    allrounder के द्वारा
    June 23, 2012

    बहुत – बहुत धन्यवाद राजीव जी …… प्रशंशा के लिए !

मनु (tosi) के द्वारा
June 23, 2012

आदरणीय सचिन बहुत ही बढ़िया रचना …बिलकुल वर्तमान के अनुकूल …मन को भा गई ,,,, इसके साथ ही बेस्ट ब्लॉगर ऑफ द वीक बनने पर हार्दिक बधाई ………. !!!

    allrounder के द्वारा
    June 23, 2012

    नमस्कार मनु जी, आपके मन को कविता भाई, इसके लिए आपको भी हार्दिक बधाई :)

jlsingh के द्वारा
June 23, 2012

आदरणीय सचिन भाई ,नमस्कार! अलग अंदाज में बेहतरीन मार्डन कविता पर मिले सम्मान के लिए कृपया हार्दिक बधाई स्वीकार करिए ,..देरी के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ , याहू …….

    allrounder के द्वारा
    June 23, 2012

    :) :) आपका याहो धन्यवाद जे एल सिंह जी….. :) याहूssssssssssssss…… :)

आर.एन. शाही के द्वारा
June 23, 2012

बेहतरीन पोस्ट एवं ब्लागर आफ़ द वीक की हार्दिक बधाइयाँ सचिन जी ।

    allrounder के द्वारा
    June 23, 2012

    आपका हार्दिक धन्यवाद शाही जी !

surendr shukl Bhramar5 के द्वारा
June 22, 2012

जहां न पहुंचे रवि वहां पहुँच जाए आप का छक्का ….जय श्री राधे एक बार पुनः ढेर सारी बधाइयाँ ….बेस्ट ब्लागर आफ दी वीक के लिए हर इनिंग में आप ओपनिंग करें और यों ही जड़ते रहें भ्रमर ५

    allrounder के द्वारा
    June 23, 2012

    आपका बहुत – बहुत धन्यवाद भ्रमर जी, उत्साहवर्धन के लिए :) आप भी ऐसे ही पार दर पारी हम सबका उत्साह बढ़ाते रहें !

Santosh Kumar के द्वारा
June 22, 2012

आदरणीय सचिन भाई ,..सादर नमस्ते अलग अंदाज में बेहतरीन मार्डन कविता पर मिले सम्मान के लिए कृपया हार्दिक बधाई स्वीकार करिए ,..देरी के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ ,..सादर

    allrounder के द्वारा
    June 23, 2012

    सादर प्रणाम प्रिय संतोष भैय्या जी, आपकी बधाई हृदय से स्वीकार है ! और हाँ एक अनुरोध है आपसे कृपया कभी भी .देरी के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ इस युक्ति का प्रयोग मेरे पोस्ट पर न करें, क्यूंकि जितना हमने आपको समझा है, हम समझ सकते हैं की आप के वक्त की कीमत क्या है हम लोग तो सिर्फ कल्पनाओं मैं ही जीते हैं, किन्तु धरातल पर सामजिक सेवा करने मैं आप इस मंच पर सबसे अग्रणी होंगे …. और सदा रहें …. हार्दिक शुभकामनायें आपको !

seemakanwal के द्वारा
June 22, 2012

आप सच में आल राउंडर हैं ,..हाईटेक कविता है कम्प्यूटर पे चेटिंग हुई फिर शादी ,फिर डिवोर्स हो गया , दोनों खुश थे ,इसी बहाने ,कम्प्यूटर कोर्स हो गया …..

    allrounder के द्वारा
    June 23, 2012

    सादर प्रणाम सीमा कँवल जी, सबसे पहले तो आपको हार्दिक धन्यवाद जो आपने कविता को सही नाम दिया हाईटेक कविता :) दूसरा धन्यवाद इसलिए, चूँकि आप खुद एक बहुत अच्छी कवियेत्री हैं, और इसका परिचय आपने अपनी इन दो हाईटेक पंक्तियाँ जोड़कर दिया ! और तीसरा और अंतिम धन्यबाद की आपने लिखा मैं सच मैं आल – राउंडर हूँ, इससे प्रतीत होता है की मैंने अपने नाम को सार्थक किया है :) :) आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार सीमा जी !

Madhur Bhardwaj के द्वारा
June 22, 2012

आदरणीय सचिन भाई, सादर नमस्कार, सर्वप्रथम तो आपको ब्लॉगर आफ दी वीक बनने हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार हो! भाई जी वाकई कमाल की रचना है आपकी, पूरी रचना पढने के दौरान हँसते-हँसते पेट में दर्द हो गया, मेरे बड़े भाई को भी मैंने आपकी यह रचना सुनाई, वो भी वाह – वाह कह उठे! सचिन भाई, आज के समय में जब कि पूरा युवा वर्ग पूरी तरह कंप्यूटर के पीछे भागता नज़र आ रहा है, आज घर-घर में कंप्यूटर मौजूद हैं, उनमे से कुछ घर ऐसे भी हैं जहाँ माता-पिता कंप्यूटर की ABCD भी नहीं जानते हैं! उन घरों में बच्चे कंप्यूटर की मदद से किस राह पर निकल पड़े हैं, आज के समय में कंप्यूटर के सदुपयोग से अधिक दुरुप्रयोग किया जा रहा है! वाकई में आपकी रचना बहुत ही उत्तम है! एक बार फिर इतनी उत्तम रचना के लिए बधाई देते हुए आपसे अपने ब्लॉग SUCH TO YEH HAI पर आने का विनम्र निवेदन करता हूँ. उम्मीद है कि आप मेरा आग्रह स्वीकार करेंगे, जिससे आपके द्वारा मिलने वाली नेक सलाहों के चलते मैं भी अपनी कलम में आप की भांति ही पैनापन ला सकू…! धन्यवाद्! साभार मधुर भारद्वाज http://madhurbhardwaj.jagranjunction.com

    allrounder के द्वारा
    June 23, 2012

    सप्रेम नमस्कार भाई मधुर जी, आपको मेरी रचना पसंद आई, और इतनी पसंद आई की आपने इसे अपने भाईसाहब को भी पढाया उसके लिए विशेष धन्यबाद ! आगे भी ऐसे ही तारतम्य बनाए रखें! आप भी अच्छा लिखते हैं, और लगातार लिखते रहिये इस मंच मैं इतनी ताकत है की धीरे – धीरे आपकी लेखनी स्वत धारदार हो जाएगी मेरी और से हार्दिक शुभकामनाये आपको, हम अवश्य ही आपके ब्लॉग पर अपने विचार रखेंगे ! आपका हार्दिक धन्यबाद !

vikramjitsingh के द्वारा
June 22, 2012

सचिन भाई….नमस्कार… अमूमन हम ने अपने किसी भी कमेन्ट में किसी को भी कभी ‘बधाई’ नहीं दी……लेकिन पता नहीं आपको एडवांस में कैसे ‘बधाई’ दे गए….??? चलो…जब दे ही गए थे….तो ‘कुछ न कुछ’ तो होना ही था……ये तो आप भी मानोगे…कि नहीं..??? ख़ैर……तब तो बीच में ‘हार्दिक’ लगाना ही बाकी रह गया था…..कोई बात नहीं…..अब लगाये देते हैं……तो सुनिए सचिन भाई…… ”आपको Best Blogar of the week चुने जाने पर हमारी तरफ से ‘हार्दिक बधाई” अब तो खुश…….कि नहीं…..///

    allrounder के द्वारा
    June 22, 2012

    नमस्कार भाई विक्रम जी, बड़ा ही अजीब इत्तेफाक है ये, चलिए खैर हमारे लिए तो सुखद इत्तेफाक हुआ ये की आपने अनजाने मैं बधाई शब्द का इस्तेमाल किया और अब आपको दोबारा से देनी पड़ रही है ! कहते हैं इन्सान के मुंह से एक दिन मैं एक शब्द सही निकलता है ! शायद उस दिन आपके मुंह से यही एक शब्द सही निकला हो :) जो भी हो आपका बहुत – बहुत धन्यवाद भाई !

sadhanathakur के द्वारा
June 22, 2012

बधाई हो सचिन जी ,एक अच्छी रचना और ब्लोगर ऑफ़ द वीक बनने के लिए ………

    allrounder के द्वारा
    June 22, 2012

    आदरणीया साधना जी, आपका हार्दिक धन्यवाद कविता पसंद करने के लिए !

narayani के द्वारा
June 22, 2012

नमस्कार सचिन जी बेस्ट ब्लागर ऑफ़ द वीक बनने पर आपको हार्दिक बधाई . सुंदर रचना ,बहुत बधाई धन्यवाद नारायणी

    allrounder के द्वारा
    June 22, 2012

    सादर नमस्कार नारायणी जी, आपका हार्दिक आभार रचना पसंद करने और अपने विचार देने के लिए !

pritish1 के द्वारा
June 22, 2012

सचिन जी क्या कविता है….. क्या बात क्या बात क्या बात……. namaste!prit’s

    allrounder के द्वारा
    June 22, 2012

    धन्यवाद प्रीतेश जी, आपने उत्साह वर्धन किया आपकी भी क्या बात है क्या बात है :) हार्दिक आभार आपका !

Bhupesh Kumar Rai के द्वारा
June 22, 2012

सचिन जी , क्या खूब लिखा है ? इतने आसान और रोचक शब्दों में, पूरा कंप्यूटर तंत्र सामने कर दिया है. हर किसी को गुदगुदाने में समर्थ इस आधुनिक कविता के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई!

    allrounder के द्वारा
    June 22, 2012

    नमस्कार भूपेश कुमार जी, आपका हार्दिक धन्यवाद आपके उत्साहवर्धक विचारों के लिए ! ये तो सिर्फ कल्पनाएँ हैं, जिनके द्वारा यदि हम आपके चेहरे पर मुस्कराहट ला सके तो समझिये हमारा लेखन सार्थक हुआ ! ऐसे हँसते और मुस्कुराते रहिये और विचारों का आदान – प्रदान करते रहिये !

dineshaastik के द्वारा
June 22, 2012

सचिन जी, बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ द वीक का सम्मान मिलने पर मेरी ओर से हार्दिक बधाई…….

    allrounder के द्वारा
    June 22, 2012

    आपका हार्दिक आभार दिनेश जी !

alkargupta1 के द्वारा
June 21, 2012

सचिन जी, बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ द वीक का सम्मान मिलने पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें !

    allrounder के द्वारा
    June 22, 2012

    आदरणीया अलका जी, आपका हार्दिक धन्यबाद !

dharamsingh के द्वारा
June 21, 2012

बहुत बेढब लिखा है,बलागर आफ वीक बनने पर बधाई

    allrounder के द्वारा
    June 22, 2012

    आपका हार्दिक धन्यबाद धरमसिंह जी !

roshni के द्वारा
June 21, 2012

ब्लॉगर ऑफ़ दी वीक चुने जाने पर हार्दिक बधाई सचिन जी

    allrounder के द्वारा
    June 22, 2012

    बहुत – बहुत धन्याद रौशनी जी , बल्कि आपको विशेष धन्यवाद जो आपने हमारी रचना मैं हमारे अनुरोध पर अपनी ओर से चार पंक्तियाँ कहीं, और इस कविता को पूर्णता प्रदान की !

R K KHURANA के द्वारा
June 21, 2012

प्रिय सचिन जी , बेस्ट बलागर आफ द वीक बनने पर मेरा आशीर्वाद और हार्दिक बधाई ! राम कृष्ण खुराना

    allrounder के द्वारा
    June 22, 2012

    सादर प्रणाम खुराना साहब, आपके स्नेह और आशीर्वाद के लिए आपका हार्दिक आभार !

Ramashish Kumar के द्वारा
June 21, 2012

होबहोत अच्छा कविता लिखा है सर आप ने आप को बेस्ट ऑफ़ ब्लॉगर बनने की हार्दिक बधाई.

    allrounder के द्वारा
    June 22, 2012

    माननीय कविता आपको पसंद आई इसके लिए आपका हार्दिक आभार !

yogi sarswat के द्वारा
June 21, 2012

बेस्ट ब्लोगर बनने पर बहुत बहुत बधाई सचिन जी

    allrounder के द्वारा
    June 22, 2012

    बहुत – बहुत धन्याद योगी जी आपका !

rekhafbd के द्वारा
June 21, 2012

सचिन जी ,बेस्ट बलागर आफ द वीक बनने पर हार्दिक बधाई ,अद्भुत मार्डन कविता ,बहुत खूब

    allrounder के द्वारा
    June 22, 2012

    आदरणीया रेखा जी सादर प्रणाम, हमारी MODERN कविता आपको पसंद आई उसके लिए आपका हार्दिक आभार !

Anil Kumar "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
June 20, 2012

अद्भुत, अकल्प्न्नीय, रोचक कविता है आपकी, वाह सचिन जी

    allrounder के द्वारा
    June 20, 2012

    आपको रचना पसंद आई और आपने विचारों से उत्साहित किया इसके लिए हार्दिक आभार आपका !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 20, 2012

आदरणीय सचिन जी, सादर बदल गया रंग बदल गया रूप आशिक के दिल न उठती हूक एक साथ कई पेंच लड़ाओ कटी पतंग जस लहराओ बधाई .

    allrounder के द्वारा
    June 20, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी, सादर प्रणाम पसंद आया प्रतिक्रिया का ये रूप प्रीत शीतल छाँव है नहीं कड़ी धूप फिर भी पतंग सा जो सबसे पेंच लडायेगा एक दिन कटी पतंग से फटी पतंग बन जाएगा :) :) :) हार्दिक आभार आपका !

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
June 20, 2012

वाह भाई वाह आज के इस भागम -भाग की दौड़ में अच्छी व्यंग्यपूर्ण प्रस्तुति बधाई के साथ-साथ हार्दिक आभार ! पुनश्च !!

    allrounder के द्वारा
    June 20, 2012

    नमस्कार आचार्य गुंजन जी, आपको रचना पसंद आई और आपने अपने विचार दिए उसके लिए हार्दिक आभार आपका !

yamunapathak के द्वारा
June 19, 2012

आधुनिक कविता के अंदाज़ पसंद आये ,पर किसी रमणी को यह प्रसंशा नहीं पसंद आयेगी,वह आज भी प्राकृतिक उपमाओं में ही गर्व महसूस करेगी.

    allrounder के द्वारा
    June 19, 2012

    नमकार यमुना जी, ये सिर्फ कवी की एक कल्पना है और इससे ज्यादा कुछ नही :) किसी भी रमणी की पहली पसंद सदा प्राकर्तिक उपमाएं ही रहेंगी ये यथार्थ सत्य है आपको आधुनिक कविता का अंदाज पसंद आया, इसके लिए आपका हार्दिक धन्यबाद यमुना जी !

vasudev tripathi के द्वारा
June 19, 2012

सचिन जी, बड़ी रोचक और वास्तविक कविता…!!!! ये सब तो सही में होने लगा है.. बस ये मेमोरी में डाटा टिकता नहीं.., बहुत जल्दी नया updated डाटा आ जाता है और और पुराना replace कर दिया जाता है.., कभी कभी को तो पुराने को वाइरस कह के जिल्लत के साथ डिलीट कर दिया जाता है…!!!! हम उम्मीद करते हैं आपकी रैम रॉम दोनों बढ़िया से स्थायी भाव के साथ काम करती रहेंगी.! :) ..साभार!

    allrounder के द्वारा
    June 19, 2012

    बहुत – बहुत धन्यबाद प्रिय भाई वासुदेव आपकी कामनाओं के लिए रैम और रोम दोनों की सलामती बरक़रार रखने के लिए ! ये सही है भैय्या की आजकल पेरिफेरल सस्ता होने की वजह से स्टोरेज डीवाईस बहुत बढ़ गई है किन्तु भाई ओरिजिनल डाटा को डिलीट करना अभी भी थोडा मुश्किल है :) आपका बहुत बहुत धन्यबाद !

div81 के द्वारा
June 19, 2012

एन्टी वाइरस जी, गली मुहल्लो छत चौबारे से निकल के प्यार इंटर नेट के महा जाल मे कहीं उलझ गया है | प्यार को अच्छे से प्रोटेक्ट कीजियेगा एक भी वाइरस रह गया तो सिस्टम प्रोब्लम करने लगेगा | मजेदार रचना सचिन जी पूरी रचना पढते हुए मुस्कुराती रही :) :)

    allrounder के द्वारा
    June 19, 2012

    नमस्कार दिव्या जी, प्यार को प्रोटेक्ट करने के लिए एंटी वायरस तो तैयार कर लिया है किन्तु इसकी सी डी चल नहीं रही है :) फिर भी कोशिश कर जारी रहेगी :) रचना पढ़कर आप मुस्कुराती रही ये जानकर बेहद प्रसन्नता हुई क्यूंकि किसी के चेहरे पर यदि अपनी लेखनी से एक हंसी बिखेर सके तो समझो लेखन सफल हुआ :) आपका हार्दिक धन्यबाद दिव्या जी !

R K KHURANA के द्वारा
June 19, 2012

प्रिय सचिन जी, अपने मन की मेमोरी मैं सेव तुझे रखूँगा तेरी यादों की पैन ड्राइव को दिल के पास रखूँगा बहुत ही मज़ेदार कविता ! बहुत सुंदर ! सारा कम्प्यूटर खोल कर रख दिया ! शाबाश ! राम कृष्ण खुराना

    allrounder के द्वारा
    June 19, 2012

    आदरणीय चाचाजी, रचना पर आशीर्वाद स्वरुप शाबाशी पाकर मन प्रसन्न हो गया आपका हार्दिक आभार !

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
June 19, 2012

तेरे दिल की हार्डडिस्क मैं और कोई न आये करे कोई कोशिश भी तो पासवर्ड इनवैलिड बतलाये गली मोहल्ले के वाइरस (आशिक) जो तुझ पर डोरे डालें एन्टी वाइरस सा मैं बनकर नाकाम कर दूँ सब चालें…… डाक्टर्स और नर्स सभी दांतों तले ऊँगली दबाएंगे जब ये बच्चे अपना राष्ट्रीय गीत औयें- औयें- नहीं याहू – याहू चिल्लायेंगे ….. याहू-याहू चिल्लायेंगे……….. सचिन भाई आनंद दाई उपर्युक्त पंक्तियाँ तो खूब भाईं ….सुन्दर सामंजस्य …मुबारक हो ..चौथी और पांचवीं पीढ़ी को अभी से जनने के लिए ..सुपर डुपर हो आप का पार्टनर और आप की ये कोशिश …जहां न पहुंचे रवि वहां पहुँच जाए आप का छक्का ….जय श्री राधे भ्रमर ५

    allrounder के द्वारा
    June 19, 2012

    नमस्कार सुरेन्द्र भ्रमर जी, काफी दिनों बाद आपकी वही उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार आपका ! आपको कम्पूटर की पिच पर कविता की ये इनिंग आपको मजेदार लगी इसके लिए बहुत – बहुत धन्यबाद !

sadhna srivastava के द्वारा
June 19, 2012

हा हा हा हा हा…….. अरे भगवान्…… एकदम सोलिड…… बहुत बढ़िया सचिन जी…… :) :)

    allrounder के द्वारा
    June 19, 2012

    नमस्कार साधना जी, लगता है आपने सिर्फ बोलने के लिए एकदम सोलिड लिख दिया वर्ना इतनी बड़ी कविता पर इतनी सी प्रतिक्रिया :) :) खैर आपका हार्दिक धन्यबाद :)

    sadhna srivastava के द्वारा
    June 20, 2012

    सचिन जी….. मैं तो इसे पढ़कर सिर्फ हँसे ही जा रही थी…… काश मैं तो हंसी यहाँ पर पेस्ट कर पाती…… :) :)

    sadhna srivastava के द्वारा
    June 20, 2012

    सचिन जी….. मैं तो इसे पढ़कर सिर्फ हँसे ही जा रही थी…… काश मैं वो हंसी यहाँ पर पेस्ट कर पाती…… :) :)

    allrounder के द्वारा
    June 20, 2012

    :) :) साधना जी अब मुझे विश्वास हो रहा है की आपको रचना सोलिड लगी वर्ना मेरी 5GB की रचना पर आपकी 1MB की प्रतिक्रिया पाकर मेरी हंसी नहीं रुक रही थी :) :) :)

    allrounder के द्वारा
    June 20, 2012

    :) और ये क्या साधना जी, आपके कम्पयूटर ने कोई स्कीम चलाई है क्या सेम कमेन्ट डबल एक के साथ एक फ्री है क्या :) :)

    sadhna srivastava के द्वारा
    June 20, 2012

    हा हा हा हा….. नहीं नहीं…….. पहले गलत टाइप किया था कोड submit कर दिया तब गलती नज़र आई…. तुरंत से प्रोसस्सिंग रोक कर कमेन्ट ठीक किया…फिर submit किया…… तो बाद में पता चला की ये तो एक पे एक फ्री हो गया…… :) :) और ऐसे कमेंट्स पे कमेंट्स पढ़ कर तो और हसी आ रही है…. जल्दी ही मेरे ऑफिस के लोग मुझे पागल करार दे देंगे….जो कंप्यूटर को देख कर हँसती है……. :) :)

    allrounder के द्वारा
    June 20, 2012

    :) :) कोई बात नहीं साधना जी, कभी – कभी जे जे की साईट भी हमसे मजाक करती है कभी तो एक कमेन्ट भी नहीं करने देती कभी एक के साथ एक और अब तो लग रहा है कई फ्री :) :) :) एक बार फिर से आपका हार्दिक धन्यवाद

    sadhna srivastava के द्वारा
    June 21, 2012

    चलिए सचिन जी अब बेस्ट ब्लॉगर की बधाई भी ले ही लीजिये….. मेरे पास मेल तो आ गया…… :) :)

    allrounder के द्वारा
    June 22, 2012

    नमस्कार साधना जी, अब तो मुझे भी लगने लगा है की रचना आपको सॉलिड लगी :) :) आपकी सर्वप्रथम 1MB की बधाई पर हमारी ओर से 5MB का हार्दिक आभार :) :)

vikramjitsingh के द्वारा
June 19, 2012

सचिन जी…..सप्रेम नमस्कार… आप भी कमाल हो….कभी कहते हो ”क्यूँ ना लिखूं?” और अब ये ”क्यूँ जाऊं रवि पर” अरे भाई….हम ने ना पहले रोका…..और ना अब टोक रहे हैं……ख़ैर…./// सुन्दर…मस्त…और रोंगटे खड़े कर देने वाली ‘मोडर्न कविता’ की बधाई लीजिये…..जनाब….

    allrounder के द्वारा
    June 19, 2012

    नमस्कार भाई विक्रम जी आपने सही कहा आपने कभी नहीं रोका न पहले न अब बल्कि प्रेम भरे उत्साहवर्धन से आगे ही बढाया है किन्तु क्या करे भाई आदत से मजबूर हैं, ये कमबख्त कवी हिरदय मानता ही नहीं क्यूँ ? क्यूँ किये बिना :)

akraktale के द्वारा
June 19, 2012

सचिन जी सादर नमस्कार, बहुत बढ़िया आधुनिक कविता. हार्दिक बधाई. एक जुलाई से पहले ही एस डी चेनल डिजिटल बन छाया है, हमने भी कवि सम्मलेन सुनाने डिजिटल सेटटॉप लगवाया है, बाग़ खटिया सब टूट गयी अब लो कंप्यूटर कवि जी आया है, मेघा और गीगा के याहू से बच्चों पर सुन्दर काव्य बनाया है, किन्तु बाद का झोंटा झीटा और बाईट का हाल नहीं सुनाया है.

    allrounder के द्वारा
    June 19, 2012

    जिस दिन आप डिजिटल सेट टॉप बॉक्स का दाम चुकायेंगे इसके आगे का एपिसोड भी तभी देख पायेंगे :) अशोक जी मजेदार पंक्तियों द्वारा प्रतिक्रिया मैं चार चाँद लगाने के लिए आपका हार्दिक धन्यबाद ! ऐसे ही चैनल की टी आर पी बढाते रहिये :)

चन्दन राय के द्वारा
June 19, 2012

सचिन जी , आपने तो नाम allroundar होने का पूरा पर्चे दे दिया ,बालिंग की ऐसी गूगली फैंकी ,की मन में विक्तो की झड़ी लग गई , कुल मिला के आल आउट हो गई मित्रवर ! बहु बढियां गुनगुना ले जरा फेसबुक सा फेस है तेरा, गूगल सी हैं आँखें एंटर करके सर्च करूँ तो बस मुझको ही ताकें रेडिफ जैसे लाल – गाल तेरे हौटमेल से होंठ बलखा के चलती है जब तू लगे जिगर पे चोट

    allrounder के द्वारा
    June 19, 2012

    नमस्कार मित्रवर, बड़ी ख़ुशी हुई की आपका परिचय हमारे इस आल राउंड प्रदर्शन से हो गया वर्ना भैय्या तुम तो हमें सिर्फ नाम का ही ????????????? समझ रहे होगे :) विकटों की इस झड़ी मैं प्रतिक्रिया की इस सुन्दर फुलझड़ी के लिए हार्दिक धन्यबाद :)

rajkamal के द्वारा
June 18, 2012

प्रिय सचिन भाई …… नमस्कारम ! चाहे कोई इनको जंगली कहे कहने को जी कहता रहे यह मियां बीवी प्यार के तुफानो में घिरे है यह क्या करे ?….. इनके बच्चे चिल्ला -२ कर कहते है याहू – याहू मजेदार रचना http://rpraturi.jagranjunction.com/2012/06/18/%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%80/ :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-? :-x :-) :-? :-x :-)

    allrounder के द्वारा
    June 19, 2012

    प्रिय प्रिय, सुप्रिया भाई राजकमल रचना पर अपनी पसंदगी की मोहर लगाकर उसे पूर्णता प्रदान करने के लिए हार्दिक आभार :) :) :) याहू……….. :)

alkargupta1 के द्वारा
June 18, 2012

वाह सचिन जी , इस कंप्यूटर के प्रत्येक भाग पर इतनी मनोरंजक कविता बहुत दिनों बाद आपकी यह व्यंग्यात्मक कविता पढ़कर बड़ा ही आनंद आया बहुत सुन्दर

    allrounder के द्वारा
    June 19, 2012

    आदरणीय अलका जी , आपको हमारा व्यंगात्मक प्रयास आनंददायक लगा, ये जानकर ह्रदय आनंदित हो गया :) आपका हार्दिक धन्यबाद अलका जी !

dineshaastik के द्वारा
June 18, 2012

प्रेमिका की चाँद से तुलना, लग  रही अब तो पुरानी है। नेट कम्प्यूटर  कि  तुलना में, देखिये दुनियाँ दिवानी है। बाग , नदिया और पर्वत की, अब कवि लिखने से डरते हैं, नेट कम्प्यूटर की भाषा  में, लिख  रहे लेखक  कहानी हैं। वक्त  जितना नेट को देते, बीबी को मिलता है चौथाई, प्रेयसी लगती है कम्प्यूटर , बीबी से ज्यादा सुहानी  है।

    allrounder के द्वारा
    June 19, 2012

    नमस्कार दिनेश जी, आपके अन्दर के रचनाकार से तो हमारा साक्षात्कार बहुत पहले हो चूका था, और आज आपने फिर से मेरी रचना को विस्तृत कर लग रहा है उसे आगे बढाया है इसके लिए आपका हार्दिक आभार ! आपकी दिलकश पंक्तियों के लिए !

minujha के द्वारा
June 18, 2012

कंप्यूटर और  इंटरनेट  की भाषा में लिखा गया ये प्रेमपत्र  आज के युवाओं के लिए गीता-रामायण  बनने वाला है सचिन जी….,आप अपने राईट्स  रिज़र्व   करवा लें,..बाद में ये मत कहिएगा किसी ने आगाह नहीं किया….,बहुत  सुंदर रचना

    allrounder के द्वारा
    June 19, 2012

    अरे अरे …. बस बस मीनू जी, आपने तो कुछ ज्यादा ही कर दिया :) गीता – रामायण …. सचमुच आपकी प्रतिक्रिया पाकर तो मैं कल्पनाओं से निकलकर सातवे आसमान पर न पहुँच जाऊं ! वैसे आपने कोपी राइट्स के लिए आगाह किया उसके लिए और इतनी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लीये हार्दिक आभार मीनू जी !

jlsingh के द्वारा
June 18, 2012

या ..आ …हू….. चाहे कोई मुझे सायबर कहे, चाहे कोई मुझे फाइबर कहे मैं नेटवर्क के परवाने बनू, चाहे कोई मुझे हाइपर कहे ! अगर आज शम्मी कपूर ( या सचिन जी पर) कोई गाना फिल्माया जाय तो कुछ ऐसा टोन निकलेगा?? वैसे तो सचिन जी बहुतों ने बहुत कुछ कह दिया ….. पर आपकी हमेशा कुछ अलग लिखने की सोच और उसे धरातल (मंच) पर उतरने की कला का मैं कायल हूँ ….. बहुत बहुत बधाई !

    allrounder के द्वारा
    June 19, 2012

    याहू…. याहू…… जे एल सिंह जी, आपकी इस जोश भरी प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक आभार ! आपने कुछ अलग लिखने की सोच को सराहा इससे आगे भी कुछ अनोखा करने का उतासह्वर्धन होता है आपका हार्दिक धन्यबाद !

roshni के द्वारा
June 18, 2012

सचिन जी , वाह बहुत खूब … अपने तो कविता कविता में कंप्यूटर का hardware और सॉफ्टवेर ही सिखा दिया … मजा आ गया आपकी ये कविता पढ़कर बहुत खूब बधाई

    allrounder के द्वारा
    June 19, 2012

    नमस्कार रौशनी जी, आपको कविता पसंद आई उसके लिए हार्दिक धन्यबाद ! वैसे तो आप भी एक कवियेत्री / शायरा / रचनाकार हैं , और अक्सर अपनी रचनाओं मैं छुरी , कटारी , चाक़ू का प्रयोग करती हैं, जिससे लगता है की आप बड़ी ही गंभीर किस्म की रचनाकार हैं और अक्सर आपकी रचनाये पढ़कर आपके फैन भ्रमित हो जाते हैं, तो क्यूँ न आप भी आज अपनी रचना के हथियार एक तरफ रखकर आने वाले समय मैं कम्पूटर पर ही कुछ लाइन प्रस्तुत करें, मेरी इस रचना को आगे बढ़ाते हुए :) मुझे लगता है आपके लिए हास्य की कुछ पंक्ति लिखना थोडा मुश्किल होगा बिना आपकी रचना के हथियार के :) फिर भी आप कोशिश करें तो कम्पूटर के पार्ट्स पर चार लाइन तो लिख ही सकती हैं ?????? :) आपका धन्यबाद रौशनी जी, प्रतिक्रिया के लिए !

    roshni के द्वारा
    June 20, 2012

    सचिन जी आपने तो हमे challenge ही कर दिया खैर चलिए आज आपके कहने पे छुरी , कटारी , चाक़ू धोखा वफ़ा साइड पे रखते है … और हास्य की चार line हम भी लिख देते है … उम्मीद है आपको पसंद आयेगी जीमेल सी महबूबा के देखते है ये खवाब जो पहले से ही गूगल जी की है हमराज कैसे शेयर करेगो डाटा कैसे होगा मेल आइकोन के डिब्बों की रुक जाएगी ये रेल नेटवर्क के जब सारे सिग्नल हो जायेगे फेल सचिन जी नेटवर्क हो जायगे जब फेल … रुक जायेगा वही पर देखना इश्क विश्क का खेल खाली विंडो होगी तब न होगा याहू न ईमेल याहू याहू करते बच्चे लेने चले जायेगे तेल तो आशा है की आपकी कविता के जवाब पे ये चार लाइन काफी होगी आभार

    allrounder के द्वारा
    June 20, 2012

    :) :) :) अरे रौशनी जी, मैंने तो आपको चार लाइन लिखने को कहा था बिना आपकी रचना के औजारों के किन्तु आपने तो कमाल ही कर दिया :) समझ आ गई मुझको आप भी बदलते समय के साथ साथ कविता कर सकती हैं :) आपका बेहद शुक्रिया इन अनमोल पंक्तियों के लिए ! आपकी प्रतिभा का ये रूप देखकर हम और भी मुरीद हो गए आपके :)

mayankkumar के द्वारा
June 18, 2012

भी आपने तो कमाल ही कर दिया ….. आप की रचनात्मकता का कायल हो गया हू हमारे ब्लॉग पे भी नज़र डालें …..

    allrounder के द्वारा
    June 19, 2012

    नमस्कार भाई जी, आपने हमारी रचना मैं कमाल देखा, हम भी आपके कायल हो गए, आगे भी हमारा ये सिलसिला जारी रहेगा ऐसी आशा है ! आपका हार्दिक धन्यबाद !

rita singh 'sarjana' के द्वारा
June 18, 2012

जहा पहुंचे न रवि वहा पहुंचे कवि को सार्थक करती यह व्यंग कविता पढ़कर बहुत अच्छा लगा , बहुत-२ बधाई सचिन जी

    allrounder के द्वारा
    June 19, 2012

    नमस्कार रीता जी, आपका हार्दिक धन्यबाद अपने अनमोल विचार देने के लिए !

yogi sarswat के द्वारा
June 18, 2012

तेरे रूप के मॉनिटर को बुझने कभी न दूँगा बनके तेरा UPS मैं निर्बाधित पावर दूँगा भेज रहा हूँ तुम्हे निमंत्रण फेसबुक पर आने का तोतों को मिलता है जहाँ मौका चोंच लड़ाने का सचिन जी , सादर नमस्कार ! आप रवि पर तो लेकर नहीं गए लेकिन कंप्यूटर में घुसा दिया ! पूरा का पूरा हुलिया और उसके हर पार्ट का उपयोग बता दिया ! वाह ! आपके जैसा UPS मिल जाए तो ज़रा मुझे भी इत्तला कर दीजियेगा , मैं भी निर्बाध पॉवर चाहता हूँ ! मज़ा आ गया सच में ! मस्त , बोले तो एकदम झक्कास !

    allrounder के द्वारा
    June 19, 2012

    नमस्कार भाई योगी जी, देखिये हमने पहले ही कहा है की हम वो कवि नहीं जिसकी पहुँच रवि तक हो, इसीलिए आप को कम्पूटर मैं घुमा डाला ! और भाई रूप के मॉनिटर को हमेशा चमकाने कल लिए प्यार का कॉलिन लगाया करो ! नित्य सवेरे उठके प्रेमिका / पत्नी को दो मीठे बोल सुनाया करो ! विश्वास करो उसका रूप सदा दमकता रहेगा, किसी निर्बाध पावर की आवश्यकता नहीं होगी :) उत्साहित करने वाली प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार आपका !

chaatak के द्वारा
June 18, 2012

भाई सचिन जी, इस माडर्न प्रेम की कविता को पढ़कर बड़ा आनंद आया| हास्य और व्यंग का इतना टेक्नीकल तड़का काफी दिनों बाद मंच पर नज़र आया| हार्दिक बधाई!

    allrounder के द्वारा
    June 19, 2012

    बहुत – बहुत धन्यबाद भाई चातक जी, आपको हमारे हास्य के तडके मैं टेक्नीकल मजबूती नजर आई उसके लिए आपका हार्दिक आभार, काफी दिनों बाद मंच पर एक साथ होने से एक अजीब सी सुखानुभूति हो रही है, इसे बनाये रखिये !


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