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Hanso Hansao Khoon Badhao

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क्यूँ न लिखूँ मैं ?

Posted On 1 Jun, 2012 Others में

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KNLM

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सुबह की पहली किरन, जब रौशनी की लालिमा बिखेरती है
कड़कती बिजलियों के साथ जब, घटाएं अम्बर को घेरती हैं
करता है सावन जब धरती का रूप श्रृंगार
तब सोचता हूँ क्यूँ न लिखूँ मैं ?

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दिल के किसी झरोखे से जब ख्याल कोई आता है
मन रुपी सागर मैं तब एक ज्वार सा उठाता है
ख्यालों के इस सागर मैं जब कलम मेरी पतवार है
तब सोचता हूँ क्यूँ न लिखूँ मैं ?

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खाली हाथों से ये दिल करता क्यूँ कल्पनाओं का व्यापार है
सुनहरी यादों की महक देती क्यूँ दस्तक दिल को बार-बार है
चाह कर भी टूटती नहीं, ये कैसी यादों की दीवार है
देखता हूँ जब लिखता हमारा पूरा जे जे परिवार है
तब सोचता हूँ क्यूँ न लिखूँ मैं ?

*************************************************

KNLM1

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52 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

allrounder के द्वारा
June 21, 2012

नमस्कार योगी जी, प्रोत्साहित करने के लिए हार्दिक आभार, प्रयास यही होगा की अपनी ओर से लेखन मैं कुछ योगदान कर सकूँ और आप सभी मंच के साथियों का स्नेह प्राप्त कर सकूँ !

yogi sarswat के द्वारा
June 18, 2012

चाह कर भी टूटती नहीं, ये कैसी यादों की दीवार है देखता हूँ जब लिखता हमारा पूरा जे जे परिवार है तब सोचता हूँ क्यूँ न लिखूँ मैं ? सचिन जी नमस्कार ! बहुत दिनों के बाद आपके दर्शन हुए हैं ! और फिर भी आप पूछ रहे हैं क्यों न लिखूं मैं ? आपके लेखनी इतनी खूबसूरत अल्फाजों को जन्म देती है तो निश्चित रूप से आप लिखिए , किसी और के लिए मेरे लिए अपने लिए और साहित्य के रसिययों के लिए ! बहुत सुन्दर रचना !

allrounder के द्वारा
June 10, 2012

नमस्कार मनु जी, प्रथमाग्मन और रचना की सराहना के लिए आपका हार्दिक धन्यबाद !

मनु (tosi) के द्वारा
June 10, 2012

वाह ! क्या खूब !!! आदरणीय सचिन जी उम्दा रचना … सादर !!!

minujha के द्वारा
June 10, 2012

सचिन जी नमस्कार यही सवाल तो हम सभी पूछे जा रहे थे आपसे पुनरआगमन  व अच्छी रचना दोनों की बधाई आपको.

    allrounder के द्वारा
    June 10, 2012

    नमस्कार मीनू जी, आपका बहुत बहुत धन्यबाद पुन: उत्साहवर्धन के लिए :)

Santosh Kumar के द्वारा
June 9, 2012

सचिन भाई जी ,.सादर नमस्कार प्यारी अभिव्यक्ति के साथ आपकी वापसी बहुत अच्छी लगी ,..हार्दिक स्वागत आपका (देर से आने के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ )…आपका यस दी चैनल पुनः धमाल मचाये और मंच रोशन हो यही कामना है ,…सादर आभार

    allrounder के द्वारा
    June 9, 2012

    नमस्कार प्रिय भाई संतोष जी, आपकी उपस्तिथि ही हमें संबल प्रदान करने के लिए काफी है, और फिर से कुछ अच्छा लिखने के लिए प्रेरित करती है आपकी कामनाओं के लिए ह्रदय से आभार !

mparveen के द्वारा
June 9, 2012

सचिन जी सही कहा आपने … अब जल्दी जल्दी शतक बनाइये … और लिखते रहिये …

    allrounder के द्वारा
    June 9, 2012

    नमस्कार प्रवीण जी, आपका बहुत – बहुत धन्यबाद ! चिंता मत कीजिये शतक भी लग ही जायेगा क्यूंकि सचिन तेंदुलकर और हमारे शतक मैं यही एक बहुत बड़ा अंतर है, यहाँ आउट होने के चांस नहीं होते तो शतक भी बन ही जायेगा :) आपका हार्दिक आभार प्रबीन जी !

yamunapathak के द्वारा
June 9, 2012

वाह!!!!!!!!!!! प्यारी सी भावाविव्यक्ति.

    allrounder के द्वारा
    June 9, 2012

    आपका बहुत – बहुत आभार यमुना जी …. प्रोत्साहन के लिए !

vasudev tripathi के द्वारा
June 5, 2012

सचिन भाई, fb पर लिंक से आपके लेख तक पहुंचा तो देखा आप सवाल कर रहे हैं क्यों न लिखूं.??? आप बिलकुल लिखिए.. आप ही इतने दिनों से फरार थे..!! सुन्दर कविता.. हार्दिक बधाई|

    allrounder के द्वारा
    June 6, 2012

    :) बहुत – बहुत धन्यबाद प्रिय भाई वासुदेव, चलिए आप कहीं से चलकर हम तक पहुंचे तो, और हमारे खुद के सवालों को हल करने मैं सहायक बने, आपके उत्तम विचारों के लिए हार्दिक आभार आपका !

akraktale के द्वारा
June 4, 2012

सचिन जी सादर, दिल के किसी झरोखे से जब ख्याल कोई आता है मन रुपी सागर मैं तब एक ज्वार सा उठाता है ख्यालों के इस सागर मैं जब कलम मेरी पतवार है तब सोचता हूँ क्यूँ न लिखूँ मैं ? आप इसी उहापोह में थे और हम आपके लिखने की प्रतीक्षा कर रहे थे. सावन हो या फागुन आप सदैव लिखें बादलों के लिए या फिर खुले गगन के लिए चाँद रात के लिए लिखें या फिर अमावस की अँधेरी रात पर आप तनिक भी ना सोचें की “क्या लिखूं मै?” बस लिखें अच्छा लिखें. जल्दी से अपने चेनल को HD टेकनालाजी में अपग्रेड करके पुनः प्रस्तुत करें. शुभकामनाएं.

    allrounder के द्वारा
    June 4, 2012

    नमस्कार अशोक जी, जब तक आप जैसे मंच के साथियों का साथ रहेगा तब तक निश्चित ही हमारा एस डी चैनल एच डी टेक्नोलोजी और आने वाली नई तकनीकों से अपग्रेड होता रहेगा ! आपका हार्दिक आभार सराहना और उत्साहवर्धन के लिए !

rahulpriyadarshi के द्वारा
June 3, 2012

नमस्कार,बेशक लिखिए,खूब लिखिए,यूँ ही मन को प्रफ्फुल्लित करते रहिये. अति उत्तम :)

    allrounder के द्वारा
    June 4, 2012

    नमस्कार भाई प्रियदर्शी जी, बेशक कुछ लिख कर मन प्रफुल्लित होता ही है, और ये प्रफुल्लन दोगुना हो जाता है जब साथियों की सराहना मिलती है ! :)

anoop pandey के द्वारा
June 2, 2012

आदरणीय सचिन जी लेखनी को बाँध देना कहाँ तक उचित है? विचारों के प्रवाह को लेखनी के भागीरथ का साथ मिल जाये तो कईयों के पाप धुल सकते हैं. अच्छी कविता हेतु बधाई.

    allrounder के द्वारा
    June 4, 2012

    नमस्कार अनूप पाण्डे जी, उचित अनुचित की व्याख्या बाद मैं करेंगे, आपके प्रथ्माग्मन और अनमोल विचार देने के लिए आपका हार्दिक आभार !

alkargupta1 के द्वारा
June 2, 2012

सचिन जी , बहुत ही लम्बे समय बाद आपको सुन्दर सी रचना के साथ मंच पर देख कर अति प्रसन्नता हुई….एक अच्छा लेखक तो अपने लेखन पर कभी विराम लगा ही नहीं सकता मुझे जहाँ तक याद आता है आपके लेखन मात्र से ही तो स्तरीय कविताओं को भी दैनिक जागरण में स्थान दिया जाने लगा इसमें आपका ही बहुत बड़ा योगदान था ……अब तो व्यंग्य प्रधान , विनोदप्रिय और भी बहुत सी रचनाएँ पढने को मिलती रहेंगी….. बहुत ही सुन्दर भावप्रधान रचना….. साभार

    allrounder के द्वारा
    June 4, 2012

    आदरणीया अलका जी सादर प्रणाम ! आपकी इतनी अच्छी प्रतिक्रिया पाकर सचमुच मंच से दूर रहने का दर्द और बढ़ जाता है :) जागरण मैं स्तरीय कविताओं को लगातार स्थान दिया जा रहा है यह बहुत ही प्रशंशनीय और प्रेरक बात है, इसके लिए जे जे संपादक मंडल और हमारे वे साथी जो लगातार अच्छा लिखते हैं बधाई के पात्र हैं, इसमें अपने जो मुझे श्रेय दिया है उसके लिए आपका कृतज्ञ हूँ, और मन मैं आत्मिक ख़ुशी है, की इसमें मैं भी अपना कुछ योगदान दे सका ! आपका हार्दिक आभार अलका जी, हौसलाफजाई के लिए !

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
June 2, 2012

मान्य भाई ऑल राउंडर जी, यथोचित ! आप ने लिखने के अछे वहाने ढूढ़ें हैं ( कड़कती बिजलिओं के साथ जब ,घटाएं अम्बर को घेरती हैं ,करता है सावन जब रूप श्रृंगार तब सोचता हूँ……….) वाह भाई वाह……. अत्युत्तम | हार्दिक आभार सह बधाई ! पुनश्च !

    allrounder के द्वारा
    June 4, 2012

    सादर नमस्कार, आचार्य विजय गुंजन जी, रचना पर आपके उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार आपका !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 2, 2012

तुम आ गए नूर आ गया है नहीं तो बे वजह जिन्दगी जी रहे थे चाहत ने सबकी तुझे खिला दिया है न जाने क्या गिला था हम सब से प्रदीप . लैला से मंजनू को मिला दिया है

    allrounder के द्वारा
    June 2, 2012

    :) नमस्कार आदरणीय प्रदीप जी, आपका हार्दिक आभार उत्साहवर्धन के लिए ! आपकी पंक्तियों के तो क्या कहने ,,,, इस बार इतना ही कहूँगा कि ” गिला रहा कभी न शिकवा किसी से, जिससे भी मिला ये दिल मिला ख़ुशी से यारों की बस्ती है ये अपना याराना है सभी से ” :) :) :) हार्दिक आभार आपका !

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 2, 2012

    ब्लोगर की दुनिया में सम्मानित हिंदी समाचार पत्र दैनिक जागरण में हिंदी कविता के छपने का प्रथम गौरव मुझे प्राप्त हुआ , आपके योगदान को कौन नकार सकता है. धन्यवाद.

    allrounder के द्वारा
    June 2, 2012

    सर ये आपका बडप्पन है, जो आप अपनी उपलब्धि मैं मेरे प्रयास का भी योगदान को मानते हैं, इससे बढ़ा ही फील गुड होता है की चलो भई अपने सम्मिलित प्रयासों से कुछ सार्थक नतीजा तो निकला ! :) आपका हार्दिक आभार इसे लिए !

sadhna srivastava के द्वारा
June 2, 2012

एक तो आप allrounder हैं…उसपर आपकी कविता इतनी खूबसूरत….. फिर क्यूँ न लिखें आप….. :) जी ज़रूर लिखिए….. :)

    allrounder के द्वारा
    June 2, 2012

    :) नमस्कार साधना जी, एक साथ कई प्रशंषाओं के लिए मेरे प्रिय नाम allrounder के लिए फिर मेरी कविता की खूबसूरती बयां करने के लिए, और अंत मैं लिखने की इजाजत और हौसला देने के लिए ! आपका हार्दिक आभार साधना जी :)

vikramjitsingh के द्वारा
June 2, 2012

आदरणीय सचिन जी….सादर…. बहुत अच्छा लिखते हैं आप…..फिर न लिखने का कारण…..???? कुछ समझ नहीं आया……????

    allrounder के द्वारा
    June 2, 2012

    नमस्कार विक्रमजीत सिंह जी, आपको हमारा लिखा अच्छा लगा, हमारी खुशकिस्मती ! न लिखने के कई कारण होते हैं, जो कभी – कभी मुझे खुद समझ नहीं आते फिर आपके लिए समझना सचमुच कठिन होगा :) :) :) ! उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार, ये सिलसिला आगे भी बनाये रखें !

R K KHURANA के द्वारा
June 2, 2012

प्रिय सचिन जी, बहुत सुंदर विचार ! एक लेखक के लिए तो लिखना ही जीवन होता है ! फिर प्रशंशा के दो बोल मिल जाय तो खाद का काम करते है ! अनच्छी रचना ! मेरा आशीर्वाद ! राम कृष्ण खुराना

    allrounder के द्वारा
    June 2, 2012

    आदरणीय खुराना साहब, काफी दिनों के बाद मंच पर फिर से लिखना का प्रयास किया, और उस पर आपका आशीर्वाद प्राप्त होना, अपने आप मैं एक सुखद अनुभूति है ! आपका हार्दिक आभार !

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
June 2, 2012

सचिन जी,मंच पर पुनर्वापसी पर स्वागत है.बहुत सुन्दर कविता लिखी है. तब सोचता हूँ क्यों न लिखूं मैं…… बहुत सुन्दर पंक्तियाँ.

    allrounder के द्वारा
    June 2, 2012

    नमस्कार राजीव जी, आपका हार्दिक आभार पुनः हौसला अफजाई के लिए !

jlsingh के द्वारा
June 2, 2012

आदरनीय सचिन जी, सादर अभिवादन! आपने तो कुछ हटकर लिख दिया! आपका S D चैनेल को न जाने कब से(होली के समय से) आगे बढ़ाने का प्रयास करता रहा हूँ! अभी भी तो मैंने बंद का आँखों देखा हाल आपके सहयोगी जैसा ही तो कर रहा हूँ! आप बीच बीच में अंतर्ध्यान हो जाते हैं. आप जब भी आते हैं सुखानुभूति लेकर आते हैं ….

    allrounder के द्वारा
    June 2, 2012

    आदरणीय जे एल सिंह जी ,,, आपकी इतनी अपनत्व भरी प्रतिक्रिया पाकर सचमुच बीच – बीच मैं अंतर्ध्यान हो जाने की दुखानुभुती बढ़ जाती है , किन्तु आप हमारे प्रिय चैनल एस डी को आज भी विस्तृत कर रहे हैं, ये जानकर आत्मिक सुखानुभूति हो रही है ….. आपका हार्दिक आभार जे एल सिंह जी !

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 2, 2012

    देखिये न सिंह साहब जी , इ चैनल के मालिक कितने भोले बन रहे है. अडवांस भी लिए दांव भी दिए. बड़ी मुश्किल से काली सूची से बचाए हैं . न माने तो होली अंक देख लें.

    allrounder के द्वारा
    June 2, 2012

    आप दोनों का बहुत – बहुत धन्यबाद सर काली सूची से बचाने का :)

June 2, 2012

जी, जरुर लिखिए……………आपको लिखने से भला कौन रोकेगा……………….! सुन्दर काव्य ……………………………………………………!

    allrounder के द्वारा
    June 2, 2012

    नमस्कार अलीन जी, ये हमारी खुश किस्मती है हम स्वतंत्र देश मैं पैदा हुए, जहाँ हमें विचारों की अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता है और जे जे जैसा मंच है, जो हमें अपने विचारों को व्यक्त करने का अवसर देता है फिर कौन रोक सकता है है हमें लिखने से ? :) :) काव्य आपको पसंद आया उसके लिए आपका हार्दिक आभार !

dineshaastik के द्वारा
June 2, 2012

आदरणीय  सचिन जी, नमस्कार। आपके पुनः आगमन  का स्वागत है। यहाँ आपकी कमी बहुत  ही खलती थी। आपकी व्यंग  रचनायें बहुत भाती थीं। अपने आगमन के बाद शायद मैंने आपकी कोई रचना  बिना पढ़े छोड़ी हो।  खाली हाथों से ये दिल करता क्यूँ कल्पनाओं का व्यापार है सुनहरी यादों की महक देती क्यूँ दस्तक दिल को बार-बार है चाह कर भी टूटती नहीं, ये कैसी यादों की दीवार है देखता हूँ जब लिखता हमारा पूरा जे जे परिवार है तब सोचता हूँ क्यूँ न लिखूँ मैं ? बहुत सुन्दर पंक्तियाँ….बधाई….

    allrounder के द्वारा
    June 2, 2012

    नमस्कार दिनेश जी, जानकर हार्दिक प्रसन्नता हुई की आपने मेरे जाने के बाद भी मुझे मेरी रचनाओं के जरिये याद रखा, इसके लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया, आपका उत्साहवर्धन पाकर प्रयास यही रहेगा की आगे भी हमारा तारतम्य यूँ ही बना रहे ! आपका हार्दिक आभार दिनेश जी !

चन्दन राय के द्वारा
June 1, 2012

श्रीमान , आपको पहली दफा पढ़ रहा हूँ , सुन्दर रचना हमे तो आपकी कलम निहायती गुनी लगती है ना लिक्जकर तो आप पाप के भागीदार बनेंगे तो लिखिए साहब

    allrounder के द्वारा
    June 2, 2012

    नमस्कार माननीय चन्दन राय जी, आपको हमारी लेखनी मैं कुछ गुण नजर आये, इसके लिए हार्दिक धन्यबाद आपका, आशा है आगे भी आप उत्साहवर्धन करते रहेंगे !

roshni के द्वारा
June 1, 2012

सचिन जी नमस्कार, तो अपने फिर से अपनी नयी पारी की शुरवात कर ली … स्वागतम है .. क्यों न लिखू मे.. बहुत ही बढ़िया रचना … खाली हाथों से ये दिल करता क्यूँ कल्पनाओं का व्यापार है सुनहरी यादों की महक देती क्यूँ दस्तक दिल को बार-बार है ख्यालों के इस सागर मैं जब कलम मेरी पतवार है तब सोचता हूँ क्यूँ न लिखूँ मैं ? बधाई इतनी सुंदर रचना के लिए आभार

    allrounder के द्वारा
    June 2, 2012

    नमस्कार रौशनी जी, चूँकि आप खुद इस मंच की बेहद प्रतिभाशाली कवियत्री हैं, और जब काफी दिनों बाद जब दोबारा लिखने का प्रयास किया उस पर आपकी उत्साहवर्धक उपस्तिथि पाकर आगे और लिखने का हौसला मिलता है ! आपका हार्दिक आभार रौशनी जी !

Rajkamal Sharma के द्वारा
June 1, 2012

प्रिय सचिन भाई ….. आदाब ! अपने भी लिखा और क्या खूब है लिखा मन गार्डन -२ हो गया इस अति सुन्दर रचना द्वारा “एक और वापसी” पर मुबारकबाद :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-? :-x :-) :-? :-x :-) :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-P :-? :-x :-) :evil: ;-) :-D :-o :-( :-D :evil: ;-) :-D :mrgreen: :-? :-x :-) : :roll: :oops: :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P

    allrounder के द्वारा
    June 2, 2012

    प्रिय राजकमल भाई , एक बार फिर से पुनर्वापसी पर आपके द्वारा गर्मजोशी से भरे उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार आपका ! :) :) :)

krishnashri के द्वारा
June 1, 2012

स्नेही allrounder जी सादर , बहुत दिनों के बाद आपका आगमन हुआ , वह भी एक सुन्दर कविता के साथ . स्वागत है .

    allrounder के द्वारा
    June 2, 2012

    माननीय कृष्नाश्री जी , आपका हार्दिक आभार उत्साहवर्धन के लिए !


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