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Hanso Hansao Khoon Badhao

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जागरण अखबार मैं देखें अपना ब्लॉग ?????

Posted On: 2 Jan, 2012 Others में

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पिछले दिनों जागरण जंक्सन पर एक ब्लॉग के शीर्षक ने मुझे आकर्षित किया, ब्लॉग का शीर्षक था “ जागरण अखबार मैं पढ़ें अपना ब्लॉग “ जिज्ञासावश इलेक्ट्रोनिक चूहे ( माउस ) की पूछ मडोरते हुए ब्लॉग पर क्लिक किया ! पढ़ना शुरू किया और पढता ही गया क्योंकि उसमे जे जे पर ब्लॉग लिखने वालों के लिए अच्छी खबर ये थी कि अब उनके ब्लॉग उनके अपने शहर के अखबार मैं प्रकाशित किये जायेंगे ! मन ही मन जागरण की इस अभूतपूर्व पहल को धन्यबाद दिया की चलिए अब हम जे जे पर अपने साथियों के चुनिन्दा और अच्छे ब्लोग्स को अखबार मैं देखेंगे, इस बात से उत्साहित होकर उसी दिन से आँख खुलते ही नजर सबसे पहले जागरण अखबार मैं विनिर्दिष्ट जगह सम्पादकीय के ठीक नीचे छपने वाले ब्लोग्स पर ठहरती जहाँ प्रतिदिन अपने मंच के ही दो साथियों के ब्लोग्स संक्षिप्त मैं उनके नाम और यूआरएल सहित प्रकाशित होते हैं, अखबार खोलने से पहले मन मैं एक रोमांच सा बना रहता है की आज किसको जे जे ने अच्छे ब्लोगर्स का दर्जा दिया है और अपने प्रतिष्ठित अखबार मैं उनका आलेख प्रकाशित किया है, पिछले लगभग दस दिनों से मेरा ये रूटीन सा बन गया है !

चूँकि हम भी जे जे पर थोडा बहुत लिखते चले आ रहे हैं और साथियों जबसे जे जे पर लिखने लगे हैं तब से हमारे साथ एक समस्या ये हो गई है कि जब भी कुछ पढ़ने बैठते हैं तो फिर उस पढ़े मैं से कुछ ऐसा खोजते है जिस पर कुछ लिखा जा सके, सो लेखक की स्वभावगत आदतानुसार मैं भी इस दरम्यान जागरण अखबार मैं प्रकाशित की समीक्षा करने बैठ गया, और अपनी समीक्षा करने के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि शायद जागरण अखबार मैं सारे के सारे वही लेख होते हैं जो की यथार्थ से जुड़े होते हैं, कल्पना वादी रचनाओं को अखबार मैं कोई जगह नहीं दी जा रही है, जबकि जागरण जंक्सन पर जो लेख होते हैं उनमे यथार्थ और कल्पना वादी दोनों लेखों को समान रूप से प्रकाशित किया जाता है ! अब आप मैं से बहुत से लोग मेरी यथार्थवादी लेख और कल्पनावादी लेख के वर्गीकरण से भ्रमित हो सकते हैं, तो ऐसे मैं ये जरुरी हो जाता है कि मेरे मन मैं इनकी क्या परिभाषा है उसको संक्षिप्त मैं व्याखित करूँ ! मेरे विचार से यथार्थवादी लेख वे होते हैं जो की राजनीतिक, सामाजिक और समसामयिक विषयों पर होते हैं जो कि देश और समाज की स्तिथि के अनुसार लिखे जाते हैं !

दूसरी ओर कल्पना वादी लेख वे होते हैं जिनमे यथार्थ मैं कुछ हुआ हो या न हुआ हो किन्तु जो हो सकता था, या हो सकता है उसकी कल्पना लेखक द्वारा की जाती हैं जिनमे मुख्य रूप से कविता और हास्य व्यंग प्रमुख है और हमारे इस मंच पर बहुत अच्छी – अच्छी कविता लिखने वाले साथी मौजूद हैं जो अपनी कल्पनाओ की उड़ानों से मंच को आन्दोलित करते रहते हैं, जिनमे मुख्य रूप से रौशनी धीर , वाहिद काशीवासी, डॉक्टर सूरज बाली, संदीप कौशिक जी जैसे साथी हैं जो अपनी रूमानी और गहरे अर्थ समझाती कविताओं से हम सबको आनंदित करते हैं, वहीँ अलका गुप्ता जी, सुमन दुबे जी, दिव्या कश्यप जी, अमिता श्रीवास्तव जी, रमेश बाजपेई जी भ्रमर जी, और शशिभूषण जी हैं, जो अपनी मिश्रित सामाजिक और देशभक्ति से पूर्ण रचनाओं से मंच पर ओज फैलाते रहते हैं, जिनकी रचनाओं को मंच पर सदा ही सराहा और प्रोत्साहित किया जाता रहा है !
इसके अलावा कल्पनाओं को एक अलग स्तर पर ले जाते हमारे मंच के सबसे लोकप्रिय साथी राजकमल जी हैं, जो इस मंच पर व्यंग को सदा जीवित रखते हैं ! संतोष सिंह जी, जिनका मूरख मंच का मंचन अपने आप मैं एक अलग ही लेखन की विद्या से हमें परिचित कराता है, अबोध बालक जी, जो भावना प्रधान मुद्दों को अपने लेखों के माध्यम से उठाते हैं, पर मुझे काफी आश्चर्य है की इन लोगों की कल्पनाओ को मंच पर तो पूर्ण प्रोत्साहन मिल रहा है और हमारे ये सभी साथी अपनी उत्कृष्ट रचनाओं के माध्यम से निरंतर जागरण जंक्सन के मंच को सुशोभित कर रहे हैं फिर ये मेरे कल्पनाशील साथी अपने नामों के साथ जागरण अखबार मैं मुझे क्यों नजर नहीं आये अब तक ?

यदि मेरी नजर से देखा जाए तो कल्पनावादी रचनाकार इस मंच पर ज्यादा महनत करता है, जो अपनी कल्पनाओं की उड़ान भरकर रचना का सृजन करता है और मंच को मौलिक रचनाएँ प्रदान करता है ! फिर ऐसी क्या वजह है की अखबार मैं मेरी नजर से अब तक कोई काव्यात्मक / सृजनात्मक रचना नहीं गुजरी ! बेशक जागरण जंक्सन ने नए और अस्थापित लेखकों के लिए जो मंच उपलब्ध कराया है वह अद्वितीय है, और इस मंच के लेखकों को देश के सबसे प्रतिष्ठित अखबार मैं स्थान देने के लिए वह बधाई का पात्र है ऐसे मैं निश्चित ही वे लोग प्रोत्साहित होंगे जिनके लेख निरंतर अखबार मैं छपते हैं किन्तु दूसरी ओर वे लोग काफी निरुत्साहित हो सकते हैं जिनके लेख सिर्फ इस बजह से स्थान न पा सकें क्योंकि वे राजनीतिक , विवादित नहीं हैं, बल्कि पूर्ण रूपेण मौलिक और सृजनात्मक है ! जो रचनाएँ वास्तविकता से परे कल्पनाओं पर आधारित हैं शायद और न जाने क्यों जागरण मंडल उचित सम्मान देने को ही तैयार नहीं है !

और अपनी ओर से काफी गहन समीक्षा करने के बाद मेरे मन मैं कुछ प्रश्न पैदा हुए जागरण की इस प्रोत्साहित करने वाली पहल के विषय मैं जिन्हें मैं जागरण जंक्सन / जागरण अखबार के माननीय संपादक मंडल के समक्ष इस विनम्र अनुरोध के साथ रखना चाहता हूँ, जिस पर यदि वे उचित समझे तो मेरे प्रश्नों और शंकाओं का समाधान करे ! साथ ही जागरण जंक्सन के जो भी साथी इन प्रश्नों को पढ़ें वे अपने विचार रखें !

क्या जागरण अखबार मैं वही लेख होते हैं जो की राजनीतिक हों ?
क्या जागरण अखबार मैं वही लेख होते हैं जो समसामायिक विषयों पर हों ?
क्या जागरण अखबार मैं वही लेख होते हैं जो ज्वलंत मुद्दों पर हों ?
क्या जागरण अखबार मैं वही लेख होते हैं जो आलोचनात्मक शैली मैं लिखे गए हों या जिनकी विषय – वस्तु विवादित हो ?

क्या जागरण संपादक मंडल की ये नीति है कि कल्पनाशीलता ( कविता / हास्य-व्यंग ) को अखबार मैं कोई स्थान नहीं दिया जायेगा ?
क्या हमारे कल्पनावादी साथियों की रचनाएँ इस स्तर की नहीं जिन्हें अन्य लेखों की तरह सम्मान दिया जाए ?
क्या सिर्फ राजनीतिक आलेख ही इस देश मैं क्रांति ला सकते हैं, समाज को दिशा दे सकते हैं, कविता नहीं ?

साथियों प्रश्न अभी और भी हैं मन मैं लेकिन वे फिर कभी !

अंत मैं यही कहना चाहूँगा की कवियों ने हर काल मैं अपनी रचनाओ से आम जन को प्रेरित किया है, और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी को प्रभावशाली ढंग से निभाया है ! ऐसा ही एक दृष्टान्त मुझे अपने काल के महान रचनाकार चंद बरदाई जी का याद आता है जब उन्होंने अपनी इन पंक्तियों से पृथ्वीराज चौहान जो कि युद्ध मैं अपनी ऑंखें गँवा चुके थे उन्हें उनके शत्रु मोहम्मद गौरी के बैठने का सही स्थान बता दिया था !
वे भी एक कवि थे और नमन है उनकी इन पंक्तियों और उनकी देश भक्ति को !

12 बांस, 24 गज अंगुल अष्ट प्रमान !!
ता ऊपर सुलतान है मत चूको चौहान !!

( जागरण मंच के मेरे समस्त साथियों को नव-वर्ष 2012 की हार्दिक शुभकामनायें ! )

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73 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rajkamal के द्वारा
January 16, 2012

प्रिय सचिन भाई ….. नमस्कारम ! इस विषय पर मैंने उस समय लेख लिखने की सोची थी जब आदरणीय निशा जी के उपर मेरे द्वारा लिखे गए लेख के विरुद्ध एक लेखिका ने यह कहा था की मेरे जैसे लेखकों के लेख आज तक जागरण में कभी भी प्रकाशित (अंश ) नहीं हुए …..(हालाँकि अब उस विषय पर निशा जी से खेद प्रकट करके मनमुटाव दूर कर लिया गया है )…. आपको हार्दिक बधाई की मेरी अभिलाषा पूर्ण हुई और जागरण जंक्शन ने आपके ब्लाग पर उत्तर दे दिया ….. अब इस बार मजाक नहीं करूँगा क्योंकि क्या पता पिछली बार की तरह ही आप इस बार भी गच्चा खा जाओ ! हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा मुबारकबाद सहित

    allrounder के द्वारा
    January 17, 2012

    नमस्कार राजकमल भाई, सबसे पहले तो बधाई आपको जो आपकी जो आपकी अभिलाषा पूर्ण हुई और माननीय जे जे ने ये विश्वास दिलाया है की जागरण की कोई नीति विशेष नहीं है जिससे की वह किसी विशेष प्रकार के लेखांश ही प्रकाशित करेगा, ये बहुत ही अच्छी बात है ! ये जानकर भी ख़ुशी हुई की निशा जी और आपके बीच का मनमुटाव ख़त्म हो गया ! जे जे मंच पर सबको अपने विचार रखने का सामान अधिकार है, और वैसे ही अन्य ब्लॉगर्स और पाठक को भी ये अधिकार है की वे आपके ब्लॉग्स पर अपने विचार दे अथवा न दे ! और हो सकता है उसके विचार आपके लेख से अलग हों, इसमें किसी को भी बुरा मानने की आवश्यकता नहीं है हम सब को मंच पर एक बात समझनी चाहिए की ये एक वैचारिक मंच है और हम सब यहाँ वैचारिक आदान – प्रदान के लिए ही लिखते और पढ़ते हैं ऐसे मैं मतभेद होना स्वाभाविक है, किन्तु मतभेद की बजह से मनभेद नहीं होना चाहिए ! एक बार आपका फिर से हार्दिक आभार !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
January 16, 2012

आदरणीय ऑलराउंडर जी, सादर अभिवादन. निश्चित तौर पर जे जे ब्लॉग और सम्मानित मेरा समाचार पत्र दैनिक जागरण में स्थान पाना मेरे लिए तो गौरव की ही बात है. जीवन के अंतिम काल में पहली बार स्थान मिला और सम्मान. अब तक केवल सम्मान ही मिलता रहा स्थान नहीं. आप दोनों का अगर में शुक्रिया न करूं तो कृतघ्नता होगी. वैसे मैंने अपने जीवन काल में किसी को धन्यवाद नहीं दिया क्यों कि मैंने उसका आभार जीवन भर संजो के रखा. थैंक्स कह के तत्काल हिसाब नहीं चुकता किया. अपने सम्मान से ज्यादा मुझे अपने जागरण परिवार के सम्मान एवं उनके गौरव पूर्ण इतिहास एवं वर्तमान एवं भविष्य का सम्मान प्यारा है . न तो में लेखक हूँ न कवि, न ही साहित्यकार. वादा किया था योगदान करते समय कि अच्छा देने का प्रयास करूंगा. ये तो आप बगैर लाग लपेट के तै करेंगे कि मेरा स्तर क्या है. तुम भी सितारा बन जाओ कि पीड़ा नहीं निकल पा रही है. समय के साथ मिट जाए शायद. कविता हमने अपने मित्रों, परिवार में बाँट दी है कि अपने बच्चों को पढ़ायें. प्रेरणा मिलेगी. जब आप बताएँगे कि नाना या बाबा जो भी सम्बन्ध निकले ने लिखी थी केवल तुम्हारे लिए. स्वभाव के विपरीत धन्यवाद आप सभी का. पर एहसान नहीं भूलूंगा आजीवन ये मेरा वादा है.

    allrounder के द्वारा
    January 17, 2012

    सादर नमस्कार प्रदीप जी, आपकी बातों से भारी प्रसन्नता और दिली सुकून छलक रहा है ऐसा मेरा विचार है, जो की बहुत ही अच्छी बात है हम सब यहाँ जे जे पर अपने विचार रखते हैं अपनी ख़ुशी के लिए और लेखन से मन को काफी सुकून मिलता है ! और जे जे ऐसा मंच है जिसने एक ऐसा वैश्विक मंच हमें प्रदान किया है जहाँ हम अपनी बात किसी भी तरह से कह सकते हैं, आपने इतना सम्मान दिया उसके लिए आपका हार्दिक आभार ! आपके लिए यही शुभकामना है की आप अच्छा और अच्छा लिखते रहें और मंच को अपनी कलम से सुशोभित करते रहें ! धन्यबाद आपका !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
January 16, 2012

आदरणीय ऑलराउंडर जी, सादर अभिवादन. आपका प्रयास सराहनीय रहा. कविता को भी सम्मान मिला, उचित स्थान मिला. तुम भी सितारा बन जाओ (नन्ही दुनिया) के लिए लिखा. बेचारी गुमनामी में खो गई. नन्ही दुनिया के लिए फिर से रचना जरूर ब्लॉग करूंगा. हश्र उसका चाहें जो भी हो. आपका धन्यवाद. आवाज उठाने के लिए.

    allrounder के द्वारा
    January 16, 2012

    आदरणीय प्रदीप जी सादर प्रणाम, आपका हार्दिक आभार उत्साह वर्धन करने के लिए ! और आपका हार्दिक धन्यबाद उस रचना “भारत का भविष्य बनाओ ” के लिए जिसने जे जे का लंबा संयोग तोडा और इस लेख के बाद जागरण मैं छपने वाली वह पहली काव्य रचना थी जिसने मेरी नजरों और मन को काफी सुकून दिया कि चलिए हम अपनी बात कहने मैं सफल हुए ! आपका हार्दिक आभार आपके अनमोल विचारों के लिए और हार्दिक शुभकामनाये अच्छे लेखन के लिए !

JJ Blog के द्वारा
January 11, 2012

आदरणीय ऑलराउंडर जी, जागरण जंक्शन मंच ने कभी भी अपनी नीति के अंतर्गत इस बात को नहीं जाहिर किया कि दैनिक जागरण संपादकीय पृष्ठ पर किस कैटगरी की ब्लॉग रचनाएं प्रकाशित की जाएंगी. सामान्यतः किसी भी श्रेणी की कोई भी उत्कृष्ट रचना प्रकाशित हो सकती है. ये मात्र संयोग की बात है कि जब से आपने इस विशेष खंड को देखना आरंभ किया तो आपको केवल सामाजिक-राजनैतिक या समसामयिक विषय ही प्रकाशित होते दिखाई पड़े. किंतु फिर भी इस ओर ध्यानाकर्षित करने के लिए आभार. भविष्य में भी काव्य या व्यंग्य जैसी श्रेणी की रचनाएं दैनिक जागरण संपादकीय पृष्ठ पर सुशोभित होती रहेंगी. जागरण जंक्शन पर ब्लॉगिंग के लिए आपका आभार. धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार

    allrounder के द्वारा
    January 11, 2012

    माननीय जागरण जंक्सन परिवार को मेरी ओर से हार्दिक आभार जो, न सिर्फ मेरी शंकाओं का समाधान किया अपितु तत्काल ही इस ओर ध्यान देकर हमारे मंच के कल्प्नावादी साथियों की रचनाओ को स्थान भी दिया ! और आपकी ये बात पढ़कर अत्यधिक प्रसन्नता हुई की जबसे मैंने अखबार का वह विशेष खंड देखना आरंभ किया था जहाँ जे जे मंच के साथियों के ब्लोगांश प्रकाशित होते हैं वहां किसी भी काव्यात्मक / सृजनात्मक रचना को न पाना एक संयोग मात्र था, जागरण की कोई नीति नहीं ! क्योंकि संयोग कभी न कभी ख़त्म होते हैं किन्तु यदि कोई नीति बना ली जाए तो उसे प्रभावित करना न ही हमारे वश मैं है न ही हमारा मंतव्य है ! मुझे सही – सही अंदाजा नहीं किन्तु जे जे पर प्रतिदिन 100 से ज्यादा ब्लॉग पोस्ट किये जाते हैं ऐसे मैं किन्ही 2 ब्लोग्स का चुनाव अपने आप मैं काफी मुश्किल है ये बात मैं भली भांति समझता हूँ, इसलिए मैंने लगातार 10 दिनों तक इस बात पर गौर किया, और उसके बाद भी लेख लिखने से पहले एक बार फिर से वह अखबार एकत्र कर उनका अवलोकन किया ! तब मुझे यह संयोग थोडा अजीब लगा और प्रश्न उठे की कहीं ये संयोग इतना लम्बा न हो जाए की ये एक प्रथा बन जाए और ये प्रथा किसी ऐसी नीति का रूप ले ले जिससे इस मंच की एक विद्या विशेष प्रभावित हो ! अत अपने मन मैं उत्पन्न शंकाओं / प्रश्नों को आलेख का रूप दिया, मैं इस आलेख के माध्यम से सिर्फ यही कहना चाहता था की प्रकाशन से पहले रचना / आलेख की गुणवत्ता देखी जाए न की उसका विषय या ब्लोगर का नाम ! और मंच के और साथियों के विचारों के संबल से इस आलेख के सकारात्मक परिणाम निकले यह सबसे उज्जवल पहलू रहा ! मैं पूरी जागरण जंक्सन परिवार का ह्रदय से आभारी हूँ जो उन्होंने इस ओर पूरी तत्परता से ध्यान दिया ! आशा है आगे भी मंच पर आने वाली किन्ही भी समस्याओं का निदान यों ही होता रहेगा और मंच और मंच पर लिखने वालों का विश्वास एक दूसरे के प्रति यों ही बरक़रार रहेगा ! समस्त जागरण परिवार को मेरी ओर से नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !

Nikhil के द्वारा
January 11, 2012

aapka jawab nahin bade bhai. kaafi khubsurati se saral shabdon me apni baaton ko manch par rakhana koi aapse seekhe.

    allrounder के द्वारा
    January 11, 2012

    प्रिय भाई जवाव तो आपका भी नहीं है अपने बड़े भाई का प्रोत्साहन बढाने मैं, लेकिन भाई ये क्या है कविता तो आप हिंदी मैं लिख रहे हो और प्रतिक्रिया इंग्लिश मैं ? आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये वर्ष भर ऐसे ही सुन्दर रचनाओ का सृजन करते रहो और मंच को सुशोभित करते रहो !

Charchit Chittransh के द्वारा
January 11, 2012

आपकोउचित प्रश्न उठाने एवं जे जे को, आलोचना को सकारात्मक लेने हेतु, साधुवाद !

    allrounder के द्वारा
    January 11, 2012

    नमस्कार श्रीमान जी, आपका हार्दिक आभार अपने उत्तम विचार पोस्ट पर रखने के लिए !

January 10, 2012

एक श्रेष्ठ प्रयास हेतु आपको बधाई. और उसमे विजयी होने हेतु और भी बधाई..! आपको यह जानकार और भी प्रसन्नता होगी, की कल मेरे लेख की कुछ पंक्तियाँ छपी थी वहाँ, जिनसे प्रभावित होकर मेरी एक सखी ने भी आज एक कविता गढ़ी है. सुन्दर हो रही है ये दुनिया..!

    allrounder के द्वारा
    January 11, 2012

    नमस्कार टिम्सी जी, नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये आपको ! आपके प्रकाशित लेख को जागरण मैं मैंने भी देखा था, और इससे पहले भी मैंने आपका एक लेख जो की जागरण मैं प्रकाशित हुआ था देखा था और जब भी मंच के किसी भी साथी का लेख देखता हूँ तो प्रसन्नता होती है ! हालांकि मेरे लिए ये तय करना काफी मुश्किल है की आप कल्प्नावादी लेखिका है या यथार्थवादी क्योंकि आप इतनी कुशलता से अपने लेख लिखती हैं जो की कल्पनाओं से शुरू होकर यथार्थ पर समाप्त होते हैं, फिर भी आपने हमारे प्रयास को सराहा उसके लिए आपका हार्दिक आभार ! साथ ही ये जानकर और भी प्रसन्नता हुई की आपकी सखी ने भी एक रचना गढ़ी, यदि उन्होंने इसे जे जे पर पोस्ट की है तो कृपया उस पोस्ट का नाम बताने का कष्ट करें ताकि हम भी हमारे एक और कल्प्नावादी साथी का स्वागत कर सकें ! एक बार फिर से आपका हार्दिक आभार !

roshni के द्वारा
January 10, 2012

सचिन जी , बधाई हो जागरण वालों ने अब कवित्यों को भी अख़बार में जगह दे दी है और ये सब आप के लेख कारन संभव हुआ है .. आप ने जिस तरह से ये आलेख लिख कर जागरण वालों का ध्यान इस और दिलाया और सब जागरण साथियों ने इसका समर्थन किया उसी के कारन आज दुसरे ब्लोगेर्स भी इस अख़बार में आ सकते है … और मेरी और से विशेष शुक्रिया क्युकी मेरी कविता तारों का कारोबार को भी जागरण ने अपने देखिये ब्लॉग में जगह दी इसके लिए जागरण और आपका बहुत बहुत आभार…

    allrounder के द्वारा
    January 10, 2012

    आपका बहुत – बहुत आभार रौशनी जी एक बार फिर से प्रोत्साहन करने के लिए !

rudra के द्वारा
January 9, 2012

हार्दिक बधाई स्वीकार करें . चलो जज ब्लोग्स के संपादन मंडल के लोग कांग्रेस की तरह नहीं निकले . आपका जन ब्लॉग बिल तुरंर पास हो गया :)

    allrounder के द्वारा
    January 9, 2012

    नमस्कार भाई रूद्र बधाई के पात्र आप भी हैं आपका हार्दिक आभार आलेख को बल देने के लिए और विशेष धन्यबाद इस ब्लॉग को जन ब्लॉग बिल नाम देने के लिए ! और जे जे भी इस बात के लिए प्रशंशा का पात्र है जो उन्होंने इन सुझावों को अमल करने मैं कोंग्रेस जैसी हठधर्मिता नहीं दिखाई ! एक बार फिर से आपका हार्दिक आभार !

Alka Gupta के द्वारा
January 9, 2012

सचिन जी , मेरा विश्वास भी सफल हुआ और आपके सुझावों पर जागरण ने तवरित ही पहल करनी शुरू कर दी है हार्दिक बधाई स्वीकार करें !

    alkargupta1 के द्वारा
    January 9, 2012

    कृपया ‘ तवरित’ को त्वरित पढ़ें

    allrounder के द्वारा
    January 9, 2012

    सादर नमस्कार अलका जी, बिलकुल सही कहा आपने आपका विश्वाश सफल हुआ और आप सबके कीमती विचारों को मद्देनजर रखते हुए जागरण ने इस लेख के सुझावों पर त्वरित रूप से अमल किया, जिसके लिए जागरण जंक्सन और आप सभी मंच के साथी बधाई के पात्र हैं एक बार फिर से आपका हार्दिक आभार अलका जी, जो आपने अपने विचारों से आलेख को संबल प्रदान किया !

Rajkamal Sharma के द्वारा
January 8, 2012

प्रिय सचिन भाई …… नमस्कारम ! जागरण के होम पेज पर आपकी प्रतिकिर्या से आपके इस लेख की बाबत पता चला ….. *मेरे मन में भी इस बारे में एकाध बार ही विचार उठा था लेकिन फिर दूसरे झमेलों में पड़ कर भूल गया *आपका हार्दिक धन्यवाद की आपने अपने इस लेख में ना केवल इस अहम मुद्दे लों उठाया बल्कि उसमे काफी ज्यादा (जरूरत से ज्यादा ) जगह देकर मुझको भी नवाजा *एक बार मैंने आपका जिक्र मैंने लेख में किया था (वोह भी आपके द्वारा लेख में सुधार के लिए कहने पर ) उसके बदले में आपने लिख कर अपना खुद का कर्ज तो चुका दिया है लेकिन मुझ पर कभी ना उतारने योग्य कर्ज चढ़ा दिया है अब मैं गर्व से कह सकता हूँ की “प्रिय सचिन भाई मैं आजीवन आपका कर्जदार रहूँगा – हा हा हा हा हा हा” *इतनी जल्दी तो भगवान भी नहीं सुनता भाई जितनी जल्दी की आपने मेरी अनकही करुण पुकार सुन ली है ….. *यह जान कर मन को हर्ष हुआ की जागरण ने आपके अनमोल सुझावों पर अम्ल करना शुरू कर दिया है मेरी तरफ से भी इस जंग को जीतने के लिए जागरण के इस अकेले अन्ना को मेरा सलाम ! लेकिन एक मलाल रह गया की आपके इस ब्लॉग पर जागरण को कुछ स्प्श्तिक्र्ण जरूर देना चाहिए था ….. फिर भी देर आयद दुरुस्त आयद खुशी की बात है की सुबह का भुला हुआ शाम से पहले ही (दोपहर ) को घर वापिस आ गया है फिर से ढेरों बधाईया ढ़ेरो हार्दिक आभार सहित *मुबारकबाद (आठ दिन पुराने) नए साल की

    allrounder के द्वारा
    January 8, 2012

    नमस्कारम राजकमल भाई, ” कहाँ थे आप जमाने के बाद आये हैं, पर फिर भी बहार जाने के पहले आये हैं ” आपको भी नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें ! भाई आपकी प्रतिक्रिया भी यथार्थवादी न होकर कल्प्नावादी होती है और इस प्रतिक्रिया के जरिये हौसला अफजाई करने के लिए हार्दिक शुक्रिया ! और आपने बिलकुल मेरे मन की बात कही की यदि जे जे की और से इस पर कोई प्रतिक्रिया आती तो बहुत अच्छा होता, किन्तु कोई बात नहीं उन्होंने सुझावों पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है न की जवाव देना ! अब एक बात का जवाव आपसे चाहूँगा की जैसा आपने खुद ही कहा की आपका ध्यान भी इस ओर गया था और देर सवेर आप इस पर जरुर लिखते, तो क्या आपके लेख मैं मेरा नाम नहीं होता ( भले ही जरुरत से थोडा कम होता ) पर होता फिर आपने ये कर्जदार वाली बात कहकर मजा किरकिरा कर दिया ! भाई मैंने जो महसूस किया वही लिखा है न जरुरत से ज्यादा न जरुरत से कम और भाई इस मंच पर जब भी कल्प्नावादी ( मेरी परिभाषानुसार ) लेखकों की बात आएगी तो मैं नींद मैं उठकर भी आपका नाम अवश्य लिखूंगा , बिना लेजर देखे की किसका क्या कर्ज चुकाना है ! इसलिए भाई ये कर्जा वर्जा छोडो और कुछ धमाल करो भाई ! एक बार फिर से nay वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये आपको !

sadhana thakur के द्वारा
January 8, 2012

बहुत अच्छी बात लिखी आपने ,आपका शुक्रियाआपका की आपने एक नई पहल की .बहुत -बहुत धन्यवाद् आपका ……

    allrounder के द्वारा
    January 8, 2012

    सादर नमस्कार साधना जी, आपको नव वर्ष की बहुत – बहुत शुभकामनाये साथ ही प्रयास की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार !

वाहिद काशीवासी के द्वारा
January 8, 2012

आपका बहुत शुक्रिया सचिन भाई … जागरण ने आपके सुझाव पर तुरंत ही अमल शुरू कर दिया… बधाईयां..

    allrounder के द्वारा
    January 8, 2012

    नव वर्ष की आपको हार्दिक शुभकामनाये और आपका हार्दिक शुक्रिया वाहिद भाई अपने विचार देने के लिए और जागरण की इस पहल के लिए उनका भी हार्दिक शुक्रिया, और मंच के सभी साथियों को बधाइयाँ, जो अपनी कल्पनाओं को लेखनी से उतारकर इस मंच को सदा सुशोभित रखते हैं !

January 7, 2012

आदरणीय सचिन जी, सबसे पहले सादर नमस्कार….फिर नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ….और इसके बाद माफी भी चाहूँगा कि आपके आलेख पर देर से प्रतिक्रिया दे रहा हूँ । दरअसल इन दिनों परीक्षाओं के कारण कुछ व्यस्त हो गया था सो मंच पर नहीं आ पाया । आपने बहुत अच्छा विषय उठाया और अच्छी बात यह रही कि माननीय जे जे टीम ने इस पर सरहनीय एवं त्वरित कदम भी उठाया है । इसके लिए निश्चय ही आप बधाई के एवं जे जे टीम हार्दिक आभार के पात्र हैं । . * * * * * * * * * * * * * * * . इन दिनों मैं जब भी किसी माननीय ब्लॉगर की किसी भी रचना पर अपने विचार रखता हूँ तो वह उस ब्लॉगर के अकाउंट की “स्पैम” श्रेणी में चली जाती है । इस विषय पर मैंने जे जे पुनर्निवेश पर भी लिखा, कुछ माननीय ब्लॉगर के ब्लॉग पर प्रतिक्रिया-स्वरूप भी लिखा, जे जे के आधिकारिक ब्लॉग पर भी लिखा एवं अंत में अपने ब्लॉग पर भी एक पोस्ट इसके बारे में लिखी लेकिन कोई समाधान नहीं निकाला गया । थोड़े दिन बाद ‘जे जे फीडबैक’ की ओर से एक मेल आई जिसमे इस समस्या को दूर करने के लिए मेरे ब्लॉग अकाउंट का पासवर्ड मांगा गया था जो मैंने उपलब्ध करा दिया था लेकिन अब भी समस्या जस की तस है । इसलिए आपसे एक गुज़ारिश करना चाहूँगा कि आप इस बारे में अपने ‘फुल्ली फालतू’ चैनल के माध्यम से ‘जे जे’ तक इस बात को पहुंचाएँ तो शायद इसका कुछ हल निकले और इस नादान+अंजान को होने वाली असुविधा कुछ कम हो !! ;) सादर आभार !!

    allrounder के द्वारा
    January 8, 2012

    नमस्कार भाई संदीप, आपको नव वर्ष और आपको परीक्षा के लिए शुभकामनायें ! आलेख पर अपने विचार देने के लिए आपका हार्दिक धन्यबाद, आपने सही कहा की जे जे ने इन शंकाओं का तुरंत निदान किया ये सबसे अच्छी बात रही ! रही बात आपकी समस्या की तो भाई हमारे फुल्ली फालतू चैनल ने भी आपकी इस समस्या को नोट किया है और आपके अनुरोध को मद्देनजर रखते हुए हम अवश्य ही इस समस्या को आगे रखेंगे और आशा करेंगे की आपकी स्पेम वाली समस्या का भी निदान निकले ! एक बार फिर से आपका हार्दिक आभार !

allrounder के द्वारा
January 7, 2012

माननीय जे जे / जागरण अखबार संपादन मंडल को मैं तहे दिल से धन्यबाद करना चाहूँगा जो उन्होंने मेरे इस लेख मैं उठाये गए प्रश्नों / शंकाओं का निदान, का त्वरित निदान किया और अपने प्रतिष्ठित दैनिक जागरण अखबार मैं लगातार दूसरे दिन भी एक काव्य रचना को स्थान दिया ! और मेरी शंका का समाधान किया की आखिर काव्यात्मक रचनाओं की अब तक शून्यता क्यों है क्यों उन्हें प्रकाशित नहीं किया जाता ! इसके साथ ही मैं उन सभी साथियों का भी आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने इस लेख पर अपने बहुमूल्य विचार / सुझाव रखे जिससे जागरण संपादन मंडल का ध्यान इस और आकर्षित हुआ !

Amita Srivastava के द्वारा
January 7, 2012

सचिन जी बधाई , आपके अनुरोध पर स्वीकृति हो गई है ,इसके लिए आप व जे जे सम्पादन मंडल को बहुत -२ धन्यवाद

    allrounder के द्वारा
    January 7, 2012

    नमस्कार अमिता जी, आपका हार्दिक धन्यबाद आपने बिलकुल सही फ़रमाया लगता है जे जे संपादन मंडल ने इस आलेख और उस पर आप सभी रचनातक साथियों के विचारों को मान्यता दे दी है और आज लगातार दूसरे दिन भी जागरण अख़बार मैं एक काव्यात्मक रचना जो की रौशनी धीर जी की तारों का कारोबार है उसे प्रकाशित किया गया है इसके लिए आप सभी बधाई के पात्र हैं !

Dharmesh Tiwari के द्वारा
January 6, 2012

आदरणीय सचिन भाई जी सादर प्रणाम,,,,,,,,,,,,,,,निश्चित ही आपके द्वारा इस लेख में दिए गए सुझाओं पर जागरण टीम को विचार करना चाहिए,,,,,,,,,,,,,,धन्यवाद!

    allrounder के द्वारा
    January 6, 2012

    प्रणाम धर्मेश जी, आपके साथ – साथ हमें भी यही आशा है की जल्द ही जागरण टीम इन सुझावों / विचारो पर ध्यान देगी ! आपका हार्दिक आभार अपने विचार यहाँ रखने के लिए !

rudra के द्वारा
January 5, 2012

देर से कमेन्ट देने के लिए चमप्रर्थी हूँ. लेकिन आपने सही फ़रमाया है. जागरण वालों को दुसरे विषयों के लेख/ ब्लोग्स भी छपने चाहिए.

    allrounder के द्वारा
    January 6, 2012

    बहुत – बहुत धन्यबाद आपका आलेख पर विचार देने के लिए देरी जल्दी तो मंच पर चलती रहती है महत्तवपूर्ण बात ये है की आपने लेख का समर्थन किया इसके लिया आपका हार्दिक आभार भाई रूद्र जी !

abodhbaalak के द्वारा
January 4, 2012

हुज़ूर आपने तो बहुत सरे दिलो की आरजू ओं को ………… वैसे मुझे भी अपने लेख में याद रखने के लिए शुक्रगुजार हूँ, और उम्मीद करता हूँ की आगे भी आप इस नाचीज़ को ……….. उर्दू कैसी है ? :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    div81 के द्वारा
    January 5, 2012

    उम्दा उर्दू का मुज़ाहिरा पेश किया अबोध जी …………… :)

    allrounder के द्वारा
    January 5, 2012

    आदाब हुजुर, हमारी तो नहीं मालूम पर आपने जुरूर हमारी आरजू पूरी कर दी अपने बेश कीमती अल्फाज न चीज की खिदमद मैं पेश करके ! आप सदा ही हमारे लखते जिगर रहे हैं सो जब भी डूबेंगे साथ ही डूबेंगे हुजुर ! जर्रा नवाजी के लिए शुक्रिया !

    allrounder के द्वारा
    January 5, 2012

    अबोध मियां अब तो मोहतर्मा दिव्या जी ने भी आपकी उर्दू को खालिश करार दे दिया ! आप दोनों का ही दिली शुक्रिया !

dineshaastik के द्वारा
January 4, 2012

सचिन जी सादर नमस्कार, नये वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें, आपने जो प्रश्न उठाये हैं वे संभवतः हमारी दृष्टि में तो उचित हो, लेकिन शायद उनकी दृष्टि से ऐसा कर सकना संभव न हो। मेरी दृष्टि में तो यह मंच भी कोई छोटा मंच नहीं है। किन्तु फिर भी आपका आलेख विचारणीय है।

    allrounder के द्वारा
    January 5, 2012

    दिनेश जी, आपको भी नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये, आपकी बात से मैं सहमत हूँ की ये मंच भी काफी व्यापी है, पर मेरे मन मैं सिर्फ यही तो जिज्ञासा है कि जब अन्य लेख प्रकाशित हो सकते हैं तो फिर काव्यात्मक / रचनात्मक / सृजनात्मक / रचनाओ को क्यों इनसे दूर रखा जा रहा है क्या ये सिर्फ इत्तेफाक है या सचमुच ऐसा है ? अपने अनमोल विचार देने के लिए हार्दिक आभार आपका !

shashibhushan1959 के द्वारा
January 3, 2012

मान्यवर सचिन जी, सादर ! बात तो बहुत अच्छी है और सबके मन की है, ऐसा हो तो बहुत ही प्रेरणादायक होगा ! इससे रचनात्मक क्षमता में निखार लाने के लिए सभी लोग और मंथन करेंगे, और रचनाओं का स्वरुप और भी कई गुना बेहतर हो जाएगा. एक नेक विचार प्रस्तुत करने के लिए आपको कोटिशः बधाई, नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये !!

    allrounder के द्वारा
    January 5, 2012

    आपको भी नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें शशिभूषण जी, आलेख के समर्थन मैं आपके अनमोल विचारों के लिए आपका हार्दिक आभार !

div81 के द्वारा
January 3, 2012

सचिन जी, सादर नमस्कार बहुत से लोग की दिल की बात को बेहतर तरीके से रखने के लिए आप का आभार | बहुत ही संतुलित नपे- तुले शब्दों में आपने मंच में ये बात उठायी है सराहनीय पहल आप की एक बार फिर से आप का आभार

    allrounder के द्वारा
    January 5, 2012

    नमस्कार दिव्या जी, आपका हार्दिक आभार आलेख की सराहना और उसके विषय से सहमती जताने के लिए ! यही कामना है इसका कोई निराकरण हो !

mparveen के द्वारा
January 3, 2012

सचिन जी नमस्कार, अपने जायज प्रश्न उठाये हैं आशा करते हैं की जागरण जंक्सन आपकी बात पे अमल करे और कविताओं और काल्पनिक रचनाओ को भी मौका दे …. ये अपने बिलकुल सही कहा है की कल्पनाशील लेख काफी मेहनत से लिखे जाते हैं . .. धन्यवाद…

    allrounder के द्वारा
    January 5, 2012

    नमस्कार प्रवीण जी, आपका बहुत – बहुत आभार इस बात से सहमती जताने के लिए की कल्पनाशील लेख काफी मेहनत से लिखे जाते हैं ! साथ ही धन्यबाद आपकी कामना के लिए के सम्बंधित मंडल का इस ओर ध्यानाकर्षण हो !

vinitashukla के द्वारा
January 3, 2012

सचिन जी, इस पोस्ट पर कमेन्ट करना मेरे लिए थोडा मुश्किल है ; क्योंकि अहिंदीभाषी क्षेत्र में रहने के कारण जागरण अखबार के कभी दर्शन ही नहीं होते. जो भी हो, आपके द्वारा दी गयी जानकारी सोचने पर विवश कर रही है. एक विचारणीय मुद्दा उठाने के लिए आपको बधाई.

    allrounder के द्वारा
    January 5, 2012

    नमस्कार विनीता जी, बड़ा हर्ष हुआ की आपने आपके लिए मुश्किल कार्य को आसान करते हुए अपने अनमोल विचार आलेख पर रखे, और मुद्दे का समर्थन किया इसके लिए आपका हार्दिक धन्यबाद ! नव वर्ष मैं आपकी रचनात्मकता और इस मंच पर यों ही प्रखर रहे इसी कामना के साथ आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !

Santosh Kumar के द्वारा
January 3, 2012

सचिन भाई जी ,.सादर नमस्कार आपके प्रश्न निश्चित ही जायज हैं ,..जो पोस्टें जागरण में छपती भी हैं वो पूरा नहीं बल्कि एक अंश ही संपादित करके छापते हैं ,.. मेरी भी एक शुरूआती पोस्ट छपी थी ,….स्थान की कमी या अन्य किसी भी वजह से रचनाओं को स्थान देना शायद जागरण परिवार के लिए कठिन होगा ,……ब्लागिंग को प्रोत्साहन देने और सुन्दर मंच प्रदान करने के लिए जागरण परिवार के हम आभारी हैं ,…. उनसे मंच को और बेहतर बनाने और रचनाओं को अधिकतम पाठक प्रदान करने हेतु उचित कदम उठाने के लिए हम जागरण से विनती करते हैं ,….. सभी ब्लागरों के हक़ में आवाज उठाने और लेख में मूरखमंच को स्थान देने के लिए हार्दिक अभिनन्दन आपका .

    allrounder के द्वारा
    January 5, 2012

    नमस्कार संतोष भाई जी, सर्वप्रथम तो आपको बधाई जो आपका ब्लोगांश प्रतिष्ठित जागरण अखबार मैं छपा, और आपका मूरख मंच सचमुच मेरी नजर मैं एक अनोखी लेखन विद्या है, जिसमे कल्पनाशीलता की एक अनोखी झलक मिलती है इसलिए उसे पूरा सम्मान मिले तो मुझे हार्दिक प्रसन्नता होगी ! अपने विचारों के माध्यम से आलेख को समर्थन देने के लिए आपका हार्दिक धन्यबाद !

akraktale के द्वारा
January 2, 2012

सचिन जी नमस्कार, नव वर्ष की आपको शुभ कामनाएं. इस मंच पर कई अच्छे काव्य रचियता हैं. जब जागरण राजनैतिक और समसामयिक लेखों को अखबार में छपने का निर्णय ले चुका है और उस पर अमल भी कर रहा है तो यह सराहनीय है.किन्तु यदि राजनैतिक और समसामयिक काव्य रचनाओं को भी उसमे स्थान दे सके तो यह काव्य रचनाकारों के साथ भी न्याय होगा.उनका भी उत्साह वर्धन होगा. साथ ही जो काव्य रचनाएं दैनिक अखबार में नहीं छाप सकती किन्तु उत्कृष्ट होती हैं उन्हें साप्ताहिक अखबार में स्थान मिले तो यह एक अच्छा फैसला होगा. मेरी भी जे जे से गुजारिश है की इन बातों पर गौर करे और ब्लागरों के उत्साह को और बढाए. सचिन जी आपका भी धन्यवाद जो आपने हमारे काव्य के रचियताओं के बारे में मंच पर आवाज उठायी. धन्यवाद.

    allrounder के द्वारा
    January 5, 2012

    नमस्कार रक्तले जी, इस लेख के सन्दर्भ मैं आपका सुझाव “साथ ही जो काव्य रचनाएं दैनिक अखबार में नहीं छाप सकती किन्तु उत्कृष्ट होती हैं उन्हें साप्ताहिक अखबार में स्थान मिले तो यह एक अच्छा फैसला होगा ! ” बहुत ही विचारनीय और उत्तम है यदि इस प्रकार से भी उत्साहवर्धन किया जाए तो भी ये अच्छा रहेगा ! आपका हार्दिक आभार रक्तले जी आपके उत्तम विचारों के लिए !

Amita Srivastava के द्वारा
January 2, 2012

सचिन जी नमस्कार आपको सबसे पहले नव वर्ष की बहुत -२ शुभकामनाये . आपने अपने इस लेख मे जो प्रश्न उठाये है ,वही प्रश्न मेरे भी दिमाग मे बराबर उथल -पुथल मचा रहे थे . मेरी भी कई रचनाये पहले पत्र -पत्रिकाओ मे प्रकाशित हो चुकी है . फिर कुछ वजह से थोडा लिखना बंद कर दिया .अब जब ये मंच मिला तो फिर से लेखन कार्य को प्रोत्साहन मिला .उसमे आप भाई बहनों के दो शब्द बहुत ही महत्त्पूर्ण भूमिका अदा करते है और उसी मे ख़ुशी होती है लेकिन दैनिक जागरण पत्र मे रचनाओ को उनके स्तर के अनुसार अवश्य प्रकाशित करना चाहिए . अपने ये प्रश्न सम्पादक मंडल के सामने रखा इसके लिए बहुत -२ धन्यवाद

    allrounder के द्वारा
    January 4, 2012

    सादर नमस्कार अमिता जी आपको भी नव वर्ष के हार्दिक शुभकामनाये, बड़ी ख़ुशी हुई ये जानकर की आपके मन मैं भी इसी तरह के प्रश्न उठ रहे थे चलिए हमने आपके प्रश्नों को आवाज दी और आपने अपने विचार आलेख पर देकर हमारा उत्साहवर्धन किया ! आशा है संपादक मंडल इस ओर ध्यान देगा और आप दोहरे उत्साह के साथ इस मंच पर अपनी कल्पनाओ को उड़ान देती रहेंगी और इस मंच के सभी साथी सदा आपका उत्साहवर्धन करते रहेंगे, नव वर्ष की इसी कामना के साथ आपका बहुत बहुत आभार !

alkargupta1 के द्वारा
January 2, 2012

सचिन जी , जागरण जंक्शन के संपादक मंडल अपने मानदंडों के आधार पर आपके सभी प्रश्नों का समाधान अवश्य करेगा… इस ओर टीम का ध्यान आकृष्ट करने के लिए धन्यवाद नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !

    allrounder के द्वारा
    January 4, 2012

    आदरणीय अलका जी, सादर प्रणाम नव वर्ष की आपको ही हार्दिक शुभकामनाये आशा है आपका विश्वास सफल हो और मेरे मन मैं उत्पन्न प्रश्नों और शंकाओ का समाधान निकले आपका हार्दिक आभार अलका जी विचार देने के लिए !

roshni के द्वारा
January 2, 2012

सचिन जी नमस्कार सबसे पहले नववर्ष की हार्दिक शुभकामनये सचिन जी आपने बहुत सही बात रखी इस मंच पर..कल्पनाशीलता ही एक लेखक और कवी की खासियत होती है और अपनी इसी कल्पना से वोह रचनाये लिखता है … मंच पर जहाँ उसे जगह मिल रही है तो समाचार पत्र पर क्यों नहीं … ये बात निराशाजनक है .. मगर उमीम्द पे दुनिया कायम है .. हो सकता है आपका ये लेख पढने के बाद कुछ कदम उठाये जाये इस और भी .. आभार

    allrounder के द्वारा
    January 4, 2012

    आपको भी नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये रौशनी जी, कल्पना शीलता के विषय मैं आप से बहतर इस मंच पर और कौन बता सकता है शायद आपके ब्लॉग की टेग लाईन भी यही है अपनी कल्पना के पंछियों को उड़ान भरने दें और वही बात मैं अपने लेख मैं कह रहा हूँ, आप प्रारंभ से ही अपनी रचनाओ से इस मंच को सुशोभित करती आ रही हैं और आगे भी करती रहें यही शुभकामनाये आपको! आपने सही कहा उम्मीद पर दुनिया कायम है, और इस बात की भी कल्पना करना चाहिए की जे जे पर भी ये मिथक टूटे और हमारे काव्य रचनाकार भी उचित जगह पा सकें ! आपका हार्दिक आभार रौशनी जी !

    allrounder के द्वारा
    January 7, 2012

    नमस्कार रौशनी जी, आपको विशेष रूप से धन्यबाद न सिर्फ आपने इस आलेख पर अपने विचार दिए बल्कि अपनी रचना ” तारों का कारोबार ” की रचना की जिससे इस आलेख को बल मिला की काव्यात्मक रचनाएँ भी प्रकाशित की जानी चाहिए ! आपका हार्दिक आभार रौशनी जी !

minujha के द्वारा
January 2, 2012

सचिन जी नमस्कार मेरे लिए ये मंच अभी नया है, मैं तो ये कहुंगी मुझे यहॉ आकर असीम संतुष्टि का एहसास हुआ,क्योंकि मैनें अबतक पत्र-पत्रिकाओं में अपनी जितनी भी रचनाएं भेजी,सब पर पहले उनकी कैंची चली फिर प्रकाशित हुई,इस मंच की सबसे बङी खासियत जो मुझे महसूस हुई वो है-हमारी मौलिकता का हनन ना करना,हमारी रचना को जस का तस प्रकाशित कर देना,हॉ आपकी इस बात पर सहमति जरूर व्यक्त करना चाहुंगी कि समाचार पत्र में प्रकाशित ब्लॉगंशों में मौलिक और सृजनात्मक रचनाओं को प्राथमिकता नही दी जाती ,ये बात बहुत निराशात्मक है,चलिए आपने पहल कर ही दी है,जेजे की संपादन मंडली अवश्य इसपर ध्यान देगी और विचार करेगी,ऐसी  आशा हम सभी करते है..,आपने एक अच्छा प्रश्न उठाया है,जो सराहनीय है

    allrounder के द्वारा
    January 4, 2012

    मीनू जी, बड़ा हर्ष हुआ जानकर की आपको इस मंच पर लेखन से असीम संतुष्टि मिलती है, बेशक जे जे ने जो मंच हमें प्रदान किया है वह असाधारण है और हम सभी अपनी ख़ुशी और आत्म संतुष्टि के लिए ही यहाँ लिखते हैं और एक दुसरे से विचारों का आदान प्रदान करते हैं ! और जागरण की अख़बार वाली पहल भी काफी उत्साहित करने वाली है किन्तु मैंने जो महसूस किया वही मंच पर रखा, आपके साथ साथ मुझे भी यही आशा है की जे जे संपादन मण्डली इस ओर ध्यान दे और कल्पनाशीलता और रचनात्मकता को भी किसी न किसी अनुपात मैं उचित स्थान दे, जिससे हमारे साथी अपनी इस कला को और निखर सकें ! आपके अनमोल विचारों के लिए आपका हार्दिक आभार मीनू जी !

Abdul Rashid के द्वारा
January 2, 2012

सचिन जी जागरण की माया जागरण ही जाने नव वर्ष की हार्दिक शुभकामना सप्रेम अब्दुल रशीद http://singrauli.jagranjunction.com/2012/01/02/यही-संदेश-हमारा/

    allrounder के द्वारा
    January 4, 2012

    नमस्कार रशीद भाई, नव वर्ष की आपको भी हार्दिक शुभकामनायें और आलेख पर अपने विचार देने के लिए आपका हार्दिक धन्यबाद !

January 2, 2012

सचिन भाई नमस्कार ! बहुत विवादित विषय है कौन छापे और कौन न छापे….क्यूंकी रचना का आकलन subjective ज्यादा होता है objective आकलन कम ॥सो हो सकता है की जेजे परिवार किसी विशेष कारण से ऐसा कर रहा हो….फिर भी मैं आपसे पूरी तरह से सहमत हूँ की कल्पनाशील रचनाओं मे जो बात होती है वो कभी भी सामयिक/ यथार्थ रचनाएँ नहीं कर पाती …आपको इस तरफ ध्यान आकर्षित कराने के लिए बहुत बहुत धन्य वाद !!

    allrounder के द्वारा
    January 4, 2012

    नमस्कार डॉक्टर साहब, आपका बहुत – बहुत आभार विचारों से सहमति जताने के लिए, मैं भी आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूँ की रचनाओ का चयन करना बेहद कठिन कार्य है किन्तु कल्पनाशील रचनाओ की नगण्यता देखकर ही मेरे मन मैं इन प्रश्नों ने जन्म लिया और जिज्ञासा वश आप सबसे इन प्रश्नों को साझा कर दिया ! हो सकता है सम्बंधित लोगों का ध्यानाकर्षण भी इस ओर हो और आगे से कुछ न कुछ रचनात्मक देखने को मिले आपका हार्दिक आभार !

rita singh 'sarjana' के द्वारा
January 2, 2012

सचिन जी , नमस्कार , नववर्ष की मंगलमय शुभकामनाये ……….l अभी कुछ दिन पहले रूटीन चेकअप कराने कलकत्ता गई थी l आदतन मैंने दैनिक जागरण अखबार लिया l जिज्ञासवश मैंने ब्लोग्वाले पृष्ट देखा तो सुखद ख़ुशी हुई ,क्योंकि वहा तिम्सी जी का ब्लोगांश था l मंच पर नई-नई आई हैं परन्तु बहुत अच्छा लिख रही हैं l मुझे बहुत अच्छा लगा l आपने सही कहा हमारे मंच पर कई साथी अपने गंभीर लेखन के लिए जाने जाते हैं l इस पर जागरण टीम को ध्यान जरुर देना चाहिए l पक्षपात नहीं होनी चाहिए l

    allrounder के द्वारा
    January 3, 2012

    रीता जी , नव वर्ष की आपको भी हार्दिक शुभकामनायें ! टिम्सी जी को मैंने भी पढ़ा है बहुत ही अच्छा लिखती हैं और अखबार मैं उनका लेख या हमारे किसी भी साथी का लेख छपे वो इसके लिए बधाई का पात्र है ! मैं इस लेख के माध्यम से सिर्फ इस बात की और ध्यान आकर्षण कराना चाहता हूँ की हमारे कल्प्नावादी लेखकों की कोई भी कल्पना अभी तक क्यों प्रकाशित न हुई ये आखिर किस कारण वश है ! आपकी प्रतिक्रिया पाकर बहुत अच्छा लगा यदि इस विषय मैं आपके कुछ सुझाव हों तो अवश्य ही रखें मंच पर ! धन्यबाद आपका !

sumandubey के द्वारा
January 2, 2012

सचिन जी नमस्कार , सर्वप्रथम आपको नववर्ष की शुभकामनाये . आपने जो भी लिखा है उससे मई सहमत हू आपको यह बताना चाहती हू जब मै नईथी ब्लॉग मंच पर तो लगभग हर ब्लॉग फीचर्ड होता था तो मुझे लगता था की क्या सारी रचनाये इस लायक है क्योकि साहित्यक लगाव के कारण लिखने के पुराने शौख को फिर चुना नेट लगते ही क्योकि यह घर बैठकर हो सकता था .पर अब मेरी कोई भी रचना फीचर्ड नही होती पर मैंने शिकायत इसलिए नहीं किया जेजे पर की नीति नियम इनके मेरे समझ से परे है .मेरा काम लिखना है अपनी बात ब्लाग्मंच पर बाटने का स्थान दिया यही बहुत है .हिंदी प्रेम के कारण मै भी अपने रचनाओं के साथ हू आप सभी लोग का प्रोत्साहन ही काफी है पाठक की आलोचनात्मक समीछा रचना के विकास के लिए अच्छी होती हैआपके प्रयास सराहनीय है . ..

    shaktisingh के द्वारा
    January 2, 2012

    आदरणीय सुमन जी, जैसा की मुझे याद है कि शुरू में आपके ब्लॉग फीचर नहीं होते थे. जैसे-जैसे आपके ब्लॉग में निखार आना शुरू हुआ तब से आपके ब्लॉग फीचर होना शुरू हुए.

    allrounder के द्वारा
    January 3, 2012

    सादर प्रणाम सुमन जी, आपका बहुत – बहुत आभार आलेख पर अपने अनमोल विचार देने के लिए, चलिए आपकी इस वर्ष की पहली ही रचना फीचर हुई इसके लिए आपको बधाई ! जागरण जंक्सन ने जो मंच प्रदान किया है उसके लिए हम सब उसके आभारी हैं मेरे प्रशन सिर्फ लेखों की रचनात्मकता के सम्बन्ध मैं हैं क्योंकि मैंने जो महसूस किया उसे व्यक्त कर दिया और मुझे अभी तक कोई भी काव्यात्मक रचना अखबार मैं दिखाई नहीं दी इसलिए मेरे मन मैं जिज्ञासा पैदा हुई क्या ये कोई नीति हैया इत्तेफाक या मेरी नजर की चूक ! आखिर कल्प्नावादी लेखों को स्थान न दिए जाने की कोई ठोस वजह तो हो ! इस सम्बन्ध मैं यदि आपके कुछ सुझाव हों तो उन्हें जरुर रखें ! नव वर्ष की आपको भी हार्दिक शुभकामनाये !

    allrounder के द्वारा
    January 3, 2012

    नमस्कार शक्ति सिंह जी नव वर्ष की आपको हार्दिक शुभकामनाये, जहाँ तक ब्लॉग फीचर होने के बात है तो आजकल तो लगभग हर ब्लॉग फीचर होता है, जे जे पर पर जहाँ बात अख़बार मैं छपने वाले लेख की आती है तो वहां आपको एक अलग ही प्रकार के लेख नजर आयेंगे और रचनात्मक, सृजनात्मक और काव्यात्मक रचनाओं को वहां पर मैंने अभी तक नहीं पाया इस्ल सम्बन्ध मैं ये लेख है ! नव वर्ष के आपको हार्दिक शुभकामनायें !


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