IPL

Hanso Hansao Khoon Badhao

101 Posts

2965 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 652 postid : 1354

क्या लिखूं मैं ?

Posted On: 18 Nov, 2011 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

PKI

क्या लिखूं मैं ?

*************************************

क्यों मेरे शब्द आज मेरे हाथ से छूट रहे हैं

क्यों दिल के ख्याल बुलबुलों की मानिंद फूट रहे हैं

लिखता हूँ कुछ फिर लिखकर क्यों मिटा देता हूँ

दिल के ख्यालों को क्यों कागज़ से हटा देता हूँ

*****************************************************

फिर सोचता हूँ ऐसा क्या लिखूं मैं ?

कैसे विचारों की इस दुनिया मैं सबसे अलग दिखूं मैं

बार-बार कलम रखता हूँ, रखकर फिर उठा रहा हूँ मैं

जैसे फिर लिखने की एक झूठी रस्म निभा रहा हूँ मैं

ये कैसी लाचारी है, जो कुछ भी लिख न पा रहा हूँ मैं

पर जो भी लिख दिया आज उसमें ही सुकून पा रहा हूँ मैं

खुश हूँ कि आज अपने परिवार से मिलने आ रहा हूँ मैं

***************************************************

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (15 votes, average: 4.73 out of 5)
Loading ... Loading ...

44 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

अलीन के द्वारा
February 5, 2012

Allrounder Ji, Saadar namaskar! सोचता हूँ आपकी रचना पर क्या लिखू, आपकी जीत लिखू या अपनी हार लिखू, न लिखने की चाहत होते हुए भी… सब कुछ लिख दिया जो, सोचता हूँ, उसको क्या यार लिखू. अनिल कुमार ‘अलीन’

    allrounder के द्वारा
    February 6, 2012

    नमस्कार भाई अनिल कुमार जी, आपकी प्यारी सी प्रतिक्रिया पर इतना ही लिख सकता हूँ…. कि न जीत के लिख न हार के ऐ दोस्त जो भी लिखना है लिख प्यार से … दिल की बात जान ही लेते हैं, जब यार मिलते हैं यार से ….. :) आपका बहुत बहुत आभार दोस्त …

roshni के द्वारा
December 16, 2011

सचिन जी देर से प्रतिर्किया के लिए माफ़ी .. magar आप की ये कविता बहुत बहुत ही अच्छी लगी .. सुंदर भावों के साथ युही लिखते रहिये

    allrounder के द्वारा
    December 17, 2011

    रौशनी जी, देर से ही सही मगर आपके विचारों और शुभकामनाओ के लिए हार्दिक आभार !

Rita Singh, 'Sarjana' के द्वारा
November 21, 2011

सचिन जी , स्वागत हैं इस मंच पर पुन: वापसी के लिए इस कविता के जरिये l बधाई

    allrounder के द्वारा
    December 6, 2011

    आपका बहुत – बहुत धन्यबाद रीता जी !

sumandubey के द्वारा
November 21, 2011

सचिन जी नमस्कार, सुंदर भाव कशमकश के कभी कभी ऐसा लगता है जब हम सोच में पद जाते है .

    allrounder के द्वारा
    November 21, 2011

    नमस्कार सुमन जी, आपका हार्दिक आभार जो आपने रचना के भावों को समझा! सचमुच कभी – कभी कशमकश मैं या ज्यादा करने के चक्कर मैं कुछ भी लिखते नहीं बनता ! मगर यदि लिखने की प्रबल इक्षा हो तो लिखे बिना दिल मानता भी नहीं है ! अपने विचार देने के लिए पुन: धन्यबाद सुमन जी !

akraktale के द्वारा
November 20, 2011

सचिन जी नमस्कार और स्वागत है आपका आपके ही मंच पर क्योंकि मै तो इस मंच पर पीछे से ही चढ़ आया था और अंतिम कतार की कोने वाली कुर्सी पर अब तक चिपक कर बैठा हूँ और आपकी नजर का इन्तजार कर रहा हूँ, एक बार आपने नजरें इनायत भी की थी किन्तु खोता सिक्का कहकर नजरे फेर ली थीं. सच है कई दिन तक की ख़ामोशी के बाद जब बोलने की बारी आती है तो बोलना तो बहुत चाहते हैं किन्तु दुविधा होती है क्या पहले कहूँ. स्वागत.

    allrounder के द्वारा
    November 20, 2011

    नमस्कार रक्तले जी , सर्वप्रथम तो आपका हार्दिक आभार स्वागत और अपने अनमोल विचार देने के लिए ! दूसरी बात रक्तले जी इस मंच की ये बहुत बड़ी खूबी है यहाँ कोई प्रथम और अंतिम कतार मैं नहीं है, और मंच हर किसी को बराबरी पर रखता है ! आपने जो नजरे इनायत बाली बात कही है रक्तले जी मैं बिलकुल भी नहीं समझ पा रहा हूँ किस सन्दर्भ मैं की है और मैंने कब आपको खोटा सिक्का बताकर नजरें फेर ली थीं, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है जहाँ तक मुझे याद है आपकी ये पहली प्रतिक्रिया है मेरे पोस्ट पर और मैंने भी आपका पहला लेख कल ही पढ़ा और पसंद आने पर तुरंत प्रतिक्रिया भी दी, हाँ पोस्ट मैं मैंने एक बेसिक गलती नोट की तो मजाकिया लहजे मैं आपको इंगित किया कहीं इस बात का अर्थ आप कुछ और तो नहीं निकाल बैठे ? यदि संभव हो और आप उचित समझे तो कृपया मेरी जिज्ञासा दूर करें ! धन्यबाद !

    akraktale के द्वारा
    November 21, 2011

    सचिन जी, कतई भी गंभीरता से ना ले शायद जितनी कुशलता आपमें है व्यंग करने की, मुझमे नहीं है. वरना तो आप कभी मेरी बात पर इतना गम्भींर ना होते.मै भी आपकी मेरे आलेख पर दी गयी प्रतिक्रया के बारे में ही लिख गया था, अब जहां करोड़ मिलना हो वहां लाख मिले तो खोटा सिक्का ही ना हुआ और इस प्रतिक्रिया के बाद भी आप जुड़े रहे यही गुजारिश मैंने मुह फेरने वाली बात के माध्यम से कही है. अभी मेरी लेखन कला कुछ कमजोर है अब धीरे धीरे ही निखार आयेगा. सहयोग के लिए धन्यवाद.

    akraktale के द्वारा
    November 21, 2011

    सचिन जी और अंतिम कतार के बारे में मै बताना भूल गया था, अंतिम कतार का अर्थ था मैं यहाँ नवागत हूँ. धन्यवाद.

    allrounder के द्वारा
    November 21, 2011

    आपका बहुत – बहुत धन्यबाद रक्तले जी , मेरी आशंकाएं दूर करने के लिए ! बात अगर इसी सन्दर्भ मैं थी फिर तो कोई बात थी ही नहीं ! मैं सोच मैं पड़ गया था की जाने – अनजाने कोई ऐसी बात तो नहीं हो गयी जो मुझे स्मरण नहीं आ रही हो !

    allrounder के द्वारा
    November 21, 2011

    रक्तले जी, अंतिम कतार से मतलब यदि नवागंतुक से है तो फिर भाईसाहब समझिये हम भी नवागंतुक ही हैं ! एक फिर से आपका धन्यबाद !

shashibhushan1959 के द्वारा
November 20, 2011

मान्यवर, सादर इस दुनिया के रंग हैं इतने, क्या-क्या देखें कहाँ-कहाँ, विस्तृत धरती क्षमता सीमित, नाज़ुक पंख करें हम क्या ? भाव मिले तो शब्द तिरोहित, शब्द मिले तो भाव नहीं, दोनों ही मिल जायें साथ में, ऐसा आविर्भाव नहीं. . गहराई लिए सुंदर भावपूर्ण रचना.

    allrounder के द्वारा
    November 20, 2011

    सादर नमस्कार , श्रीमान बहुत ही बढ़िया बात कही आपने , भाव और शब्दों का मिलन ही एक उत्तम रचना को जन्म देता है, और जब इन दोनों मैं से एक भी आपका साथ छोड़े तो रचना बहुत मुश्किल हो जाती है ! रचना की प्रशंशा के लिए आपका हार्दिक आभार शशिभूषण जी !

priyasingh के द्वारा
November 20, 2011

“बार बार कलम रखता हूँ रखकर फिर उठा रहा हूँ मै, जैसे फिर लिखने की एक झूठी रस्म निभा रहा हूँ मै ………ये तो आपने शब्दशः लेखक और रचनाकार की मनःस्थिति उतार कर रख दी है …………….बार बार पढ़ा मैंने इसे …………

    allrounder के द्वारा
    November 20, 2011

    प्रिया जी, आपका बहुत – बहुत धन्यबाद, जो आपने इस रचना को सही परखा, दरअसल कुछ अंतराल के बाद जब मैं पिछले दो चार दिन से कुछ लिखने की कोशिश कर रहा था मगर, जो भी लिखता उससे मैं संतुष्ट नहीं हो पा रहा था , अंत मैं अपनी इस लाचार मनोदशा को किसी प्रकार लिख पाया ! चूँकि आप भी अंतराल के बाद मंच पर दिखाई देती है अत निश्चित ही आपके साथ भी ऐसा होता होगा, शायद इसीलिए आपने इसे बार – बार पढ़ा इसके लिए आपका हार्दिक आभार !

abodhbaalak के द्वारा
November 20, 2011

वेलकम बैक सचिन जी कुछ न कहके (लिखके) न कहने के अदा भी खूब है कुछ तुमने कह दिया और कुछ हम ने सुन लिया आदाब अर्ज़ है. खूबसूरत ग़ज़ल के साथ आपने

    allrounder के द्वारा
    November 20, 2011

    फिर से बहुत – बहुत धन्यबाद अबोध भाई … बारम्बार आभार आपका !

manoranjanthakur के द्वारा
November 19, 2011

जो लिख दिया आपने उसको सराहता हूँ में खुस हूँ की अगली रचना का इंतजार कर रहा हूँ में

    allrounder के द्वारा
    November 19, 2011

    बहुत – बहुत धन्यबाद मनोरंजन जी जो आपने सराहा ! और आप ऐसे ही सदा खुश रहिये और सबका मनोरंजन करते रहिये यही कामना है !

jlsingh के द्वारा
November 19, 2011

त्योहारों के बाद अब फुरसत में, खुद को पा रहा हूँ मैं, खुश हूँ कि आज अपने परिवार से मिलने आ रहा हूँ मैं. इतनी खुशी जो बाँटने से कम न हो, उसे लुटाने आरहा हूँ मैं. महोदय, आप आये बहार आयी यह कहने का भी मौका दीजिये! सादर अभिवादन – जवाहर लाल सिंह

    allrounder के द्वारा
    November 19, 2011

    भाई जैल सिंह जी, बहुत – बहुत आभार जो आपने मेरी रचना को विस्तृत करती प्रतिक्रिया दी, आप सब का स्नेह रहा तो अवश्य ही जल्द ही बहार आएगी !

nishamittal के द्वारा
November 19, 2011

सचिन जी एक बड़े अन्तराल के पश्चात आपको देखकर व पढ़कर सुखद लगा.अच्छी रचना निरंतरता बनाये रखें कृपया.

    allrounder के द्वारा
    November 19, 2011

    आदरणीय निशा जी, आपका हार्दिक आभार ! मेरी कोशिश यही रहेगी की आगामी कुछ समय तक निरंतर आप लोगों से जुड़ा रहूँ !

vasudev tripathi के द्वारा
November 19, 2011

बड़े दिनों बाद आपको पढ़ने का समय मिला सचिन भाई तो आप कहते हैं क्या लिखूँ…..??? :) वैसे जो भी लिखा आपने अत्यंत गंभीर सारपूर्ण व सही लिखा। प्रशंसनीय रचना की प्रशंसा के साथ हार्दिक बधाई आपको॥

    allrounder के द्वारा
    November 19, 2011

    धन्यबाद भाई, वासुदेव , जो मेरे बिना लिखे को भी आपने प्रशंशा के योग्य समझा ! आपका बहुत – बहुत आभार !

alkargupta1 के द्वारा
November 19, 2011

सचिन जी , अपनी इस सुन्दर सी संक्षिप्त रचना के साथ मंच पर अपने परिवार से मिलने पुनः आ गए हैं बहुत ही सुखद लगा हार्दिक स्वागत है !

    allrounder के द्वारा
    November 19, 2011

    आदरणीया अलका जी, आपके स्नेहपूर्ण और उत्साह वर्धन करते स्वागत के लिए आपका ह्रदय से आभार !

Tamanna के द्वारा
November 19, 2011

बहुत बढ़िया लिखा है आपने….वाकई भावपूर्ण रचना है… लिखता हूँ कुछ फिर लिखकर क्यों मिटा देता हूँ दिल के ख्यालों को क्यों कागज़ से हटा देता हूँ…. http://tamanna.jagranjunction.com/2011/11/19/reality-shows-in-india-big-boss-show-concept-of-reality-shows/

    allrounder के द्वारा
    November 19, 2011

    आपका बहुत- बहुत आभार तमन्ना जी, जो आपने रचना के भावों को समझा और सराहा ! फिर से आपका हार्दिक आभार !

abodhbaalak के द्वारा
November 19, 2011

सचिन भाई वेल कम बैक, वैसे तो आप सदा ही हमारे दिलों में रहते हैं पर ……………… कुछ नहिः कह के भी जो कह दिया तुमने हमारे दिल को में उजालो से भर गया है वो, बहुत खूब ….

    allrounder के द्वारा
    November 19, 2011

    नमस्कार भाई, बहुत मुश्किल होता है लोगों के दिलों मैं जगह पाना और आपने हमें अपने दिल मैं जगह देकर जो सम्मान दिया है उसके लिए बस यही कहेंगे की आपके दिल मैं ये उजाला सदा बना रहे ! आपका ह्रदय से आभार, अबोध भाई !

वाहिद काशीवासी के द्वारा
November 19, 2011

सचिन भाई, इस छोटी सी सुन्दर सी कविता के माध्यम से मंच से लिए गए अंतराल को तोड़ा, बहुत अच्छा लगा। सिर्फ़ आप ही ख़ुश नहीं हैं कि आप परिवार से मिलने आ रहे हैं बल्कि परिवार भी उतना ही ख़ुश है आपके आगमन पर। सुस्वागतम एवं आभार,

    allrounder के द्वारा
    November 19, 2011

    प्रिय वाहिद भाई, ये जानकर बहुत ही सुखद एहसास हो रहा है की आज काफी दिनों के बाद मंच से जुड़ने के बाद जितनी ख़ुशी मुझे हो रही है उतनी ही ख़ुशी हमारे साथियों को भी हो रही है ! आपके उत्साहित करते स्वागत के लिए आपका हार्दिक आभार !

Ramesh Bajpai के द्वारा
November 19, 2011

पर जो भी लिख दिया आज उसमें ही सुकून पा रहा हूँ मैं खुश हूँ कि आज अपने परिवार से मिलने आ रहा हूँ मैं  प्रिय श्री सचिन जी अपनत्व , प्रेम की यह रस भरी आकांक्षा बहुत अच्छी लगी | आपसे मिलकर तो हमेशा ही बहुत अच्छा लगता है | मिठास से भरे ये भाव तो बस मन पागुर ही कर रहा है | बहुत बहुत स्वागत है |

    allrounder के द्वारा
    November 19, 2011

    आदरणीय बाजपेई जी, जैसा की आपने लिखा मुझसे मिलकर आपको सदा ही अच्छा लगता है, वैसे ही आपका आशीर्वाद प्रतिक्रिया स्वरुप पाकर हमें भी बहुत अपनत्व महसूस होता है और आज जब मैं काफी दिनों के बाद इस मंच पर कुछ लिखने की कोशिश कर रहा हूँ तो इस आशीर्वाद का महत्तव और ज्यादा बढ़ जाता है ! आपका हार्दिक आभार !

rajkamal के द्वारा
November 18, 2011

प्रिय सचिन भाई …… आदाब ! बहुत दिनों से इस मंच पर आपकी कमी खल रही थी ….. “कुछ न कहके भी सब कुछ कह दिया है तुमने कैसे बतलाये की जुदाई को कैसे सहा था हमने गर दिल अपना चिर सकता तो तुमको दिखलाता की सिर्फ चेहरे से ही बंदर नहीं हूँ हनुमान से करतब भी दिखलाता” आपके कहे मुताबिक अपने लेख में सुधार करने की कोशिश की है –पढ़ने के बाद कमीबतलाना ….. आपका स्वागत + नए साल तक आने वाले सभी त्योहारों की बधाई सहित इस पुनरागमन वाली रचना पर मुबारकबाद !

    allrounder के द्वारा
    November 19, 2011

    नमस्कार राजकमल भाई , आपका संशोधित लेख पढ़कर और वहां पर अपना नाम देखकर बहुत अच्छा लगा, और इस मंच पर फिर से इतना सम्मान देने के लिए आपका हार्दिक आभार !

Piyush Kumar Pant के द्वारा
November 18, 2011

सचिन जी ……. लंबे समय बाद आपकी कोई रचना पढ़ी….. आपके लेख शुरू से ही प्रभावशाली रहे है…. फिर चाहे वो व्यंग हो अथवा गंभीर…..

    allrounder के द्वारा
    November 19, 2011

    पियूष जी, आपका हार्दिक आभार जो आपने हमारे व्यंग और गंभीर दोनों लेखों मैं प्रभावशीलता देखी, और आपकी इस हौसला बढाती प्रतिक्रिया का प्रभाव स्वरुप हमें आगे और अच्छा लिखने मैं बहुत सहायक होगी !

Santosh Kumar के द्वारा
November 18, 2011

भाई जी ,.सादर अभिवादन पुनरागमन की बधाई ,..इस परिवार के छोटे सदस्य की तरफ से हार्दिक स्वागत ,…और क्या लिखूं आप तो आलराउंडर हैं ,..ट्रेनिओं की क्या बिसात !!….हार्दिक आभार

    allrounder के द्वारा
    November 19, 2011

    भाई संतोष कुमार जी, आपका ह्रदय से आभार जो, आपने सबसे पहले हमारा स्वागत किया, और सबसे ज्यादा ख़ुशी इस बात की की इस परिवार के नए सदस्य से जुड़ने का हमें मौका मिला आपका बहुत – बहुत आभार भाई !


topic of the week



latest from jagran