IPL

Hanso Hansao Khoon Badhao

101 Posts

2965 comments

allrounder


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by:

सियासत के खेल ……

Posted On: 1 Aug, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (5 votes, average: 4.80 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

20 Comments

तेरा उपकार

Posted On: 19 Jun, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (7 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

40 Comments

शरारत

Posted On: 5 Jun, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (7 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

41 Comments

दीवानगी

Posted On: 21 Feb, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (8 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

40 Comments

यादों के झरोखे

Posted On: 20 Sep, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (7 votes, average: 4.86 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

28 Comments

नैतिक जिम्मेदारी / अधिकार

Posted On: 13 Jul, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (10 votes, average: 4.60 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

74 Comments

क्यूँ जाऊं रवि पर जब-सब कुछ है जमीं पर (मॉडर्न कविता)

Posted On: 18 Jun, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (11 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

125 Comments

क्यूँ न लिखूँ मैं ?

Posted On: 1 Jun, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (12 votes, average: 4.67 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

52 Comments

उत्तर-प्रदेश मैं रोचक चुनावी घमासान

Posted On: 30 Jan, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (10 votes, average: 4.40 out of 5)
Loading ... Loading ...

में

65 Comments

जे.जे.ब्लॉगर्स पर व्यंग के बाउंसर्स (हैप्पी न्यू ईअर)

Posted On: 16 Jan, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (10 votes, average: 4.90 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

68 Comments

Page 1 of 1112345»10...Last »

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: Rita Singh, 'Sarjana' Rita Singh, 'Sarjana'

अरे ये क्या सरिता जी .... एक के साथ एक फ्री लगता है शतकीय पारी पर ये विशेष उपहार है आपकी ओर से :) इसे भी हम सहर्ष स्वीकारते हैं ! और हाँ ये क्या पिछले पोस्ट पर हमारे उकसाने के बाद भी आपने कोई शरारत शेयर नही की थी ..... अब कम से कम माँ सरस्वती के चरणों मैं २ पंक्तियाँ तो अर्पित कर दीजिये ... ! खैर आपने मुझे आदेश दिया है तो आपके आदेश का पालन करते हुए २ पंक्तियाँ आपकी ओर से माँ सरस्वती को समर्पित करता हूँ .. " माँ सरस्वती सदा यूँ ही मन मैं हमारे ज्ञान का दीपक जलाए रखना और हमारी सरिता जी के मन मैं हिंदी की सरिता बहाए रखना " लीजिये मैंने तो कर दी समर्पित किन्तु अब आप भी कुछ पंक्तियाँ यहाँ व्यक्त कर श्रधा सुमन अर्पित करें तो बहुत अच्छा होगा ! आपका हार्दिक आभार सरिता जी !

के द्वारा: allrounder allrounder

अरे बाप रे इतना हाई फाई नाम ''सचिन देव ''आप भी कमाल करते हैं अब सचिन के आगे देव लगा लो चाहे तुन्देलकर क्या फर्क पड़ता है भाई जो अपना नाम छुपाते हैं । कुछ भी कहिए हम तो आपको सचिन जी ही कहेंगे और आप भी आल राउंडर के नीचे सचिन लगा लीजिए आपके नाम की महत्ता बढ़ जाएगी । हा हा हा बुरा न मानिये मैंने बताया था न मैं बहुत शरारती हूँ । फ़िलहाल मेरे साथ ब्लॉग स्टार्ट करने में ऐसी कोई समस्या नहीं आई और न ही इसके बारे में ऐसा सोचा बस अपनी मंजिल पर अपनी आँख है देखते हैं कब तक मिलती है ? आपसे बात करके अच्छा लगा । नाम वाम में क्या रखा है युसूफ खान हो या दिलीप कुमार बस ऐसा कोई कम करो जिससे नाम प्रसिद्ध हो । है कि नहीं

के द्वारा: Manisha Singh Raghav Manisha Singh Raghav

शराफत बहुत जरुरी है किन्तु शरारत का दामन भी कभी नही छोडिये … हाँ शरारत करते वक्त ये अवश्य ध्यान मैं रखना चाहिए कि आपकी शरारत कहीं शराफत का दायरा तो पार नही कर रही, इससे किसी के मन को ठेस तो नहीं पहुँच रही या किसी को भौतिक या आत्मिक नुकसान तो नहीं हो रहा … और हाँ शरारत करते वक्त रिश्ते और स्थान का अवश्य ध्यान रखें वर्ना शरारत के चक्कर मैं आपकी शराफत खतरे मैं पड़ जायेगी …. उदाहरणार्थ यदि आप शादी शुदा हैं और किसी ऐसी पार्टी मैं हैं जहाँ आपकी पत्नी और बॉस की भी पत्नी है और आपका मन शरारत करने का कर रहा है तो अपनी बीबी से ही करें बॉस की बीबी से नहीं वरना दिक्कत हो सकती है ! अंत मैं यही कहना चाहूँगा कि पता नहीं आप मैं से कितने लोग मेरे आलेख से सहमत होंगे किन्तु एक बात तय है कि कभी न कभी किसी न किसी उम्र मैं आप मैं से भी हर किसी ने किसी न किसी के साथ शरारत जरुर कि होगी या आपके साथ शरारत हुई होगी …. और दिल पर हाथ रखकर कहिये क्या उस शरारत को याद करगे आपका दिल आज भी प्रफुल्लित नहीं होता ? और यदि होता है तो अपनी शरारत यहाँ शेयर कीजिये और वही खुशी फिर से हासिल कीजिये ….. ! ये शरारत बहुत अच्छी लगी आपके मुंह से , ओह आपके दिमाग से और आपकी लेखनी से ! आपके शरारत से भरे शब्द अच्छे लगे सचिन जी

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: Shweta Shweta

के द्वारा: allrounder allrounder

के द्वारा:

आदरणीय सचिन भाई, सादर नमस्कार, सर्वप्रथम तो आपको ब्लॉगर आफ दी वीक बनने हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार हो! भाई जी वाकई कमाल की रचना है आपकी, पूरी रचना पढने के दौरान हँसते-हँसते पेट में दर्द हो गया, मेरे बड़े भाई को भी मैंने आपकी यह रचना सुनाई, वो भी वाह - वाह कह उठे! सचिन भाई, आज के समय में जब कि पूरा युवा वर्ग पूरी तरह कंप्यूटर के पीछे भागता नज़र आ रहा है, आज घर-घर में कंप्यूटर मौजूद हैं, उनमे से कुछ घर ऐसे भी हैं जहाँ माता-पिता कंप्यूटर की ABCD भी नहीं जानते हैं! उन घरों में बच्चे कंप्यूटर की मदद से किस राह पर निकल पड़े हैं, आज के समय में कंप्यूटर के सदुपयोग से अधिक दुरुप्रयोग किया जा रहा है! वाकई में आपकी रचना बहुत ही उत्तम है! एक बार फिर इतनी उत्तम रचना के लिए बधाई देते हुए आपसे अपने ब्लॉग SUCH TO YEH HAI पर आने का विनम्र निवेदन करता हूँ. उम्मीद है कि आप मेरा आग्रह स्वीकार करेंगे, जिससे आपके द्वारा मिलने वाली नेक सलाहों के चलते मैं भी अपनी कलम में आप की भांति ही पैनापन ला सकू...! धन्यवाद्! साभार मधुर भारद्वाज http://madhurbhardwaj.jagranjunction.com

के द्वारा: Madhur Bhardwaj Madhur Bhardwaj

नमस्कार रौशनी जी, आपको कविता पसंद आई उसके लिए हार्दिक धन्यबाद ! वैसे तो आप भी एक कवियेत्री / शायरा / रचनाकार हैं , और अक्सर अपनी रचनाओं मैं छुरी , कटारी , चाक़ू का प्रयोग करती हैं, जिससे लगता है की आप बड़ी ही गंभीर किस्म की रचनाकार हैं और अक्सर आपकी रचनाये पढ़कर आपके फैन भ्रमित हो जाते हैं, तो क्यूँ न आप भी आज अपनी रचना के हथियार एक तरफ रखकर आने वाले समय मैं कम्पूटर पर ही कुछ लाइन प्रस्तुत करें, मेरी इस रचना को आगे बढ़ाते हुए :) मुझे लगता है आपके लिए हास्य की कुछ पंक्ति लिखना थोडा मुश्किल होगा बिना आपकी रचना के हथियार के :) फिर भी आप कोशिश करें तो कम्पूटर के पार्ट्स पर चार लाइन तो लिख ही सकती हैं ?????? :) आपका धन्यबाद रौशनी जी, प्रतिक्रिया के लिए !

के द्वारा: allrounder allrounder

महोदय, बड़े दुःख की बात है कि बालकों का निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 दिनांक 1-4-2010 से पूरे देश में लागू है किन्तु उत्तर प्रदेश में कम्प्यूटर शिक्षा हेतु यह आज तक नहीं लागू है जबकि कम्प्यूटर विषय कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य है।उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में कम्प्यूटर शिक्षा पूरी तरह अरबों, खरबोें रूपये के भ्रष्टाचार, अराजकता, कम्प्यूटर शिक्षकों के शोषण तथा सरकारी लूट को समर्पित है। बालकों का निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 38 के अनुसार उत्तर प्रदेश निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार नियमावली 2011 बनायी गयी जिसकी धारा 18 ;1द्ध के ;खद्ध में यह स्पष्ट उल्लेख है कि विद्यालय किसी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के समूह या संगठन के लाभ या किन्हीं अन्य व्यक्तियों के लाभ हेतु संचालित नहीं है। फिर भी कम्पनियों को लाभ पहुॅंचाने के उद्देश्य से सरकारों द्वारा कम्पनियों को कक्षा 6,7 व 8 की कम्प्यूटर शिक्षा ठेके पर दे दी गयी। अनुबन्ध के अनुरूप This Agreement shall be governed by the law of India बालकों का निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होते ही स्वतः ही शून्य होकर समाप्त हो जाता है। उत्तर प्रदेश निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार नियमावली 2011 धारा 23;3द्ध के बिन्दु 18 जो शिक्षक जिस विद्यालय में शिक्षण कार्य कर रहा है उस शिक्षक पर वही वेतन, भत्ते एवं सेवा शर्ते लागू होंगी और ऐसी सेवा नियमावली से शासित होंगी जैसा कि उस विद्यालय के अन्य शिक्षकों पर लागू होती है। बड़े दुःख की बात है कि उत्तर प्रदेश में कानून एवं लोकतंत्र का राज खत्म करके कम्पनियों को लाभ पहुॅंचाने के उद्देश्य से प्रदेश में बालकों का निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धाराओं का पालन नहीं किया जा रहा है तथा छात्रों और कम्प्यूटर अध्यापकों का शोषण करके सरकार के पैसे की लूट की जा रही है। आज सभी राजनैतिक पार्टियॉ छात्रों को टेबलेट, लैपटॉप, रोजगार व शिक्षा देने की बात कर रहीं है।यहॉं यह भी विचारणीय है कि छात्रों को टेबलेट, लैपटॉप के बारे में शिक्षा कौन देगा जब कि निरन्तर कम्प्यूटर शिक्षक बेरोजगार होता जा रहा है? युवकों की बेरोजगारी कैसे दूर होगी? अब प्रश्न यह उठता है कि सरकार बनाने वाली पार्टियॉं इस मुद्दे को कितनी गम्भीरता से लेती हैं? प्रश्न यह भी उठता है कि लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के रूप मंे प्रेस और मीडिया इस मुद्दे को कितनी गम्भीरता से लेते है? क्यों कि कम्प्यूटर शिक्षकों ने पत्र और साक्ष्यों के माध्यम से इस तरफ प्रमुख राजनैतिक पार्टियों, प्रेस एवं मीडिया का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है। हम आशा करते है कि इस मुद्दे पर आप अपनी राय देंगे।

के द्वारा:

के द्वारा: allrounder allrounder

के द्वारा: Rakesh Rakesh

नमस्कार राजकमल भाई, सबसे पहले तो बधाई आपको जो आपकी जो आपकी अभिलाषा पूर्ण हुई और माननीय जे जे ने ये विश्वास दिलाया है की जागरण की कोई नीति विशेष नहीं है जिससे की वह किसी विशेष प्रकार के लेखांश ही प्रकाशित करेगा, ये बहुत ही अच्छी बात है ! ये जानकर भी ख़ुशी हुई की निशा जी और आपके बीच का मनमुटाव ख़त्म हो गया ! जे जे मंच पर सबको अपने विचार रखने का सामान अधिकार है, और वैसे ही अन्य ब्लॉगर्स और पाठक को भी ये अधिकार है की वे आपके ब्लॉग्स पर अपने विचार दे अथवा न दे ! और हो सकता है उसके विचार आपके लेख से अलग हों, इसमें किसी को भी बुरा मानने की आवश्यकता नहीं है हम सब को मंच पर एक बात समझनी चाहिए की ये एक वैचारिक मंच है और हम सब यहाँ वैचारिक आदान - प्रदान के लिए ही लिखते और पढ़ते हैं ऐसे मैं मतभेद होना स्वाभाविक है, किन्तु मतभेद की बजह से मनभेद नहीं होना चाहिए ! एक बार आपका फिर से हार्दिक आभार !

के द्वारा: allrounder allrounder

आदरणीय ऑलराउंडर जी, सादर अभिवादन. निश्चित तौर पर जे जे ब्लॉग और सम्मानित मेरा समाचार पत्र दैनिक जागरण में स्थान पाना मेरे लिए तो गौरव की ही बात है. जीवन के अंतिम काल में पहली बार स्थान मिला और सम्मान. अब तक केवल सम्मान ही मिलता रहा स्थान नहीं. आप दोनों का अगर में शुक्रिया न करूं तो कृतघ्नता होगी. वैसे मैंने अपने जीवन काल में किसी को धन्यवाद नहीं दिया क्यों कि मैंने उसका आभार जीवन भर संजो के रखा. थैंक्स कह के तत्काल हिसाब नहीं चुकता किया. अपने सम्मान से ज्यादा मुझे अपने जागरण परिवार के सम्मान एवं उनके गौरव पूर्ण इतिहास एवं वर्तमान एवं भविष्य का सम्मान प्यारा है . न तो में लेखक हूँ न कवि, न ही साहित्यकार. वादा किया था योगदान करते समय कि अच्छा देने का प्रयास करूंगा. ये तो आप बगैर लाग लपेट के तै करेंगे कि मेरा स्तर क्या है. तुम भी सितारा बन जाओ कि पीड़ा नहीं निकल पा रही है. समय के साथ मिट जाए शायद. कविता हमने अपने मित्रों, परिवार में बाँट दी है कि अपने बच्चों को पढ़ायें. प्रेरणा मिलेगी. जब आप बताएँगे कि नाना या बाबा जो भी सम्बन्ध निकले ने लिखी थी केवल तुम्हारे लिए. स्वभाव के विपरीत धन्यवाद आप सभी का. पर एहसान नहीं भूलूंगा आजीवन ये मेरा वादा है.

के द्वारा: PRADEEP KUSHWAHA PRADEEP KUSHWAHA

माननीय जागरण जंक्सन परिवार को मेरी ओर से हार्दिक आभार जो, न सिर्फ मेरी शंकाओं का समाधान किया अपितु तत्काल ही इस ओर ध्यान देकर हमारे मंच के कल्प्नावादी साथियों की रचनाओ को स्थान भी दिया ! और आपकी ये बात पढ़कर अत्यधिक प्रसन्नता हुई की जबसे मैंने अखबार का वह विशेष खंड देखना आरंभ किया था जहाँ जे जे मंच के साथियों के ब्लोगांश प्रकाशित होते हैं वहां किसी भी काव्यात्मक / सृजनात्मक रचना को न पाना एक संयोग मात्र था, जागरण की कोई नीति नहीं ! क्योंकि संयोग कभी न कभी ख़त्म होते हैं किन्तु यदि कोई नीति बना ली जाए तो उसे प्रभावित करना न ही हमारे वश मैं है न ही हमारा मंतव्य है ! मुझे सही - सही अंदाजा नहीं किन्तु जे जे पर प्रतिदिन 100 से ज्यादा ब्लॉग पोस्ट किये जाते हैं ऐसे मैं किन्ही 2 ब्लोग्स का चुनाव अपने आप मैं काफी मुश्किल है ये बात मैं भली भांति समझता हूँ, इसलिए मैंने लगातार 10 दिनों तक इस बात पर गौर किया, और उसके बाद भी लेख लिखने से पहले एक बार फिर से वह अखबार एकत्र कर उनका अवलोकन किया ! तब मुझे यह संयोग थोडा अजीब लगा और प्रश्न उठे की कहीं ये संयोग इतना लम्बा न हो जाए की ये एक प्रथा बन जाए और ये प्रथा किसी ऐसी नीति का रूप ले ले जिससे इस मंच की एक विद्या विशेष प्रभावित हो ! अत अपने मन मैं उत्पन्न शंकाओं / प्रश्नों को आलेख का रूप दिया, मैं इस आलेख के माध्यम से सिर्फ यही कहना चाहता था की प्रकाशन से पहले रचना / आलेख की गुणवत्ता देखी जाए न की उसका विषय या ब्लोगर का नाम ! और मंच के और साथियों के विचारों के संबल से इस आलेख के सकारात्मक परिणाम निकले यह सबसे उज्जवल पहलू रहा ! मैं पूरी जागरण जंक्सन परिवार का ह्रदय से आभारी हूँ जो उन्होंने इस ओर पूरी तत्परता से ध्यान दिया ! आशा है आगे भी मंच पर आने वाली किन्ही भी समस्याओं का निदान यों ही होता रहेगा और मंच और मंच पर लिखने वालों का विश्वास एक दूसरे के प्रति यों ही बरक़रार रहेगा ! समस्त जागरण परिवार को मेरी ओर से नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !

के द्वारा: allrounder allrounder

आदरणीय ऑलराउंडर जी, जागरण जंक्शन मंच ने कभी भी अपनी नीति के अंतर्गत इस बात को नहीं जाहिर किया कि दैनिक जागरण संपादकीय पृष्ठ पर किस कैटगरी की ब्लॉग रचनाएं प्रकाशित की जाएंगी. सामान्यतः किसी भी श्रेणी की कोई भी उत्कृष्ट रचना प्रकाशित हो सकती है. ये मात्र संयोग की बात है कि जब से आपने इस विशेष खंड को देखना आरंभ किया तो आपको केवल सामाजिक-राजनैतिक या समसामयिक विषय ही प्रकाशित होते दिखाई पड़े. किंतु फिर भी इस ओर ध्यानाकर्षित करने के लिए आभार. भविष्य में भी काव्य या व्यंग्य जैसी श्रेणी की रचनाएं दैनिक जागरण संपादकीय पृष्ठ पर सुशोभित होती रहेंगी. जागरण जंक्शन पर ब्लॉगिंग के लिए आपका आभार. धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार

के द्वारा: JJ Blog JJ Blog

नमस्कार टिम्सी जी, नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये आपको ! आपके प्रकाशित लेख को जागरण मैं मैंने भी देखा था, और इससे पहले भी मैंने आपका एक लेख जो की जागरण मैं प्रकाशित हुआ था देखा था और जब भी मंच के किसी भी साथी का लेख देखता हूँ तो प्रसन्नता होती है ! हालांकि मेरे लिए ये तय करना काफी मुश्किल है की आप कल्प्नावादी लेखिका है या यथार्थवादी क्योंकि आप इतनी कुशलता से अपने लेख लिखती हैं जो की कल्पनाओं से शुरू होकर यथार्थ पर समाप्त होते हैं, फिर भी आपने हमारे प्रयास को सराहा उसके लिए आपका हार्दिक आभार ! साथ ही ये जानकर और भी प्रसन्नता हुई की आपकी सखी ने भी एक रचना गढ़ी, यदि उन्होंने इसे जे जे पर पोस्ट की है तो कृपया उस पोस्ट का नाम बताने का कष्ट करें ताकि हम भी हमारे एक और कल्प्नावादी साथी का स्वागत कर सकें ! एक बार फिर से आपका हार्दिक आभार !

के द्वारा: allrounder allrounder

नमस्कारम राजकमल भाई, " कहाँ थे आप जमाने के बाद आये हैं, पर फिर भी बहार जाने के पहले आये हैं " आपको भी नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें ! भाई आपकी प्रतिक्रिया भी यथार्थवादी न होकर कल्प्नावादी होती है और इस प्रतिक्रिया के जरिये हौसला अफजाई करने के लिए हार्दिक शुक्रिया ! और आपने बिलकुल मेरे मन की बात कही की यदि जे जे की और से इस पर कोई प्रतिक्रिया आती तो बहुत अच्छा होता, किन्तु कोई बात नहीं उन्होंने सुझावों पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है न की जवाव देना ! अब एक बात का जवाव आपसे चाहूँगा की जैसा आपने खुद ही कहा की आपका ध्यान भी इस ओर गया था और देर सवेर आप इस पर जरुर लिखते, तो क्या आपके लेख मैं मेरा नाम नहीं होता ( भले ही जरुरत से थोडा कम होता ) पर होता फिर आपने ये कर्जदार वाली बात कहकर मजा किरकिरा कर दिया ! भाई मैंने जो महसूस किया वही लिखा है न जरुरत से ज्यादा न जरुरत से कम और भाई इस मंच पर जब भी कल्प्नावादी ( मेरी परिभाषानुसार ) लेखकों की बात आएगी तो मैं नींद मैं उठकर भी आपका नाम अवश्य लिखूंगा , बिना लेजर देखे की किसका क्या कर्ज चुकाना है ! इसलिए भाई ये कर्जा वर्जा छोडो और कुछ धमाल करो भाई ! एक बार फिर से nay वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये आपको !

के द्वारा: allrounder allrounder

प्रिय सचिन भाई ...... नमस्कारम ! जागरण के होम पेज पर आपकी प्रतिकिर्या से आपके इस लेख की बाबत पता चला ..... *मेरे मन में भी इस बारे में एकाध बार ही विचार उठा था लेकिन फिर दूसरे झमेलों में पड़ कर भूल गया *आपका हार्दिक धन्यवाद की आपने अपने इस लेख में ना केवल इस अहम मुद्दे लों उठाया बल्कि उसमे काफी ज्यादा (जरूरत से ज्यादा ) जगह देकर मुझको भी नवाजा *एक बार मैंने आपका जिक्र मैंने लेख में किया था (वोह भी आपके द्वारा लेख में सुधार के लिए कहने पर ) उसके बदले में आपने लिख कर अपना खुद का कर्ज तो चुका दिया है लेकिन मुझ पर कभी ना उतारने योग्य कर्ज चढ़ा दिया है अब मैं गर्व से कह सकता हूँ की “प्रिय सचिन भाई मैं आजीवन आपका कर्जदार रहूँगा – हा हा हा हा हा हा” *इतनी जल्दी तो भगवान भी नहीं सुनता भाई जितनी जल्दी की आपने मेरी अनकही करुण पुकार सुन ली है ..... *यह जान कर मन को हर्ष हुआ की जागरण ने आपके अनमोल सुझावों पर अम्ल करना शुरू कर दिया है मेरी तरफ से भी इस जंग को जीतने के लिए जागरण के इस अकेले अन्ना को मेरा सलाम ! लेकिन एक मलाल रह गया की आपके इस ब्लॉग पर जागरण को कुछ स्प्श्तिक्र्ण जरूर देना चाहिए था ..... फिर भी देर आयद दुरुस्त आयद खुशी की बात है की सुबह का भुला हुआ शाम से पहले ही (दोपहर ) को घर वापिस आ गया है फिर से ढेरों बधाईया ढ़ेरो हार्दिक आभार सहित *मुबारकबाद (आठ दिन पुराने) नए साल की

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

आदरणीय सचिन जी, सबसे पहले सादर नमस्कार....फिर नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ....और इसके बाद माफी भी चाहूँगा कि आपके आलेख पर देर से प्रतिक्रिया दे रहा हूँ । दरअसल इन दिनों परीक्षाओं के कारण कुछ व्यस्त हो गया था सो मंच पर नहीं आ पाया । आपने बहुत अच्छा विषय उठाया और अच्छी बात यह रही कि माननीय जे जे टीम ने इस पर सरहनीय एवं त्वरित कदम भी उठाया है । इसके लिए निश्चय ही आप बधाई के एवं जे जे टीम हार्दिक आभार के पात्र हैं । . * * * * * * * * * * * * * * * . इन दिनों मैं जब भी किसी माननीय ब्लॉगर की किसी भी रचना पर अपने विचार रखता हूँ तो वह उस ब्लॉगर के अकाउंट की "स्पैम" श्रेणी में चली जाती है । इस विषय पर मैंने जे जे पुनर्निवेश पर भी लिखा, कुछ माननीय ब्लॉगर के ब्लॉग पर प्रतिक्रिया-स्वरूप भी लिखा, जे जे के आधिकारिक ब्लॉग पर भी लिखा एवं अंत में अपने ब्लॉग पर भी एक पोस्ट इसके बारे में लिखी लेकिन कोई समाधान नहीं निकाला गया । थोड़े दिन बाद 'जे जे फीडबैक' की ओर से एक मेल आई जिसमे इस समस्या को दूर करने के लिए मेरे ब्लॉग अकाउंट का पासवर्ड मांगा गया था जो मैंने उपलब्ध करा दिया था लेकिन अब भी समस्या जस की तस है । इसलिए आपसे एक गुज़ारिश करना चाहूँगा कि आप इस बारे में अपने 'फुल्ली फालतू' चैनल के माध्यम से 'जे जे' तक इस बात को पहुंचाएँ तो शायद इसका कुछ हल निकले और इस नादान+अंजान को होने वाली असुविधा कुछ कम हो !! ;) सादर आभार !!

के द्वारा: संदीप कौशिक 'राही अंजान' संदीप कौशिक 'राही अंजान'

मीनू जी, बड़ा हर्ष हुआ जानकर की आपको इस मंच पर लेखन से असीम संतुष्टि मिलती है, बेशक जे जे ने जो मंच हमें प्रदान किया है वह असाधारण है और हम सभी अपनी ख़ुशी और आत्म संतुष्टि के लिए ही यहाँ लिखते हैं और एक दुसरे से विचारों का आदान प्रदान करते हैं ! और जागरण की अख़बार वाली पहल भी काफी उत्साहित करने वाली है किन्तु मैंने जो महसूस किया वही मंच पर रखा, आपके साथ साथ मुझे भी यही आशा है की जे जे संपादन मण्डली इस ओर ध्यान दे और कल्पनाशीलता और रचनात्मकता को भी किसी न किसी अनुपात मैं उचित स्थान दे, जिससे हमारे साथी अपनी इस कला को और निखर सकें ! आपके अनमोल विचारों के लिए आपका हार्दिक आभार मीनू जी !

के द्वारा: allrounder allrounder

सादर प्रणाम सुमन जी, आपका बहुत - बहुत आभार आलेख पर अपने अनमोल विचार देने के लिए, चलिए आपकी इस वर्ष की पहली ही रचना फीचर हुई इसके लिए आपको बधाई ! जागरण जंक्सन ने जो मंच प्रदान किया है उसके लिए हम सब उसके आभारी हैं मेरे प्रशन सिर्फ लेखों की रचनात्मकता के सम्बन्ध मैं हैं क्योंकि मैंने जो महसूस किया उसे व्यक्त कर दिया और मुझे अभी तक कोई भी काव्यात्मक रचना अखबार मैं दिखाई नहीं दी इसलिए मेरे मन मैं जिज्ञासा पैदा हुई क्या ये कोई नीति हैया इत्तेफाक या मेरी नजर की चूक ! आखिर कल्प्नावादी लेखों को स्थान न दिए जाने की कोई ठोस वजह तो हो ! इस सम्बन्ध मैं यदि आपके कुछ सुझाव हों तो उन्हें जरुर रखें ! नव वर्ष की आपको भी हार्दिक शुभकामनाये !

के द्वारा: allrounder allrounder

सचिन भाई जी ,.सादर नमस्कार आपके प्रश्न निश्चित ही जायज हैं ,..जो पोस्टें जागरण में छपती भी हैं वो पूरा नहीं बल्कि एक अंश ही संपादित करके छापते हैं ,.. मेरी भी एक शुरूआती पोस्ट छपी थी ,....स्थान की कमी या अन्य किसी भी वजह से रचनाओं को स्थान देना शायद जागरण परिवार के लिए कठिन होगा ,......ब्लागिंग को प्रोत्साहन देने और सुन्दर मंच प्रदान करने के लिए जागरण परिवार के हम आभारी हैं ,.... उनसे मंच को और बेहतर बनाने और रचनाओं को अधिकतम पाठक प्रदान करने हेतु उचित कदम उठाने के लिए हम जागरण से विनती करते हैं ,..... सभी ब्लागरों के हक़ में आवाज उठाने और लेख में मूरखमंच को स्थान देने के लिए हार्दिक अभिनन्दन आपका .

के द्वारा: Santosh Kumar Santosh Kumar

सचिन जी नमस्कार, नव वर्ष की आपको शुभ कामनाएं. इस मंच पर कई अच्छे काव्य रचियता हैं. जब जागरण राजनैतिक और समसामयिक लेखों को अखबार में छपने का निर्णय ले चुका है और उस पर अमल भी कर रहा है तो यह सराहनीय है.किन्तु यदि राजनैतिक और समसामयिक काव्य रचनाओं को भी उसमे स्थान दे सके तो यह काव्य रचनाकारों के साथ भी न्याय होगा.उनका भी उत्साह वर्धन होगा. साथ ही जो काव्य रचनाएं दैनिक अखबार में नहीं छाप सकती किन्तु उत्कृष्ट होती हैं उन्हें साप्ताहिक अखबार में स्थान मिले तो यह एक अच्छा फैसला होगा. मेरी भी जे जे से गुजारिश है की इन बातों पर गौर करे और ब्लागरों के उत्साह को और बढाए. सचिन जी आपका भी धन्यवाद जो आपने हमारे काव्य के रचियताओं के बारे में मंच पर आवाज उठायी. धन्यवाद.

के द्वारा: akraktale akraktale

सचिन जी नमस्कार मेरे लिए ये मंच अभी नया है, मैं तो ये कहुंगी मुझे यहॉ आकर असीम संतुष्टि का एहसास हुआ,क्योंकि मैनें अबतक पत्र-पत्रिकाओं में अपनी जितनी भी रचनाएं भेजी,सब पर पहले उनकी कैंची चली फिर प्रकाशित हुई,इस मंच की सबसे बङी खासियत जो मुझे महसूस हुई वो है-हमारी मौलिकता का हनन ना करना,हमारी रचना को जस का तस प्रकाशित कर देना,हॉ आपकी इस बात पर सहमति जरूर व्यक्त करना चाहुंगी कि समाचार पत्र में प्रकाशित ब्लॉगंशों में मौलिक और सृजनात्मक रचनाओं को प्राथमिकता नही दी जाती ,ये बात बहुत निराशात्मक है,चलिए आपने पहल कर ही दी है,जेजे की संपादन मंडली अवश्य इसपर ध्यान देगी और विचार करेगी,ऐसी  आशा हम सभी करते है..,आपने एक अच्छा प्रश्न उठाया है,जो सराहनीय है

के द्वारा: minujha minujha

सचिन जी नमस्कार , सर्वप्रथम आपको नववर्ष की शुभकामनाये . आपने जो भी लिखा है उससे मई सहमत हू आपको यह बताना चाहती हू जब मै नईथी ब्लॉग मंच पर तो लगभग हर ब्लॉग फीचर्ड होता था तो मुझे लगता था की क्या सारी रचनाये इस लायक है क्योकि साहित्यक लगाव के कारण लिखने के पुराने शौख को फिर चुना नेट लगते ही क्योकि यह घर बैठकर हो सकता था .पर अब मेरी कोई भी रचना फीचर्ड नही होती पर मैंने शिकायत इसलिए नहीं किया जेजे पर की नीति नियम इनके मेरे समझ से परे है .मेरा काम लिखना है अपनी बात ब्लाग्मंच पर बाटने का स्थान दिया यही बहुत है .हिंदी प्रेम के कारण मै भी अपने रचनाओं के साथ हू आप सभी लोग का प्रोत्साहन ही काफी है पाठक की आलोचनात्मक समीछा रचना के विकास के लिए अच्छी होती हैआपके प्रयास सराहनीय है . ..

के द्वारा: sumandubey sumandubey

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

के द्वारा: manoranjanthakur manoranjanthakur

ससिन धेव जी ...... नमस्कारम ! *मैं भी सोच रहा हूँ कि अगले किसी खत में मजमून और ही डाल कर जे. जे. के पाठकों का इम्तिहान ले ही लिया जाए – क्या मजेदार सीन होगा –सीन पर सीन ..... हा हा हा हा – वाह वाह वाह ! *अगली बार मेरी शादी का पैगाम खैत्रीना के पास लेकर जरूर जाना .... राहुल कि शादी कराकर आपको क्या मिलेगा .... जबकि मेरी शादी करवाकर खैत्रीना के हाथों से गर्मागर्म चाय और लिव भजन भी सुनने के लिए मिलेंगे अलग से.... * खैत्रीना का फोन + फैक्स नम्बर ले लेना ताकि मेरे खानदान का पता चलते ही तुरंत ही उसको बताया जा सके .... और बाकि कि सारी खासियते मुझमे शोले के वीरू जैसी ही है –“जय भाई” जय श्री राधे कृष्ण (उम्मीद से दोगुणा मिला है –मुबारकबाद )(देखना कहीं इसी खुशी में मेरी बात दो जगह पर मत चला देना – ओनली खैत्रीना) :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: